बिहार पर्यटन प्राचीन सभ्यता, धर्म, इतिहास और संस्कृति का अनूठा मेल है, जो भारत की पहचान है। यह राज्य भारत के कुछ महान साम्राज्यों जैसे मौर्य, गुप्त और पलस के उदय और उनके पतन का गवाह रहा है। 5वीं से 11वीं सदी के बीच यहां विश्व का प्रारंभिक विश्वविद्यालय विकसित हुआ। उसके अवशेष आज भी बिहार पर्यटन के आकर्षणों में से एक हैं। बौद्ध धर्म के कुछ पवित्र स्थल भी इसी राज्य में हैं। हिंदू धर्म, सिख धर्म और जैन धर्म के कुछ महत्वपूर्ण स्थान भी यहां हैं।
प्रेतशिला पर्वत
श्रेणी: प्रकृति
हिंदुओं में गया का बहुत महत्व है। यह उनके लिए एक धाम या कहें कि एक पवित्र तीर्थ यात्रा का स्थान है और यह एक ओर से प्रेतशिला पर्वत से घिरा हुआ है। गया में प्रेतशिला पर्वत के विपरीत दिशा में रामशिला पर्वत है।
गया का प्रेतशिला पर्वत बिहार के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। कहा जाता है कि एक गया नाम का राक्षस था, जो मौत से लोगों को होने वाले कष्ट देखकर बहुत व्यथित हुआ। उसने अपना यह दुख भगवान विष्णु को बताया। भगवान विष्णु यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए कि एक राक्षस के मन में भी इतनी करुणा है, और उसे यह वरदान दिया कि वह पापियों को क्षमा कर सकता है।
बिहार के गया का प्रेतशिला पर्वत पटना से दक्षिण में 100 किमी. दूर स्थित है। इस प्राचीन शहर का हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्व है।
गया का प्रेतशिला पर्वत फाल्गु नदी के पास स्थित है। इस नदी की यह विशेषता है कि इसका पानी उपर से दिखाई नहीं देता। इसका पानी कीचड़ और रेत की मोटी परत के नीचे रहता है। गया जाने वाले लोग गड्ढा खोदकर इसका पानी निकालते हैं।
गया स्थित प्रेतशिला पर्वत, बिहार के ऐसे क्षेत्र में है जो इसी तरह के स्थानों के लिए प्रसिद्ध है, जैसे शहर के केंद्र से तीन किमी दूर स्थित बोधि वृक्ष। यह वो जगह है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। गया कई पवित्र धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है जिनमें से एक विष्णुपद मंदिर है। इसके दक्षिण में बोध गया है।
अहिरोली
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार के बक्सर शहर के केंद्र से 5 किमी दूर स्थित एक छोटा सा गांव अहिरोली है। यहां देवी अहिल्या का एक मंदिर है।
पौराणिक कथा के अनुसार देवी अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं। रामायण के अनुसार देवी अहिल्या ने गलती से एक बार अपने पति का भेष धरकर आए एक व्यक्ति को अपना पति समझ लिया। इससे गौतम ऋषि बहुत क्रोधित हुए और देवी अहिल्या को मानव से पत्थर बना दिया। बक्सर के अहिरोली गांव का यह मंदिर लोगों को देवी अहिल्या के निरअपराध होने की याद दिलाता है। कई सालों बाद उस क्षेत्र से गुजरते हुए भगवान राम ने देवी अहिल्या को देखा और उसे मुक्त किया। भगवान राम के छूते ही पत्थर बनी देवी अहिल्या वापस मानव बन गई।
बक्सर का यह अहिरोली गांव लोगों के लिए एक तीर्थ स्थल है। लोग यहां दूर दूर से अपने जाने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति पाने आते हंै।
बक्सर और अहिरोली के आस पास रहने वाले लोगों का यह विश्वास है कि भगवान उन्हें हर बुराई और जीवन की कठिनाई से बचाने के लिए उनके साथ हैं।
बिहार के अहिरोली जाने पर यहां के लोगों का रामायण और भगवान राम पर अटूट विश्वास और श्रद्धा साफ दिखती है। यह आश्चर्यजनक लगता है कि कई सौ साल बीतने के बाद भी भगवान राम के प्रति लोगों में इतना लगाव है।
हसनपुरा
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार का हसनपुरा गांव, धनाई नदी के किनारे सिवान से दक्षिण में 21 किमी दूर स्थित है। यह जगह अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी कुछ कम नहीं है। अरब के किसी दूर देश से एक संत मखदूम सैयद हसन चिश्ती भारत आए थे। वह भारत के लोगों और संस्कृति से इतना प्रभावित हुए कि अपने देश वापस ना जाने का फैसला कर लिया। उन्होंने ही हसनपुरा गांव की स्थापना की।
मखदूम सैयद हसन चिश्ती यहां लंबे समय तक रहे। उनका रुझान धर्म और आत्मा की पवित्रता की ओर था। वह बिहार के हसनपुर में धार्मिक संस्था खानकाह के संस्थापक थे।
