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झुम्पा लाहिड़ी की जीवनी

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झुम्पा लाहिड़ी वीरवौलिया का जन्म जुलाई 1967 में लंदन में निलांजना सुदेशना के रूप में हुआ था। वह दक्षिण किंग्टाउन, रोड आइसलैंड में आ कर रहने लगीं थी। उन्हें उनकी पुस्तक “इंटरप्रेटर ऑफ मैलाडीज” के लिए वर्ष 2000 में, 2000 पुलित्जर पुरस्कार मिला।

ये पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह पहली एशियाई थीं। वह बंगाली मूल की एक भारतीय अमेरिकी लेखिका हैं, जिन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया और फिर अंग्रेजी साहित्य, क्रिएटिव राइटिंग और तुलनात्मक साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की तथा अंत में पुनर्जागरण अध्ययन में पीएच.डी. किया। वह 1971-से 1998 तक प्रोविन्सेटाउन की एक फाइन आर्ट्स वर्क सेंटर में एक सहकर्मी रही थीं। सन् 2001 में उन्होंने अल्बर्टो वुआरवोऊलिस-बुश से शादी की, जो एक पत्रकार थे।

झुम्पा लाहिड़ी ने बॉस्टन विश्वविद्यालय  और रोड आइसलैंड स्कूल ऑफ डिजाइन में क्रिएटिव राइटिंग विषय की शिक्षिका रही। उनकी पहली किताब, “इंटरप्रेटर ऑफ मैलाडीज” भारतीयों या भारतीय आप्रवासियों के जीवन से संबंधित मुद्दों पर आधारित है। उनकी दूसरी पुस्तक “द नेमेसेक” 2003 में प्रकाशित हुई थी। काल पेनन द्वारा अभिनीत फिल्म, नेमेसेक उसी उपन्यास के नाम पर आधारित है।

झुम्पा लाहिड़ी ने कई पुरस्कार जीते हैं, जिसमें 1993 में हेनफील्ड फाउंडेशन की तरफ से मिला ट्रांसएटलांटिक अवार्ड, सन् 1999 में लघु कथा “इंटरप्रेटर ऑफ मैलादीज़” के लिए ओ-हेनरी पुरस्कार, 2000 में “इंटरैक्ट्री ऑफ मैलाडीज” के लिए पीएएन / हेमिंग्वे पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ फिक्शन डेथ ऑफ द इयर), द न्यू यॉर्कर का बेस्ट डेब्यूट ऑफ द इयर फॉर “इंटरप्रेटर ऑफ मैलाडीज” और एम.एफ.के. फिशर 2000 में जेम्स बेअर्ड फाउंडेशन से प्रतिष्ठित लेखन पुरस्कार और प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार भी शामिल हैं। मई 2000 में, उनकी कहानी “द थर्ड एंड फाइनल कॉन्टिनेंट” समर 1999 की द न्यू यॉर्कर की एक पुस्तक में प्रकाशित हो चुकी थी, जो तीन कहानियों में से एक थी, जिसे कथा साहित्य के लिए नेशनल मैगज़ीन अवार्ड मिला था।

Categories: Literature
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