अहिल्याबाई होल्कर (1725-1795) एक महान शासक थी और मालवा प्रांत की महारानी। लोग उन्हें राजमाता अहिल्यादेवी होल्कर नाम से भी जानते हैं और उनका जन्म महाराष्ट्र के चोंडी गांव में 1725 में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे खुद धनगर समाज से थे, जो गांव के पाटिल की भूमिका निभाते थे।

उनके पिता ने अहिल्याबाई को पढ़ाया-लिखाया। अहिल्याबाई का जीवन भी बहुत साधारण तरीके से गुजर रहा था। लेकिन एकाएक भाग्य ने पलटी खाई और वह 18वीं सदी में मालवा प्रांत की रानी बन गईं।

युवा अहिल्यादेवी का चरित्र और सरलता ने मल्हार राव होल्कर को प्रभावित किया। वे पेशवा बाजीराव की सेना में एक कमांडर के तौर पर काम करते थे। उन्हें अहिल्या इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने उनकी शादी अपने बेटे खांडे राव से करवा दी। इस तरह अहिल्या बाई एक दुल्हन के तौर पर मराठा समुदाय के होल्कर राजघराने में पहुंची। उनके पति की मौत 1754 में कुंभेर की लड़ाई में हो गई थी। ऐसे में अहिल्यादेवी पर जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने अपने ससुर के कहने पर न केवल सैन्य मामलों में बल्कि प्रशासनिक मामलों में भी रुचि दिखाई और प्रभावी तरीके से उन्हें अंजाम दिया।

मल्हारराव के निधन के बाद उन्होंने पेशवाओं की गद्दी से आग्रह किया कि उन्हें क्षेत्र की प्रशासनिक बागडोर सौंपी जाए। मंजूरी मिलने के बाद 1766 में रानी अहिल्यादेवी मालवा की शासक बन गईं। उन्होंने तुकोजी होल्कर को सैन्य कमांडर बनाया। उन्हें उनकी राजसी सेना का पूरा सहयोग मिला। अहिल्याबाई ने कई युद्ध का नेतृत्व किया। वे एक साहसी योद्धा थी और बेहतरीन तीरंदाज। हाथी की पीठ पर चढ़कर लड़ती थी। हमेशा आक्रमण करने को तत्पर भील और गोंड्स से उन्होंने कई बरसों तक अपने राज्य को सुरक्षित रखा।

रानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईं. वहां उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और आलीशान अहिल्या महल बनवाया। पवित्र नर्मदा नदी के किनारे बनाए गए इस महल के ईर्द-गिर्द बनी राजधानी की पहचान बनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री। उस दौरान महेश्वर साहित्य, मूर्तिकला, संगीत और कला के क्षेत्र में एक गढ़ बन चुका था। मराठी कवि मोरोपंत, शाहिर अनंतफंडी और संस्कृत विद्वान खुलासी राम उनके कालखंड के महान व्यक्तित्व थे।
एक बुद्धिमान, तीक्ष्ण सोच और स्वस्फूर्त शासक के तौर पर अहिल्याबाई को याद किया जाता है। हर दिन वह अपनी प्रजा से बात करती थी। उनकी समस्याएं सुनती थी। उनके कालखंड (1767-1795) में रानी अहिल्याबाई ने ऐसे कई काम किए कि लोग आज भी उनका नाम लेते हैं। अपने साम्राज्य को उन्होंने समृद्ध बनाया। उन्होंने सरकारी पैसा बेहद बुद्धिमानी से कई किले, विश्राम गृह, कुएं और सड़कें बनवाने पर खर्च किया। वह लोगों के साथ त्योहार मनाती और हिंदू मंदिरों को दान देती।

एक महिला होने के नाते उन्होंने विधवा महिलाओं को अपने पति की संपत्ति को हासिल करने और बेटे को गोद लेने में मदद की। इंदौर को एक छोटे-से गांव से समृद्ध और सजीव शहर बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कई मंदिरों का जीर्णोद्धार किया। उनका सबसे यादगार काम रहा, तकरीबन सभी बड़े मंदिरों और तीर्थस्थलों पर निर्माण। हिमालय से लेकर दक्षिण भारत के कोने-कोने तक उन्होंने इस पर खूब पैसा खर्च किया। काशी, गया, सोमनाथ, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, द्वारका, बद्रीनारायण, रामेश्वर और जगन्नाथ पुरी के ख्यात मंदिरों में उन्होंने खूब काम करवाए।