हसनपुर में हजारों की संख्या में एक बड़ी मस्जिद के अवशेष और इस महान संत की मजार मौजूद है। वहां जाने पर यह सब स्थान उस गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हैं। ये हसनपुर के लोगों की जीवनशैली और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रतिबिंबित करते हैं। इस जगह की एक विशेषता यह भी है कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग आते हैं। इससे हसनपुर में धार्मिक सद्भाव भी साफ झलकता है। हसनपुर में एक कब्र भी है जो दरअसल गांव के दक्षिण में स्थित एक खुले परिसर की तरह है।
चंपारण
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
चंपारण बिहार का एक प्रसिद्ध स्थान है जिसका भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बहुत महत्व है। यह वह स्थान है जहां महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन की संरचना का पहला प्रयास किया था।
यह जगह प्रसिद्ध चंपारण आंदोलन के लिए जानी जाती है जो बिहार और देश के अन्य हिस्से में नील खेती करने वाले किसानों पर होने वाले अत्याचार के विरोध में शुरु हुआ था। इस आंदोलन का प्रभाव काफी लंबे समय तक रहा था।
चंपारण के अच्छे दिन लाने के लिए महात्मा गांधी अपने प्रयासों में दृढ़ थे। आखिरकार ब्रिटिश सरकार को जांच कमेटी बनानी पड़ी। कमेटी को चंपारण के किसानों की स्थिति की जांच करने और रिपोर्ट देने की जिम्मदारी दी गई।
रामचुरा
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
रामचुरा बिहार के वैशाली खंड में स्थित है। रामायण में वर्णित भारत के इलाकों में यह प्रमुख स्थलों में से एक है। बिहार और आसपास के इलाकों में यह जगह सिर्फ तीर्थयात्रा के लिए ही नहीं बल्कि त्यौहारों के लिए भी प्रसिद्ध है।
कहा जाता है कि एक बार भगवान राम जनकपुर की यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान थकान होने पर वह यहां विश्राम के लिए रुक गए। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम ने यहां स्नान भी किया था। भगवान राम के भक्तों के लिए रामचुरा बहुत धार्मिक महत्व रखता है।
रामचुरा में एक पत्थर पर भगवान राम के पैरों के निशान भी देखे जा सकते हैं। लोग बड़े धार्मिक विश्वास के साथ इनकी पूजा करते हैं। उनका मानना है कि इससे उनके जीवन मंे खुशहाली और समृद्धि आएगी।
रामचुरा अपने मेले और त्यौहारों के लिए प्रसिद्ध है, खासतौर पर रामनवमीं के अवसर पर होने वाले। यह शुभ अवसर यहां बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु धरती पर सभी दुखों का अंत करने आए थे।
रामचुरा के त्यौहार पर्यटकों को बहुत प्रसन्न करते हैं। इन दिनों में रामचुरा, रंगों और उत्सव की जगमगाहट से भर जाता है। लोग भगवान की पूजा और प्रार्थना करते हैं। फल या मिठाई खाकर व्रत खोला जाता है। यह समय ऐसा होता है जब रामचुरा घूमने जरुर जाना चाहिये।
मनेर शरीफ
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार का मनेर शरीफ ऐतिहासिक अतीत के अवशेषों से भरा है। यह दानापुर के उत्तर दक्षिण में स्थित है। यह गांव पटना से 32 किमी पश्चिम में है।
प्राचीन समय में मनेर शरीफ इस क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख का केन्द्र था। प्रसिद्ध वैयाकरण पाणिनी और वररुची मनेर शरीफ के ही निवासी थे और यहीं उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की।
मनेर शरीफ में दो बहुत प्रसिद्ध मुस्लिम मकबरे हैं। एक शाह दौलत या मखदूम दौलत का, जिसे छोटी दरगाह भी कहते हैं। दूसरा मकबरा शेख याहिया मनेरी या मखदूम याहिया का है, जिसे बड़ी दरगाह कहते हैं।
मखदमू दौलत ने सन् 1608 में मनेर शरीफ में अंतिम सांस ली थी। सन् 1616 में उनके शिष्य और बिहार के राज्यपाल इब्राहिम खान ने उनके मकबरे का निर्माण पूरा करवाया। मनेर शरीफ की यह एक अद्भुत इमारत है। इस इमारत की दीवारों पर बड़ी ही जटिल डिजाइन की गई है। उपर एक बड़ा सा गुंबद है, जिसकी छत पर पवित्र कुरान के शिलालेख हैं।
मनेर शरीफ में आपको जहांगीर के समय की वास्तुकला की विशेषताएं भी मिलेंगीं। पूर्वी भारत में मुगल काल के स्मारकों में से सबसे श्रेष्ठ स्मारक मनेर शरीफ में है। मनेर शरीफ के परिसर में आपको इब्राहिम खान द्वारा सन् 1619 में बनवाई मस्जिद भी मिलेगी।
राजगीर
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
नालंदा से 15 किमी. दूर स्थित राजगीर, मंदिरों और मठों से भरी जगह है। यह एक घाटी में बसी जगह है और इसके आसपास के स्थान बहुत सुंदर हैं। आसपास के जंगल राजगीर की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
पाटलीपुत्र के गठन से पहले राजगीर मगध महाजनपद की राजधानी था। यह क्षेत्र भगवान बु़द्ध और बौद्ध धर्म से लंबे समय तक संबंधित रहा है। बुद्ध ने अपने जीवन का लंबा समय यहां बिताया।
