Home / Government / भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

July 10, 2018


भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

क्या आप जानते हैं कि 1949 में संविधान सभा ने जो संविधान पारित किया था, उसमें 395 अनुच्छेद और 22 खंड थे? इतने बरसों में, कई अनुच्छेद और खंड जुड़ते गए। मौजूदा संविधान में 444 अनुच्छेद और 25 खंड है। ज्यादातर लोगों के लिए सभी अनुच्छेद और उनके प्रभाव को जानना या याद रखना संभव नहीं है। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेदों के बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी चाहिए।

संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद की सूची

अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्य स्थापित करने या उन्हें स्वीकार करने की अनुमति देता है;

अनुच्छेद 3 में नए राज्यों की संरचना, बदलाव या नामकरण की अनुमति दी गई है;

अनुच्छेद 5-11 में नागरिकता के अधिकार दिए गए हैं, जो उसी समय के है जब पहली बार संविधान बना था। जो लोग पाकिस्तान से भारत आए, जो भारत से पाकिस्तान गए, भारत में रहने वाले नागरिकों के साथ ही विदेशी नागरिकता हासिल करने के लिए भारतीय नागरिकता त्यागने और नागरिकता के अधिकारों को जारी रखने से जुड़ी जानकारियां हैं।

अनुच्छेद 12अनुच्छेद35 में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की जानकारी है।

यह जानना बेहद जरूरी है कि संविधान सभी नागरिकों पर लागू होने वाले कुछ अधिकारों की गारंटी देता है, जिन्हें हम मौलिक अधिकार कहते हैं। इन अनुच्छेदों में शामिल हैः (14-15) समानता का अधिकारः धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है; (16) सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के लिए समानता का अधिकार देता है; (17) अस्पृश्यता का अंत; (18) उपाधियों का अंत; (19) स्वातंत्र्य का अधिकारः नागरिकों को बोलने और अभिव्यक्त करने की आजादी है, बिना हथियारों के और शांतिपूर्वक जमा होन का अधिकार है, एसोसिएशन या यूनियन बनाने का अधिकार है, भारत के किसी भी हिस्से में बिना किसी रोक–टोक के घूमने का अधिकार है, भारत के किसी भी हिस्से में रहने या बसने का अधिकार है, किसी भी व्यापार, कारोबार या पेशे के अपनाने का अधिकार है; (21) जीवन और व्यक्तिगत आजादी का संरक्षण; (21ए) शिक्षा का अधिकारः 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।

कई इलाकों में, अभिभावक मुफ्त शिक्षा के अधिकार के बारे में नहीं जानते, इस वजह से अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। (23-24) शोषण के खिलाफ अधिकारः मानव तस्करी और बंधुआ या जबरदस्ती मजदूरी कराने पर प्रतिबंध। अक्सर देखा गया है कि इस अधिकार की अनदेखी होती है और पीड़ितों का शोषण किया जाता है। (25-28) धर्म की स्वतंत्रता का अधिकारः नागरिकों को किसी भी धर्म को अपनाने या प्रचार करने का अधिकार है; अनुच्छेद 36-50 में राज्य के नीति निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है।

नीति निदेशक तत्वों में मानव कल्याण और सभी नागरिकों को समान न्याय, स्वास्थ्य और पोषण देने के लिए राज्य के दायित्वों का उल्लेख किया गया है। एससी/एसटी और अन्य कमजोर तबकों के कर्मचारियों के कल्याण, कृषि और पशु पालन को बढ़ावा और प्रोत्साहन, स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव, वन और पर्यावरण की सुरक्षा, कार्यपालिका से न्यायपालिका को पृथक करने, और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा और प्रोत्साहन देना शामिल है।