अहिल्याबाई होल्कर का चमत्कृत कर देने वाले और अलंकृत शासन 1795 में खत्म हुआ, जब उनका निधन हुआ।
उनकी महानता और सम्मान में भारत सरकार ने 25 अगस्त 1996 को उनकी याद में एक डाक टिकट जारी किया। इंदौर के नागरिकों ने 1996 में उनके नाम से एक पुरस्कार स्थापित किया। असाधारण कृतित्व के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है। इसके पहले सम्मानित शख्सियत नानाजी देशमुख थे।

अहिल्या बाई होल्कर के बारे में तथ्य और सूचनाएं

पूरा नाम अहिल्या बाई साहिबा होल्कर
जन्म 31 मई, 1725, ग्राम चौंडी, जामखेड़, अहमदनगर, महाराष्ट्र, भारत
धर्म हिंदू
उनके बारे में महारानी अहिल्या बाई होल्कर भारत में मालवा प्रांत की महारानी थी।
पति खांडेराव होल्कर
पिता मानकोजी शिंदे
घराना होल्कर घराना
राज्याभिषेक 11 दिसंबर 1767
शासन 1 दिसंबर 1767 से 13 अगस्त 1795 तक
पूर्वज मालेराव होल्कर
उत्तराधिकारी तुकोजीराव होल्कर प्रथम
ससुर मल्हार राव होल्कर
पति का निधन पति की मौत कुंभेर युद्ध के दौरान 1754 में हुई थी।

उपलब्धियां

अहिल्याबाई ने इंदौर को एक छोटे-से गांव से खूबसूरत शहर बनाया। मालवा में कई किले और सड़कें बनवाईं। उन्होंने कई घाट, मंदिर, तालाब, कुएं और विश्राम गृह बनवाए। न केवल दक्षिण भारत में बल्कि हिमालय पर भी। सोमनाथ, काशी, गया, अयोध्या, द्वारका, हरिद्वार, कांची, अवंती, बद्रीनारायण, रामेश्वर, मथुरा और जगन्नाथपुरी आदि।

मराठी में किताबें

पुण्यश्लोक अहिल्या एमएस दीक्षित
अहिल्याबाई – हीरालाल शर्मा
अहिल्याबाई चरित्र – पुरुषोत्तम
अहिल्याबाई चरित्र – मुकुंद वामन बर्वे
कर्मयोगिनी – विजया जहांगिरदार
ज्ञात-अज्ञात अहिल्याबाई होल्कर – विनया खडापेकर

लोकप्रिय संस्कृति में

देवी अहिल्या बाई फिल्म में मल्लिका प्रसाद ने अहिल्या बाई की भूमिका निभाई है।
महाराष्ट्र के ठाणे में एक बच्चों के बगीचे का नाम अहिल्या बाई के सम्मान में अहिल्यादेवी होल्कर उद्यान रखा गया है।

वृत्तचित्र
अहिल्या बाई पर एक 20 मिनट का एक वृत्तचित्र तैयार किया गया है। इसे एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर ने तैयार किया।

11 Replies to “अहिल्याबाई होल्कर, जीवनी”

  1. I like my devi ahilyabai holkar and my family like this ahilyabai पाल समाज की शान देवी अहिल्याबाई होल्कर ।।।।।।।।।।।।।।।।।।राजमाता आपकी जय हो ।।।।।।।।

  2. साहसी महिला वीर पराक्रमी दयावान चरित्रवान दीन गरीबों की मसीहा देवी मातेश्वरी अहिल्याबाई होल्कर

  3. Really, she was a fighter. Proud to b connected with her…Such a courageous woman she was. All, specially women should take lesson that how should fight in opposite circumstances.

  4. राष्ट्र के लिए प्रेरणा की मिसाल एवं ऊर्जा व साहस का अद्भुत स्रोत।

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