राजगीर जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। राजगीर में भगवान महावीर ने भी लंबा समय बिताया। यह जैन धर्म का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है।
राजगीर में बुद्ध के सबक दर्ज किये गए। इस शहर ने पहली बौद्ध परिषद के रुप में भी कार्य किया। आज के समय में राजगीर बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख धर्म स्थल है।
धर्म का केन्द्र होने के अलावा राजगीर एक लोकप्रिय स्वास्थ्य रिसोर्ट भी है। राजगीर के गर्म पानी के तालाबों में त्वचा संबंधी बीमारियां ठीक करने के गुण भी हैं।
वाल्मीकि नगर
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
वाल्मीकि नगर बिहार के पश्चिमी चंपारण का एक छोटा सा गांव है। यह भारत नेपाल सीमा पर स्थित है। यह गांव बगहा से 42 किमी. दूर है।
वाल्मीकि नगर में रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर वाल्मीकि आश्रम स्थित है। वाल्मीकि का नाम पहले रत्नाकर था, जो लोगों से सामान छीनकर अपना जीवन यापन करते थे। बाद में उन्हें पछतावा हुआ और उन्होंने प्रायश्चित करने का फैसला किया। इसके पश्चात उन्हें भगवान के जीवन को संकलित करने का आशीर्वाद मिला।
वाल्मीकि नगर में मकर संक्रांति के समय में यहां हर साल त्यौहार आयोजित किया जाता है।
गंदक नदी वाल्मीकि नगर की सुंदरता में चार चांद लगाती है। सिंचाई तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने गंदक नदी पर एक बैराज भी बनाया है।
पावापुरी
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
जैन धर्म के लोगों के लिए पावापुरी एक पवित्र स्थान है। यह राजगीर से 38 किमी. और पटना से 101 किमी. दूर है। इस जगह पर अंतिम तीर्थांकर और जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर ने अंतिम सांस ली। पावापुरी में 500 बी सी में भगवान महावीर का अंतिम संस्कार हुआ था।
उनके अंतिम संस्कार में चिता की राख इकट्ठा करने के लिए इतनी भीड जुटी की वहां एक तालाब बन गया। तब इस तालाब के बीच में संगमरमर का जलमंदिर बनाया गया। पावापुरी और उसके आसपास के लोगों के लिए यह एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहां समोशरण नाम का जैन मंदिर भी है।
पावापुरी घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। पावापुरी जाने पर घूमने लायक जगहें हैं
पावापुरी से अन्य देखने लायक जगहों की योजना बनाई जा सकती हैः
लोग दूर दूर से पावापुरी में यह देखने आते हैं।
पावापुरी पहुंचने के साधन इस प्रकार हैं:
तार रामायण
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
भोजपुर के तार में भगवान विष्णु के अवतार और रामायण के नायक भगवान राम बहुत लोकप्रिय हैं। यह स्थान पीरो से उत्तर पश्चिम में 10 किमी. की दूरी पर स्थित है।
भोजपुर के तार गांव का नाम राक्षसी ताड़का के नाम पर रखा गया था। रामायण में ताड़का को बहुत निर्दयी चरित्र के तौर पर बताया गया जो साधारण लोगों को हानि पहुंचाती थी।
कहा जाता है कि ताड़का तार क्षेत्र को अपनी कुश्तियों के लिए उपयोग करती थी। वह इतनी ताकतवर थी कि कोई उसे हराने की सोच भी नहीं सकता था। संतांे द्वारा किये जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को वह बाधित करती थी।
सब लोग ताड़का से डरते थे। ताड़का से बचने के लिए सबने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान राम ने ताड़का से युद्ध किया और वह उनकी शक्तियों के आगे टिक नहीं पाई। भगवान राम के हाथों ताड़का का वध हुआ।
भोजपुर का तार गांव लोगों को भगवान राम की याद दिलाता है, जिन्होंने हजारों लोगों की जान बचाई। यहां के निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि भगवान उन्हें हर बुराई और जीवन की कठिनाई से बचाने के लिए उनके साथ हैं। रामायण और भगवान राम के प्रति लोगों का यह विश्वास तार गांव को भारत में प्रसिद्ध बनाता है।
बिहार की यात्रा
बिहार की यात्रा और उसके पर्यटन में राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले कई पर्यटन स्थल शामिल हैं। भारत के उत्तरी भाग में पूर्वी गंगा मैदानों के साथ यह स्थित है। बौद्ध और जैन धर्म का उद्गम स्थल होने के कारण भारत के सांस्कृतिक इतिहास में बिहार का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आकर सैलानियों को मुगल और हिंदू वास्तुकला के कुछ शानदार नमूने देखने को मिल सकते हैं।