अनुच्छेद 51 में नागरिकों के बुनियादी दायित्वों को विस्तार से समझाया गया है। अनुच्छेद 52-151 खंड 4 में संघ (52): भारत के राष्ट्रपति; (53): संघ की कार्यकारी शक्तियां; (54): राष्ट्रपति का चुनाव; (55): राष्ट्रपति के चुनाव का तरीका; (56): राष्ट्रपति के कार्यालय की अवधि; (61): राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया; (63): भारत के उपराष्ट्रपति; (64): उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना; (65): राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उनकी अनुपस्थिति में उप–राष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उनके कार्यों का निर्वहन; (72): राष्ट्रपति की किसी दोषी की सजा को निलंबित करने, माफ करने या उसकी अवधि कम करने की शक्ति;

(79): संसद का गठन; (80): राज्यों की सभा– राज्यसभा की संरचना, इसे ऊपरी सदन भी कहा जाता है; (81): लोगों के सदन– लोकसभा की संरचना, जिसे निचला सदन भी कहा जाता है; (83): संसद के सदनों की अवधि; (93): लोकसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष; (100): सदनों में मतदान, रिक्तयों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और कोरम; (102): संसद के किसी भी सदन से किसी सदस्य की सदस्यता को अयोग्य घोषित करना; (105): इस अनुच्छेद में संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों के विशेषाधिकारों, शक्तियों की जानकारी दी गई है; (107): विधेयक को प्रस्तुत करने और पारित करने की प्रक्रिया और प्रावधान दिए गए हैं।

(108): कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठकः विवादित विधेयकों के पारित होने को लेकर अनुच्छेद 107 और 108 का जिक्र अक्सर होता है। (109): धन विधेयक या मनी बिल्स को पारित करने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। लोकसभा में पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यसभा में जाते हैं। वहां से सुझावों–सिफारिशों और मंजूरी के बाद यह विधेयक लोकसभा में लौटता है, जो सिफारिशों को मंजूरी के बिना भी उसे पारित कर सकता है।

(110): धन विधेयक को परिभाषित किया गया है; (112): वार्षिक वित्तीय विवरण, इसे सालाना बजट भी कहा जाता है, जो संसद में वित्त मंत्री पेश करते हैं; (114): विनियोग विधेयक; (123): संसद के विश्रांति काल में अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति की जानकारी देता है; (124): उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन; (126-147): भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति, उच्चतम न्यायालय की भूमिका और कार्यप्रणाली; (148-151): इसके दायरे में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति, उसकी भूमिका और जिम्मेदारियों के साथ ही अंकेक्षण रिपोर्ट देने की जानकारी आती है।

अनुच्छेद 152-237, खंड 6 में राज्यों के संबंध में उपबंध दिए गए हैं। (152-161): इसके तहत राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति, दायित्वों और कामकाज को विस्तार से समझाया गया है; (163): इसमें मंत्रि परिषद की राज्यपाल को सहयोग व सलाह देने की भूमिका का उल्लेख है; (165): राज्यपाल द्वारा राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया को विस्तार से दिया है; (170): राज्य के विधान मंडलों की संरचना की जानकारी दी गई है; (171): इसमें राज्य के विधान परिषदों की संरचना की जानकारी दी गई है; (194): विधान–मंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों तथा समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकारों की जानकारी दी गई है; (214-237): उच्च न्यायालय और उसके क्षेत्राधिकार, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति, जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, निचली अदालतों पर नियंत्रण आदि को इन अनुच्छेदों में परिभाषित किया गया है। (239-242): इस प्रावधान में केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है; (243 ए–ओ): पंचायतों और ग्राम सभा की परिभाषा, संचरना और कामकाज की जानकारी दी गई है।

अनुच्छेद 245-263, खंड 9 में संघ और राज्यों के संबंधों को शामिल किया गया है। (245): संसद और राज्यों के विधान–मंडलों की ओर से बनाए गए कानूनों का विस्तार; (257): संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा किए गए कानूनों का विस्तार; (246): सामान और सेवा कर के संबंध में कानून बनाने के लिए राज्य विधानसभा और संसद की शक्ति; (249): राज्य सूची में के विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति यदि राज्यसभा द्वारा 2/3 बहुमत के साथ एक प्रस्ताव पारित किया जाता है; (250): आपात की स्थिति में जीएसटी के लिए कानून बनाने के लिए संसद के पास शक्ति; (257): कुछ दशाओं में राज्यों पर संघ का नियंत्रण।

