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भारत में रहने वाले द्रविड़ों का इतिहास

November 17, 2016
भारत में रहने वाले द्रविड़ों का इतिहास

भारत में रहने वाले द्रविड़ों का इतिहास

कुछ लोगों का दावा है कि द्रविड़ मूल रूप से भारत के उत्तरी हिस्से में रहा करते थे और बाद में आर्यों के आक्रमण के बाद उन्हें देश के दक्षिणी हिस्से की ओर धकेल दिया गया। इस वजह से 28 प्रतिशत भारतीय द्रविड़ हैं और वह दक्षिण भारत में रहते हैं और द्रविड़ भाषाओं में से एक (जिनमें तमिल, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ और तुलू शामिल हैं) उनकी मुख्य भाषा है। द्रविड़ भाषा में तीन उप-समूह हैं। उत्तरी द्रविड़, मध्य द्रविड़ और दक्षिणी द्रविड़। मौजूदा समय में, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु द्रविड़ आबादी के मुख्य हिस्से हैं, जबकि शेष 72 प्रतिशत आर्य हैं जो उत्तर भारत में रहते हैं। इन भाषाओं का मूल अंतर ही दक्षिण और उत्तर भारतीय लहजे में होने वाले अंतर का मुख्य कारण है।

हम भारत में रहने वाले द्रविड़ लोगों के बारे में काफी कम जानते हैं। खासकर उन लोगों के बारे में जो आर्यों से पहले तक देश में रहा करते थे। आर्य ईरान और दक्षिणी रूस से होकर उत्तरी भारत में आए और फिर यहीं बस गए।

कुछ भाषाविद् मानते हैं कि द्रविड़ लोग समूचे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले हुए थे और इसी वजह से सिंधु घाटी की सभ्यता (हड़प्पा और मोहेंजोदड़ो) को द्रविड़ सभ्यता के तौर पर भी संबोधित किया जाता है। हालांकि, सिंधु घाटी सभ्यता को द्रविड़ सभ्यता कहा जाना चाहिए या नहीं, यह विवादित है।

आज, द्रविड़ लोग मध्य भारत में आदिवासी के तौर पर रहते हैं जिन्हें गोंड कहा जाता है। इसी तरह कर्नाटक, उत्तरी केरल और दक्षिण महाराष्ट्र में कन्नाडिगारु द्रविड़ रहते हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्वी हिस्से और ओडिशा में कोंधा द्रविड़ मिलते हैं। इसी तरह कर्नाटक और उत्तरी केरल में कोडावास द्रविड़ रहते हैं। इसके अलावा कुरुख, मलयाली, तमिल, तेलुगू और तुलुवा लोग हैं जो मिलकर भारत के द्रविड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

द्रविड़ मूल रूप से शांतिप्रिय किसान समुदाय के लोग हैं। उन्होंने किसी भी युद्ध कला में महारत हासिल नहीं की थी। यह माना जाता है कि जब आर्यों ने भारत पर आक्रमण किया तो द्रविड़ उनका प्रतिकार नहीं कर सके। इसके बाद आर्यों ने ही द्रविड़ों को दक्षिणी हिस्से में धकेल दिया। इसकी एक बड़ी वजह यह भी थी कि आर्यों को न केवल हथियार बनाने और उन्हें चलाने का ज्ञान था, बल्कि वे रथ भी बना और चला सकते थे। इसी तरह द्रविड़ बेहद समृद्ध संस्कृति में रहते थे। वे जिंदगी के हर एक प्रकार की आराधना करते थे। इनमें औषधियां और पेड़-पौधे भी शामिल थे। आर्यों के आने के बाद से स्वर्ग और भगवान अस्तित्व में आए, जिसने नाटकीय ढंग से समाज को बदल दिया।

द्रविड़ों के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है। इस वजह से सिर्फ पुरातत्व और भाषा से जुड़े अध्ययन ही उनके बारे में सूचना हासिल करने का मुख्य स्रोत है। द्रविड़ लोगों के शरीर का रंग गहरा होता है। बाल भी गहरे काले होते हैं। आंखें व माथा थोड़ा बड़ा होता है। शरीर की बनावट के आधार पर यह माना जाता है कि द्रविड़ों की उत्पत्ति अफ्रीकी मूल की रही होगी।

एन्थ्रोपोलॉजिकल (मानव शास्त्रीय) और जेनेरिक आंकड़ों के मुताबिक, यह लोग करीब 50 हजार साल पहले अफ्रीका से पलायन कर भारत के दक्षिणी हिस्से में पहुंचे थे। नदियों और उर्वर जमीन की वजह से वे दुनिया के अन्य हिस्सों के बजाय भारत में ही बड़ी संख्या में बस गए।

लेकिन कुछ सिद्धांत और अध्ययन ऐसे भी हैं जो द्रविड़ों के अफ्रीकियों, आर्यों के आक्रमण और उनके दक्षिण भारत की ओर पलायन करने के लिंक स्थापित करते हैं। यह सभी सिद्धांत इतना जरूर बताते हैं कि द्रविड़ बेहद क्लासी और कुशल नस्ल के लोग थे।

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