बिहार में एक संपन्न प्राचीन सभ्यता का पोषण हुआ है और भारत के कुछ प्रमुख धर्मों, जैसे बौद्ध और जैन धर्म का जन्म यहीं हुआ और साथ ही हिंदू धर्म का यहां प्रसार हुआ।
इस राज्य का नाम ‘विहार’ शब्द से आया है। इसका अर्थ बौद्ध मठ होता है क्योंकि यह स्थान बौद्ध धर्म का प्रमुख अध्ययन केंद्र था।
बिहार का इतिहास छह शताब्दी ईसा पूर्व तक जाता है। यहीं पर वैशाली में भगवान महावीर का जन्म हुआ था और भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ‘आत्मज्ञान’ मिला था। इस क्षेत्र ने कई साम्राज्यों का उदय और पतन देखा है जैसे - गुप्त, पलस और उसके बाद मुस्लिम शासन।
पवित्र गंगा नदी पूरे राज्य से दो हिस्सों में बहती है। इस वजह से राज्य की धरती बहुत उपजाउ है। बिहार भूमिगत खनिजों के मामले में बहुत समृद्ध है और यह राष्ट्रीय आय में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है।
बिहार को एक तीर्थस्थल के तौर पर भी जाना जाता है। राज्य में कई बौद्ध स्थल हैं जो तीर्थस्थलों की एक लंबी कतार बनाते हैं और बिहार की यात्रा करने वाला प्राचीन खंडहरों और पुरानी धार्मिक लिपियों के आकर्षण में खो जाता है। बड़ी संख्या में लोग बिहार की यात्रा करते हैं क्योंकि यह जैन और हिंदू धर्मों का पवित्र स्थल है।
यात्रा करने का सबसे अच्छा समय
बिहार की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है जब यहां मौसम सुहावना रहता है।
बिहार कैसे पहुंचें
भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित बिहार के चारों ओर धरती है जिससे बिहार से किसी भी राज्य में आना जाना सुविधाजनक है। बिहार भारत के बाकी हिस्सों से रेल, हवाई और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
बिहार कैसे पहुंचें आपको इस राज्य में पहुंचने में मदद करेगा।
हवाई मार्ग से
बिहार की राजधानी पटना में एक हवाई अड्डा है जिससे यह दिल्ली, मुंबई, लखनउ और कोलकाता जैसे शहरों से जुड़ा है। नेपाल की राजधानी काठमांडू से भी पटना के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।
भारत की प्रमुख एयरलाइंस, जैसे इंडियन एयरलाइन, स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, इंडिगो एयरलाइंस और अन्य पटना से नियमित उड़ानें संचालित करती हैं।
रेल से
राज्य में कई छोटी और बड़ी जगहें हैं जहां भारतीय रेल का नेटवर्क है। राज्य में सुपरफास्ट ट्रेनें, जैसे राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस की सेवाएं भी हैं।
सड़क मार्ग से
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक नेटवर्क है और राष्ट्रीय राजमार्ग नंबरः 2, 23, 28, 30, 31 और 33 के अलावा राज्य राजमार्ग पूरे राज्य में फैले हैं। यह राज्य को भारत के महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ते हैं। राज्य का आंतरिक नेटवर्क पटना को वैशाली से, नालंदा से, बोध गया से और अन्य पर्यटन स्थलों से जोड़ता है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम यात्रियों की यात्रा संबंधी जरुरतों को पूरा करता है।
बिहार में खरीददारी
शाॅपिंग प्रेमियों के लिए बिहार में खरीददारी एक शानदार अनुभव हो सकता है बशर्ते आपको पता हो कि क्या और कहां से कैसे खरीदना है।
बिहार में हस्तशिल्प
चित्रकारी की मधुबनी शैली बिहार की समृद्ध परंपरा है। बिहार अपने हस्तशिल्पों के लिए बहुत मशहूर है। पीढ़ी दर पीढ़ी बिहारी औरतें चित्रकारी की लोक कला को आगे बढ़ाती हैं। इनमें अक्सर पौराणिक कहानियां, स्थानीय देवताओं के चित्र और हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाए जाते हैं।
बिहार में खरीददारी के लिए लोकप्रिय सामान
बिहार में खरीददारी करते हुए आप यह व्यापक किस्में देख सकते हैंः
बिहार में देखने के लिए
बिहार में देखने योग्य स्थान
प्रेतशिला पर्वत
श्रेणी: प्रकृति
हिंदुओं में गया का बहुत महत्व है। यह उनके लिए एक धाम या कहें कि एक पवित्र तीर्थ यात्रा का स्थान है और यह एक ओर से प्रेतशिला पर्वत से घिरा हुआ है। गया में प्रेतशिला पर्वत के विपरीत दिशा में रामशिला पर्वत है।
गया का प्रेतशिला पर्वत बिहार के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। कहा जाता है कि एक गया नाम का राक्षस था, जो मौत से लोगों को होने वाले कष्ट देखकर बहुत व्यथित हुआ। उसने अपना यह दुख भगवान विष्णु को बताया। भगवान विष्णु यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए कि एक राक्षस के मन में भी इतनी करुणा है, और उसे यह वरदान दिया कि वह पापियों को क्षमा कर सकता है।
