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जन धन योजना – वित्तीय समावेशन का युग शुरू

December 18, 2017


जन धन योजना

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने पहले भाषण में घोषणा की, कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भारत के सभी नागरिकों को बैंक खाते और डेबिट कार्ड तक पहुंच मिल सके। देश में गरीब जनता की ‘वित्तीय अस्पष्टता’ के युग का अंत होना चाहिए – इस महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए मोदी ने 28 अगस्त 2014 को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की। इस परियोजना को भारतीय समाज के सभी वर्गों के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान करके वित्तीय समावेशन के उनके सपने को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना क्या है?

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों को – विशेष रूप से गरीब जनता को बैंक खाता, क्रेडिट सुविधा, बीमा कवर और डेबिट कार्ड प्रदान कराना है। इस योजना के उद्देश्य को “मेरा खाता – भाग्य विधाता” के नारे द्वारा हाइलाइट किया गया है। आने वाले समय में, इस योजना का उद्देश्य भारतीय समाज में गरीब वर्गों के लिए अपने बैंक खातों के माध्यम से सब्सिडी सुरक्षित करना और ओवर ड्राफ्ट की सुविधा मुहैया कराना है, जोकि धन-उधारदाताओं, कमीशन एजेंटों और भ्रष्टाचार को खत्म करने का उपयुक्त तरीका है।

यह योजना महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत में, लगभग 42 प्रतिशत आबादी वित्तीय संस्था (बैंकों) की पहुँच से दूर है और देश की बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा नहीं है। यह जनसंख्या ऋण के लिए ऋण दाताओं पर निर्भर रहती है, यह ऋण अक्सर अत्यधिक ब्याज दरों और अनुचित शर्तों पर दिया जाता है। एक मूल बैंक खाते के उपयोग के बिना, बीमा कवर और डेबिट कार्ड जैसे सुविधाएं भारतीय जनसंख्या से बहुत दूर रहती हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना इस परिदृश्य को बदलने की तैयारी में है। आने वाले समय में, यह योजना कैश लेस अर्थव्यवस्था के लिए पृष्ठभूमि प्रदान करेगी– इसमें (डिजिटल इंडिया) पर प्रधानमंत्री का पहला भाषण एक और मुख्य बिंदु होगा।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के लाभ

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) की शर्तों के अनुसार, खाताधारकों को रुपेय डेबिट कार्ड के साथ शून्य-शेष बचत खाता प्रदान किया जाएगा। खाताधारक को (26 जनवरी 2015 से पहले खोले गए खातों के लिए) 30,000 रुपये का जीवन बीमा कवर और एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। यह संभावना है कि 2018 तक प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत सभी खाता धारकों को आधार-लिंक बैंक खाते खोलने के बाद 5,000 रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जाएगी। बैंक खातों में सीधे धन स्थानांतरण की अनुमति देकर, यह योजना भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पा सकती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि डेबिट कार्ड जो स्वाइप किए जा सकते हैं उन्हें प्रदान करने से क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता में कमी आएगी, जिससे बचत को बढ़ावा मिलेगा।

योजना का कार्यान्वयन

इस योजना को सफल बनाने के लिए पीएमओ ने मोदी द्वारा साइन किए गए 7.25 लाख ईमेल पूरे देश के बैंक कर्मचारियों को भेजे, जिसमें उनका सहयोग माँगा गया था। लोगों को बैंक में खाते खुलवाने को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए देश भर में 77,862 नामांकन शिविर खोले गए। उद्घाटन समारोह, भरूच, बिलासपुर, देहरादून, गांधीनगर, गुवाहाटी, मुम्बई, मुजफ्फरपुर, पंजिम, पटना, पोर्ट ब्लेयर, रायपुर, सूरत और विजाग सहित 76 प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया था।

पीएम जेडीवाई का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जाना है। पहला चरण अगस्त 2015 तक जबकि दूसरा चरण 2018 तक चलने की संभावना है। इसका उद्देश्य सन् 2018 तक 7.5 करोड़ परिवारों को बैंक खाते उपलब्ध कराना है। दूसरे चरण में, सरकार इन खाताधारकों के लिए पेंशन योजनाएं भी उपलब्ध कराएगी।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) का शुभारंभ

28 अगस्त 2014 को, योजना के शुभारंभ के दिन, पूरे देश में 1.5 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए थे। सभी जगह पर एक ही दिन में एक साथ इतने ज्यादा खाते खुलना, निश्चित रूप से यह सबसे बड़ा प्रयोग है। लगभग 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और कई प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों ने भारत के विभिन्न शहरों में आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सूरत में इस योजना का शुभारंभ किया, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसे भोपाल में शुरू किया, सूचना मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे पुणे में शुरू किया और गृह मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ प्रक्षेपण समारोह में उपस्थित थे।

इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक अस्पृश्यता को दूर करने का काम महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया है, अगर हम गरीबी से मुक्त होना चाहते हैं, तो हमें पहले वित्तीय अस्पृश्यता से छुटकारा पाना होगा। हमें प्रत्येक व्यक्ति को वित्तीय प्रणाली से जोड़ना होगा और इसके लिए कार्यक्रम को प्रोत्साहन भी दिया गया है। जब कोई बैंक खाता खोला जाता है, तो यह अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में शामिल होने की दिशा में पहला कदम होता है। ”

केवाईसी के बारे में?

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के प्रक्षेपण से पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘अपने ग्राहक को जानकर’ (केवाईसी) मानदंडों में आवश्यक छूट दी। कम-जोखिम वाले ग्राहकों को अब बैंक खाते खोलने के छह महीने के अन्दर केवाईसी दस्तावेज प्रदान करने का प्रस्ताव होगा। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के अनुसार, ‘छोटेखाते’ उन बैंकों द्वारा खोले जा सकते हैं जो वर्तमान केवाईसी मानदंडों के तहत जरूरी आधिकारिक वैध दस्तावेज नहीं रखते हैं। खाता खोलने के लिए ग्राहक को एक फोटो और एक हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान की आवश्यकता होगी। हालांकि इन खातों में, कुछ समय-सीमा निर्धारित होगी – एक साल में 1,00000 रुपये से ज्यादा जमा नहीं किया जा सकता है और एक माह में कुल निकासी 10,000 रुपये से ज्यादा की नहीं की जा सकती है। खाते में कुल बैलेंस 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं रखा जा सकता। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, छोटे खाते एक वर्ष तक सक्रिय रहेंगे। इस अवधि के दौरान, खाता धारक ने अगर केवाईसी के स्वीकार्य आधिकारिक दस्तावेजों में से किसी एक में भी आवेदन किया है, तो खाते को एक वर्ष से अधिक समय तक लागू होने की अनुमति दी जाएगी।

प्रधानमंत्री ने इस प्रक्षेपण में कहा कि (गाड़ी अपने आप चलने लगती है) समावेशी वित्तीय नेटवर्किंग के विस्तार को गति प्राप्त होती है। नई शाखाओं, नए बुनियादी ढांचे के साथ, नई नौकरियों का निर्माण भी होना चाहिए। हालांकि कुछ महीनों से इसे काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। इस योजना के हिंदी नामकरण की भी आलोचना की गई है।