भरतपुर जिले में स्थित लोहागढ़ किला आयरन फोर्ट के नाम से भी लोकप्रिय है और इसका निर्माण 18वीं सदी में हुआ था। लोहागढ़ किले का इतिहास बहुत ही शाही रहा है। इस विशालकाय किले का निर्माण महाराजा सूरज मल ने करवाया था। लोहागढ़ किले को ब्रिटिशों के हमले झेलने के लिए जाना जाता है। लोहागढ़ किला बहुत ही शांत और सुंदर वातावरण के बीच स्थित है। यह काफी हरी भरी वनस्पतियों और मानव निर्मित द्वीपों से घिरा है। इस किले में तीन खूबसूरत महल हैं, जो किशोरी महल, कोठी खास और महल खास हैं। यह महल उस समय के भरतपुर के राजाओं की भव्यता और संपन्नता दिखाते हैं। इस किले का निर्माण करवाने वाले महाराजा सूरज मल ने इसके परिसर में दो टाॅवरों का निर्माण करवाया था। इन टाॅवरों का नाम फतेह बुर्ज और जवाहर बुर्ज है। इन बुर्जों को ब्रिटिशों के आक्रमण पर विजय पाने के प्रतीक के तौर पर बनाया गया था।
यह किला पानी की एक गहरी निकाय से घिरा है जो इसके लिए रक्षाकवच की तरह है। लोहागढ़ किले के प्रवेश द्वार का भी लंबा इतिहास रहा है। यह दरवाजा दरअसल चित्तौड़गढ़ किले का था जिसे दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने जब्त कर लिया था। 17वीं सदी में जाट सेना के जवान इसे भरतपुर वापस लेकर आए थे।
वो सैलानी जो लोहागढ़ किले तक आना चाहते हैं उनके लिए मुख्य जयपुर या आगरा रोड से स्थानीय परिवहन उपलब्ध है। सैलानी दिल्ली से चलने वाली रेल से भी भरतपुर किले तक पहुंच सकते हैं। गुरुवार और शनिवार छोड़कर किसी भी दिन इस किले का दौरा किया जा सकता है। इस किले में प्रवेश का समय सुबह 10 से शाम 4:30 तक का है।
अंतिम संशोधन : दिसंबर 30, 2014
यह किला पानी की एक गहरी निकाय से घिरा है जो इसके लिए रक्षाकवच की तरह है। लोहागढ़ किले के प्रवेश द्वार का भी लंबा इतिहास रहा है। यह दरवाजा दरअसल चित्तौड़गढ़ किले का था जिसे दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने जब्त कर लिया था। 17वीं सदी में जाट सेना के जवान इसे भरतपुर वापस लेकर आए थे।
वो सैलानी जो लोहागढ़ किले तक आना चाहते हैं उनके लिए मुख्य जयपुर या आगरा रोड से स्थानीय परिवहन उपलब्ध है। सैलानी दिल्ली से चलने वाली रेल से भी भरतपुर किले तक पहुंच सकते हैं। गुरुवार और शनिवार छोड़कर किसी भी दिन इस किले का दौरा किया जा सकता है। इस किले में प्रवेश का समय सुबह 10 से शाम 4:30 तक का है।
अंतिम संशोधन : दिसंबर 30, 2014