बिहार के गया का प्रेतशिला पर्वत पटना से दक्षिण में 100 किमी. दूर स्थित है। इस प्राचीन शहर का हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्व है।
गया का प्रेतशिला पर्वत फाल्गु नदी के पास स्थित है। इस नदी की यह विशेषता है कि इसका पानी उपर से दिखाई नहीं देता। इसका पानी कीचड़ और रेत की मोटी परत के नीचे रहता है। गया जाने वाले लोग गड्ढा खोदकर इसका पानी निकालते हैं।
गया स्थित प्रेतशिला पर्वत, बिहार के ऐसे क्षेत्र में है जो इसी तरह के स्थानों के लिए प्रसिद्ध है, जैसे शहर के केंद्र से तीन किमी दूर स्थित बोधि वृक्ष। यह वो जगह है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। गया कई पवित्र धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है जिनमें से एक विष्णुपद मंदिर है। इसके दक्षिण में बोध गया है।
अहिरोली
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार के बक्सर शहर के केंद्र से 5 किमी दूर स्थित एक छोटा सा गांव अहिरोली है। यहां देवी अहिल्या का एक मंदिर है।
पौराणिक कथा के अनुसार देवी अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं। रामायण के अनुसार देवी अहिल्या ने गलती से एक बार अपने पति का भेष धरकर आए एक व्यक्ति को अपना पति समझ लिया। इससे गौतम ऋषि बहुत क्रोधित हुए और देवी अहिल्या को मानव से पत्थर बना दिया। बक्सर के अहिरोली गांव का यह मंदिर लोगों को देवी अहिल्या के निरअपराध होने की याद दिलाता है। कई सालों बाद उस क्षेत्र से गुजरते हुए भगवान राम ने देवी अहिल्या को देखा और उसे मुक्त किया। भगवान राम के छूते ही पत्थर बनी देवी अहिल्या वापस मानव बन गई।
बक्सर का यह अहिरोली गांव लोगों के लिए एक तीर्थ स्थल है। लोग यहां दूर दूर से अपने जाने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति पाने आते हंै।
बक्सर और अहिरोली के आस पास रहने वाले लोगों का यह विश्वास है कि भगवान उन्हें हर बुराई और जीवन की कठिनाई से बचाने के लिए उनके साथ हैं।
बिहार के अहिरोली जाने पर यहां के लोगों का रामायण और भगवान राम पर अटूट विश्वास और श्रद्धा साफ दिखती है। यह आश्चर्यजनक लगता है कि कई सौ साल बीतने के बाद भी भगवान राम के प्रति लोगों में इतना लगाव है।
हसनपुरा
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार का हसनपुरा गांव, धनाई नदी के किनारे सिवान से दक्षिण में 21 किमी दूर स्थित है। यह जगह अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी कुछ कम नहीं है। अरब के किसी दूर देश से एक संत मखदूम सैयद हसन चिश्ती भारत आए थे। वह भारत के लोगों और संस्कृति से इतना प्रभावित हुए कि अपने देश वापस ना जाने का फैसला कर लिया। उन्होंने ही हसनपुरा गांव की स्थापना की।
मखदूम सैयद हसन चिश्ती यहां लंबे समय तक रहे। उनका रुझान धर्म और आत्मा की पवित्रता की ओर था। वह बिहार के हसनपुर में धार्मिक संस्था खानकाह के संस्थापक थे।
हसनपुर में हजारों की संख्या में एक बड़ी मस्जिद के अवशेष और इस महान संत की मजार मौजूद है। वहां जाने पर यह सब स्थान उस गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हैं। ये हसनपुर के लोगों की जीवनशैली और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रतिबिंबित करते हैं। इस जगह की एक विशेषता यह भी है कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग आते हैं। इससे हसनपुर में धार्मिक सद्भाव भी साफ झलकता है। हसनपुर में एक कब्र भी है जो दरअसल गांव के दक्षिण में स्थित एक खुले परिसर की तरह है।
चंपारण
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
चंपारण बिहार का एक प्रसिद्ध स्थान है जिसका भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बहुत महत्व है। यह वह स्थान है जहां महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन की संरचना का पहला प्रयास किया था।
यह जगह प्रसिद्ध चंपारण आंदोलन के लिए जानी जाती है जो बिहार और देश के अन्य हिस्से में नील खेती करने वाले किसानों पर होने वाले अत्याचार के विरोध में शुरु हुआ था। इस आंदोलन का प्रभाव काफी लंबे समय तक रहा था।
चंपारण के अच्छे दिन लाने के लिए महात्मा गांधी अपने प्रयासों में दृढ़ थे। आखिरकार ब्रिटिश सरकार को जांच कमेटी बनानी पड़ी। कमेटी को चंपारण के किसानों की स्थिति की जांच करने और रिपोर्ट देने की जिम्मदारी दी गई।