अनुच्छेद 268 (संशोधित): औषधीय और शौचालय की सामग्री पर उत्पाद शुल्क राज्य सूची में शामिल किया जाएगा और इस पर जीएसटी कम लगेगा।

अनुच्छेद 268 ए (निरस्त): इसे निरस्त कर दिया गया है क्योंकि जीएसटी में सेवा कर कम हो गया है।

अनुच्छेद 269 ए: यह जीएसटी के तहत अंतर-राज्य व्यापार से संबंधित प्रावधान, यह कर का संग्रह और संघ एवं राज्यों के बीच कर के आवंटन के प्रावधानों से संबंधित है।

अनुच्छेद 279-ए: यह अधिनियम के लागू होने के साठ दिनों के भीतर राष्ट्रपति द्वारा जीएसटी परिषद के संविधान से संबंधित है।

अनुच्छेद 324-329 में चुनावों से जुड़ी कार्यप्रणाली को सविस्तार समझाया गया है।

अनुच्छेद 330-342 के दायरे में एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यकों के लिए किए गए विशेष प्रावधान शामिल है।

अनुच्छेद 343-351 के दायरे में संघ और राज्यों की राजभाषा, उच्चतम और उच्च न्यायालय की भाषा और हिंदी भाषा के विकास के बारे में बात की गई है।

अनुच्छेद 352-360; (352): आपातकाल की उद्घोषणा। इसके दायरे में वह प्रावधान आते हैं, जिनके तहत आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। 1975 में आपातकाल लगाने के दौरान, इसे और इससे जुड़े अनुच्छेदों का इस्तेमाल किया गया था और इस पर लंबे समय तक चर्चा भी होती रही है; (356): इसके तहत राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था नाकाम रहने की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की चर्चा की गई है। हाल ही में उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश की सरकारों को इसी अनुच्छेद का इस्तेमाल करते हुए बर्खास्त किया गया था। यह बात अलग है कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप से दोनों राज्यों में फिर सरकारें बहाल हो गईं। (360): इसके तहत राष्ट्रपति के पास अधिकार है कि वह वित्तीय आपातकाल घोषित कर सकता है।

अनुच्छेद 368 के तहत राज्य सूची के कुछ मामलों के संबंध में कानून बनाने के लिए संसद को सत्ता प्रदान करता है जैसे कि अगर वे समवर्ती सूची के तहत महत्वपूर्ण हो।

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू–कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया गया है। जम्मू–कश्मीर से जुड़े मसलों में यह अनुच्छेद अक्सर चर्चा में आता है।

अनुच्छेद 371: महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 क: नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 ख: असम राज्य से संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 ग: मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 घ: आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 च: आंध्र प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंध

अनुच्छेद 371 छ: सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 ज: मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 झ: अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371 व: गोवा राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान, राज्य की विधान सभा में तीस से कम सदस्य नहीं होने चाहिए।

अनुच्छेद 372: के तहत मौजूदा कानून का बना रहना और उनका अनुकूलन तब तक लागू रहेगा जब तक कि बदले, निरस्त या संशोधित न हो।

अनुच्छेद 372 ए: के तहत निरस्त या संशोधन के माध्यम से कानूनों का अनुकूलन और संशोधित करने के लिए राष्ट्रपति की शक्तियों को शामिल किया जाता है।

अनुच्छेद 373: यह कुछ मामलों में प्रतिबंधित रूकावट में व्यक्तियों के संबंध में आदेश देने के लिए राष्ट्रपति की शक्ति से संबंधित है।

अनुच्छेद 374: इसमें संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों और संघीय न्यायालय में या परिषद महामहिम के समक्ष लंबित कार्यवाही के संबंध में प्रावधान शामिल है। यह बताता है कि संघीय न्यायालय के न्यायाधीश जो संविधान के शुरू होने से पहले कार्य कर रहे थे, उसी पद पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बन जाएंगे। संघीय न्यायालय में लंबित नागरिक और आपराधिक दोनों मामलों में, अपील और कार्यवाही संविधान के शुरूआती नियम को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हटा दिया जाएगा।