रामचुरा
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
रामचुरा बिहार के वैशाली खंड में स्थित है। रामायण में वर्णित भारत के इलाकों में यह प्रमुख स्थलों में से एक है। बिहार और आसपास के इलाकों में यह जगह सिर्फ तीर्थयात्रा के लिए ही नहीं बल्कि त्यौहारों के लिए भी प्रसिद्ध है।
कहा जाता है कि एक बार भगवान राम जनकपुर की यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान थकान होने पर वह यहां विश्राम के लिए रुक गए। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम ने यहां स्नान भी किया था। भगवान राम के भक्तों के लिए रामचुरा बहुत धार्मिक महत्व रखता है।
रामचुरा में एक पत्थर पर भगवान राम के पैरों के निशान भी देखे जा सकते हैं। लोग बड़े धार्मिक विश्वास के साथ इनकी पूजा करते हैं। उनका मानना है कि इससे उनके जीवन मंे खुशहाली और समृद्धि आएगी।
रामचुरा अपने मेले और त्यौहारों के लिए प्रसिद्ध है, खासतौर पर रामनवमीं के अवसर पर होने वाले। यह शुभ अवसर यहां बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु धरती पर सभी दुखों का अंत करने आए थे।
रामचुरा के त्यौहार पर्यटकों को बहुत प्रसन्न करते हैं। इन दिनों में रामचुरा, रंगों और उत्सव की जगमगाहट से भर जाता है। लोग भगवान की पूजा और प्रार्थना करते हैं। फल या मिठाई खाकर व्रत खोला जाता है। यह समय ऐसा होता है जब रामचुरा घूमने जरुर जाना चाहिये।
मनेर शरीफ
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
बिहार का मनेर शरीफ ऐतिहासिक अतीत के अवशेषों से भरा है। यह दानापुर के उत्तर दक्षिण में स्थित है। यह गांव पटना से 32 किमी पश्चिम में है।
प्राचीन समय में मनेर शरीफ इस क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख का केन्द्र था। प्रसिद्ध वैयाकरण पाणिनी और वररुची मनेर शरीफ के ही निवासी थे और यहीं उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की।
मनेर शरीफ में दो बहुत प्रसिद्ध मुस्लिम मकबरे हैं। एक शाह दौलत या मखदूम दौलत का, जिसे छोटी दरगाह भी कहते हैं। दूसरा मकबरा शेख याहिया मनेरी या मखदूम याहिया का है, जिसे बड़ी दरगाह कहते हैं।
मखदमू दौलत ने सन् 1608 में मनेर शरीफ में अंतिम सांस ली थी। सन् 1616 में उनके शिष्य और बिहार के राज्यपाल इब्राहिम खान ने उनके मकबरे का निर्माण पूरा करवाया। मनेर शरीफ की यह एक अद्भुत इमारत है। इस इमारत की दीवारों पर बड़ी ही जटिल डिजाइन की गई है। उपर एक बड़ा सा गुंबद है, जिसकी छत पर पवित्र कुरान के शिलालेख हैं।
मनेर शरीफ में आपको जहांगीर के समय की वास्तुकला की विशेषताएं भी मिलेंगीं। पूर्वी भारत में मुगल काल के स्मारकों में से सबसे श्रेष्ठ स्मारक मनेर शरीफ में है। मनेर शरीफ के परिसर में आपको इब्राहिम खान द्वारा सन् 1619 में बनवाई मस्जिद भी मिलेगी।
राजगीर
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
नालंदा से 15 किमी. दूर स्थित राजगीर, मंदिरों और मठों से भरी जगह है। यह एक घाटी में बसी जगह है और इसके आसपास के स्थान बहुत सुंदर हैं। आसपास के जंगल राजगीर की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
पाटलीपुत्र के गठन से पहले राजगीर मगध महाजनपद की राजधानी था। यह क्षेत्र भगवान बु़द्ध और बौद्ध धर्म से लंबे समय तक संबंधित रहा है। बुद्ध ने अपने जीवन का लंबा समय यहां बिताया।
राजगीर जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। राजगीर में भगवान महावीर ने भी लंबा समय बिताया। यह जैन धर्म का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है।
राजगीर में बुद्ध के सबक दर्ज किये गए। इस शहर ने पहली बौद्ध परिषद के रुप में भी कार्य किया। आज के समय में राजगीर बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख धर्म स्थल है।
धर्म का केन्द्र होने के अलावा राजगीर एक लोकप्रिय स्वास्थ्य रिसोर्ट भी है। राजगीर के गर्म पानी के तालाबों में त्वचा संबंधी बीमारियां ठीक करने के गुण भी हैं।
वाल्मीकि नगर
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
वाल्मीकि नगर बिहार के पश्चिमी चंपारण का एक छोटा सा गांव है। यह भारत नेपाल सीमा पर स्थित है। यह गांव बगहा से 42 किमी. दूर है।
वाल्मीकि नगर में रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर वाल्मीकि आश्रम स्थित है। वाल्मीकि का नाम पहले रत्नाकर था, जो लोगों से सामान छीनकर अपना जीवन यापन करते थे। बाद में उन्हें पछतावा हुआ और उन्होंने प्रायश्चित करने का फैसला किया। इसके पश्चात उन्हें भगवान के जीवन को संकलित करने का आशीर्वाद मिला।
वाल्मीकि नगर में मकर संक्रांति के समय में यहां हर साल त्यौहार आयोजित किया जाता है।
गंदक नदी वाल्मीकि नगर की सुंदरता में चार चांद लगाती है। सिंचाई तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने गंदक नदी पर एक बैराज भी बनाया है।
पावापुरी
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
जैन धर्म के लोगों के लिए पावापुरी एक पवित्र स्थान है। यह राजगीर से 38 किमी. और पटना से 101 किमी. दूर है। इस जगह पर अंतिम तीर्थांकर और जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर ने अंतिम सांस ली। पावापुरी में 500 बी सी में भगवान महावीर का अंतिम संस्कार हुआ था।
उनके अंतिम संस्कार में चिता की राख इकट्ठा करने के लिए इतनी भीड जुटी की वहां एक तालाब बन गया। तब इस तालाब के बीच में संगमरमर का जलमंदिर बनाया गया। पावापुरी और उसके आसपास के लोगों के लिए यह एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहां समोशरण नाम का जैन मंदिर भी है।
पावापुरी घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। पावापुरी जाने पर घूमने लायक जगहें हैं
- जलमंदिर
- समोशरण
पावापुरी से अन्य देखने लायक जगहों की योजना बनाई जा सकती हैः
- राजगीर
- गया
- बोधगया
लोग दूर दूर से पावापुरी में यह देखने आते हैं।
- राजगीर नृत्य समारोह
- छठ पूजा
- कला और शिल्प
पावापुरी पहुंचने के साधन इस प्रकार हैं:
- हवाई: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना का है जो 101 किमी. दूर है। पटना से इंडियन एयरलाइंस की उड़ान कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, रांची और लखनउ जाती है।
- रेल: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन राजगीर है लेकिन प्रमुख रेलवे स्टेशन पटना है।
- सड़क: पटना, गया और राजगीर आदि से बस और टैक्सी से भी पहुंचा जा सकता है।
तार रामायण
श्रेणी: इतिहास और संस्कृति
भोजपुर के तार में भगवान विष्णु के अवतार और रामायण के नायक भगवान राम बहुत लोकप्रिय हैं। यह स्थान पीरो से उत्तर पश्चिम में 10 किमी. की दूरी पर स्थित है।
भोजपुर के तार गांव का नाम राक्षसी ताड़का के नाम पर रखा गया था। रामायण में ताड़का को बहुत निर्दयी चरित्र के तौर पर बताया गया जो साधारण लोगों को हानि पहुंचाती थी।
कहा जाता है कि ताड़का तार क्षेत्र को अपनी कुश्तियों के लिए उपयोग करती थी। वह इतनी ताकतवर थी कि कोई उसे हराने की सोच भी नहीं सकता था। संतांे द्वारा किये जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को वह बाधित करती थी।
सब लोग ताड़का से डरते थे। ताड़का से बचने के लिए सबने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान राम ने ताड़का से युद्ध किया और वह उनकी शक्तियों के आगे टिक नहीं पाई। भगवान राम के हाथों ताड़का का वध हुआ।
भोजपुर का तार गांव लोगों को भगवान राम की याद दिलाता है, जिन्होंने हजारों लोगों की जान बचाई। यहां के निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि भगवान उन्हें हर बुराई और जीवन की कठिनाई से बचाने के लिए उनके साथ हैं। रामायण और भगवान राम के प्रति लोगों का यह विश्वास तार गांव को भारत में प्रसिद्ध बनाता है।
बिहार की यात्रा
बिहार की यात्रा और उसके पर्यटन में राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले कई पर्यटन स्थल शामिल हैं। भारत के उत्तरी भाग में पूर्वी गंगा मैदानों के साथ यह स्थित है। बौद्ध और जैन धर्म का उद्गम स्थल होने के कारण भारत के सांस्कृतिक इतिहास में बिहार का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां आकर सैलानियों को मुगल और हिंदू वास्तुकला के कुछ शानदार नमूने देखने को मिल सकते हैं।
बिहार में एक संपन्न प्राचीन सभ्यता का पोषण हुआ है और भारत के कुछ प्रमुख धर्मों, जैसे बौद्ध और जैन धर्म का जन्म यहीं हुआ और साथ ही हिंदू धर्म का यहां प्रसार हुआ।
इस राज्य का नाम ‘विहार’ शब्द से आया है। इसका अर्थ बौद्ध मठ होता है क्योंकि यह स्थान बौद्ध धर्म का प्रमुख अध्ययन केंद्र था।
बिहार का इतिहास छह शताब्दी ईसा पूर्व तक जाता है। यहीं पर वैशाली में भगवान महावीर का जन्म हुआ था और भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ‘आत्मज्ञान’ मिला था। इस क्षेत्र ने कई साम्राज्यों का उदय और पतन देखा है जैसे - गुप्त, पलस और उसके बाद मुस्लिम शासन।