अनुच्छेद 375: के तहत न्‍यायालयों, प्राधिकारियों और अधिकारियों से संबंधित है जो संविधान के प्रावधानों के अधीन कार्य करना जारी रखेंगे।

अनुच्छेद 376: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में प्रावधान।

अनुच्छेद 377: भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक से संबंधित प्रावधान

अनुच्छेद 378: लोक सेवा आयोग से संबंधित प्रावधान

सूचना: यह लेख 15 जुलाई 2016 को देबू सी द्वारा लिखा गया है। इस लेख में निहित जानकारी हाल ही में अपडेट की गई है।

 

संबन्धित अन्य लेख

डॉ. बी आर अंबेडकर का योगदान

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का सफर

वर्ष 2017 की महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं 

पंजाब किसानों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना

क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार?

महिला साक्षरता दर में कमी और हमारे समाज पर इसका प्रभाव

गणतंत्र दिवस समारोह (1950 से 2018) में मुख्य अतिथियों की सूची

कर्मचारी भविष्य निधि –अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और नई निकासी प्रक्रिया

दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल – कौन है किस लिए जवाब देह?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मेट्रो मैजेंटा लाइन का किया उद्घाटन

2015 की शीर्ष 10 भारतीय हस्तियाँ

जन धन योजना – वित्तीय समावेशन का युग

राज्य चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017: पार्टियों द्वारा अत्यधिक खर्च क्या मतदाताओं को लुभा पाएगा?

सर्दियों में आपकी त्वचा को कोमल और चमकदार बनाए रखने के 10 सुझाव

भारत में स्वास्थ्य सेवा: निजी बनाम सरकारी स्वास्थ्य सेवा

मानवाधिकार दिवस: जहाँ भारत लोगों के अधिकारों को बचाने में खड़ा है

छः सेवा क्षेत्र जहाँ आधार कार्ड लिंक करना अनिवार्य है

“किंगडम ऑफ ड्रीम्स” गुरुग्राम– कल्पनाओं की दुनिया को महसूस करें

Summary
Article Name
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
Author
Description
क्या आप जानते हैं कि 1949 में संविधान सभा ने जो संविधान पारित किया था, उसमें 395 अनुच्छेद और 22 खंड थे?

Comments

Comments
Showing 16 Comments :
Ajeet singh meena August 4, 2018 at 11:44 am

It’s really important for us most of the Anuched explain in short and smartly and it is also important in terms of examination .

Reply

muje ye bhut achha laga
sir muj short cut me sansad,parliament,samitiyan,…etc ke bare me local language me janna h

Reply

Child beggers ke liye kya pravdhan hai.. Jiske piche pura gang kaam karta hai..

Reply

Indian constitution in hindi language

Reply
dharmpal meghwal January 4, 2018 at 3:14 pm

very important question

Reply

Hm issshe bahut kuch shekh sakte h

Reply

All articles important

Reply

Sir aise hi aap net ke jarie sb ko knowledge do thanku sir

Reply

Very nice sir bhut achaa laga help kerne ke lie thanks

Reply
Mohd Fashal Rajput September 21, 2017 at 8:13 pm

You are very very good.Total Articlas intirasted.

Reply
Akhilesh chandreshwar September 18, 2017 at 7:32 am

मुझे पूरा साविधान की जानकारी चाहिए…. Piless… सर हेल्प करो

Reply
anandi kunar maldah August 21, 2017 at 6:27 pm

Mujhe pura articles padhne me bahut maja aya

Reply
anandi kunar maldah August 21, 2017 at 6:24 pm

Very nice all articals

Reply

India that is bharat
भारत का संविधान सबको बराबरी का हक ओर अधिकार देता है आर्टिकल 19 के तहत स्वतंत्र वाणी का अधिकार है
बहुत अच्छा हे संविधान
जयभीम नमोबुधाय

Reply

very nice

Reply

I am intrested

Reply