पवित्र गंगा नदी पूरे राज्य से दो हिस्सों में बहती है। इस वजह से राज्य की धरती बहुत उपजाउ है। बिहार भूमिगत खनिजों के मामले में बहुत समृद्ध है और यह राष्ट्रीय आय में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है।
बिहार को एक तीर्थस्थल के तौर पर भी जाना जाता है। राज्य में कई बौद्ध स्थल हैं जो तीर्थस्थलों की एक लंबी कतार बनाते हैं और बिहार की यात्रा करने वाला प्राचीन खंडहरों और पुरानी धार्मिक लिपियों के आकर्षण में खो जाता है। बड़ी संख्या में लोग बिहार की यात्रा करते हैं क्योंकि यह जैन और हिंदू धर्मों का पवित्र स्थल है।
बिहार जनसांख्यिकी | |
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भौगोलिक स्थितिः | भारत का पूर्वी भाग, इसके उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में उड़ीसा और पश्चिम में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश |
लैटीट््यूडः | 21 डिग्री 58’ और 27 डिग्री 31’ उत्तर |
लाॅन्जीट््यूडः | 82 डिग्री 19’ और 88 डिग्री 17’ पूर्व |
इलाकाः | 94,164 वर्ग किलोमीटर |
जलवायुः | गर्मियों में गर्म और सर्दियों में ठंडा |
अधिकतम तापमानः | 40-45 डिग्री सेल्सियस |
न्यूनतम तापमानः | 5-10 डिग्री सेल्सियस |
सालाना औसत बरसातः | 1205 मिलीमीटर |
राजधानीः | पटना |
आबादीः | 82878796 |
भाषाएंः | हिंदी, अंगिका, भोजपुरी, मगही, मैथली |
धर्मः | हिंदू, इस्लाम और अन्य |
यात्रा करने का अच्छा समयः | अक्टूबर से मार्च |
पहनावाः | गर्मियों में - हल्के सूती, सर्दियों में - भारी ऊनी |
बिहार की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है जब यहां मौसम सुहावना रहता है।
बिहार कैसे पहुंचें
भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित बिहार के चारों ओर धरती है जिससे बिहार से किसी भी राज्य में आना जाना सुविधाजनक है। बिहार भारत के बाकी हिस्सों से रेल, हवाई और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
बिहार कैसे पहुंचें आपको इस राज्य में पहुंचने में मदद करेगा।
हवाई मार्ग से
बिहार की राजधानी पटना में एक हवाई अड्डा है जिससे यह दिल्ली, मुंबई, लखनउ और कोलकाता जैसे शहरों से जुड़ा है। नेपाल की राजधानी काठमांडू से भी पटना के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।
भारत की प्रमुख एयरलाइंस, जैसे इंडियन एयरलाइन, स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, इंडिगो एयरलाइंस और अन्य पटना से नियमित उड़ानें संचालित करती हैं।
रेल से
राज्य में कई छोटी और बड़ी जगहें हैं जहां भारतीय रेल का नेटवर्क है। राज्य में सुपरफास्ट ट्रेनें, जैसे राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस की सेवाएं भी हैं।
सड़क मार्ग से
राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक नेटवर्क है और राष्ट्रीय राजमार्ग नंबरः 2, 23, 28, 30, 31 और 33 के अलावा राज्य राजमार्ग पूरे राज्य में फैले हैं। यह राज्य को भारत के महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ते हैं। राज्य का आंतरिक नेटवर्क पटना को वैशाली से, नालंदा से, बोध गया से और अन्य पर्यटन स्थलों से जोड़ता है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम यात्रियों की यात्रा संबंधी जरुरतों को पूरा करता है।
बिहार में खरीददारी
शाॅपिंग प्रेमियों के लिए बिहार में खरीददारी एक शानदार अनुभव हो सकता है बशर्ते आपको पता हो कि क्या और कहां से कैसे खरीदना है।
बिहार में हस्तशिल्प
चित्रकारी की मधुबनी शैली बिहार की समृद्ध परंपरा है। बिहार अपने हस्तशिल्पों के लिए बहुत मशहूर है। पीढ़ी दर पीढ़ी बिहारी औरतें चित्रकारी की लोक कला को आगे बढ़ाती हैं। इनमें अक्सर पौराणिक कहानियां, स्थानीय देवताओं के चित्र और हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाए जाते हैं।
बिहार में खरीददारी के लिए लोकप्रिय सामान
बिहार में खरीददारी करते हुए आप यह व्यापक किस्में देख सकते हैंः
- स्टोन और बीड के गहने
- हाथ से चित्रित वाॅल पेंटिंग
- पेपर और पत्तों के लघुचित्र
- कपड़ों पर पिपली का काम
- स्टोन के बर्तन
- बांस और बेंत के सामान
- लकड़ी के स्टूल
- चमड़े का सामान
- तिलकूट मिठाई
बिहार में देखने के लिए
- प्रेस्टशिला हिल्स
- अहिरोली
- हसनपुरा
- चंपारण
- रामचुरा
- मनेर शरीफ
- राजगीर
- वाल्मिकी नगर
- पावापुरी
- तार रामायण