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पीहू मूवी रिव्यू

November 17, 2018


पीहू मूवी रिव्यू

कलाकार: मायरा विश्वकर्मा, प्रेरणा शर्मा

निर्देशक: विनोद कापड़ी

निर्माता: रोनी स्क्रूवाला, सिद्धार्थ रॉय कपूर, शिल्पा जिंदल

लेखक: विनोद कापड़ी

छायांकन: योगेश जैनई

संपादक: इरेन धर मलिक, शीबा सहगल, आर्किट डी रास्तोगी

प्रोडक्शन हाउस: आरएसवीपी मूवीज़, रॉय कपूर फिल्म्स

अवधि: 2 घंटे 2 मिनट

पीहू फिल्म का कथानक:

फिल्म पीहू की कहानी एक 2 साल की बच्ची के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक अपार्टमेंट में फंस जाती है और वहां उसकी देखभाल के लिए कोई नहीं होता। फिल्म का ट्रेलर 2016 में रिलीज हुई फिल्म ट्रैप्ड की याद दिला सकता है। लेकिन दोनों फिल्मों के नायक अलग-अलग हैं। यदि ट्रैप्ड मूवी का नायक एक युवा व्यक्ति था जो एक रास्ता खोजने में सक्षम था, तो पीहू मूवी में एक असहाय बच्ची है, जिसे हर समय अपने माता-पिता की जरूरत होती है।

पीहू (मायरा विश्वकर्मा) के जन्मदिन के बाद वाला दिन उसके लिए एक दु:खद दिन बन जाता है। कुछ सजावट का सामान और प्लेटें, जिसमें खाना शेष रह गया है, बिखरी पड़ी हैं और गुब्बारे इधर-उधर दीवारों पर लटक रहे हैं। लेकिन इसके बाद जो होता है वह बेहद दर्दनाक है। उसके पिता उसे छोड़कर जा चुके होते हैं और उसकी माँ अचेतावस्था में जमींन पर पड़ी है, वह छोटी सी लड़की घर में पूरी तरह से अकेली है।

यदि आप माता-पिता हैं, तो आपको इसका एहसास होगा कि यदि आप अपने बच्चे को एक मिनट के लिए भी अकेला छोड़ते हैं, तो यह कितना भयानक हो सकता है। आपका बच्चा करंट वाले तार को छू सकता है या वह यह जानने के लिए उत्सुक हो सकता है कि रेलिंग के दूसरी तरफ क्या है और इसी खोज में उसे कुछ खतरनाक, गंभीर चोटों या यहां तक कि मौत का भी सामना कर पड़ सकता है। केवल इस बात का विचार करने से ही आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तो, आप निश्चित रूप से पीहू फिल्म के क्लाइमेट की कल्पना कर सकते हैं, जहां एक बच्ची एक दिन घर में अकेली रह जाती है और वह खतरे की हर संभावना के अधीन होती है। क्या बच्ची जीवित रहेगी? यदि हां, तो कैसे? वह दुर्घटनाओं का सामना कैसे करेगी, यह जानने के लिए इस फिल्म को देखें।

मूवी रिव्यू

इस फिल्म का दर्दनाक अनुभव उन माता-पिता को चित्रित करता है जिनके बच्चे इस दुनिया में अनाथ हो जाते हैं। एक प्यारी और आकर्षक बच्ची मायरा द्वारा पीहू की भूमिका बहुत ही असाधारण रूप से निभाई गई है। वह इस फिल्म की स्टार है और उसने अपने किरदार को बाखूबी निभाया है। मायरा का हर प्रयास प्राकृतिक दिखाई पड़ता है और दर्शक ये जानने के लिए बहुत ही उत्सुक रहते हैं कि आगे क्या होगा। थियेटर में हर दिल इस बच्ची के लिए धड़क रहा होगा और सभी के होंठों पर इसकी सलामती और इस मूवी के अच्छे अन्त के लिए प्रार्थना होगी।

हालांकि फिल्म की शुरुआत तो अच्छी होती है जिसमें एक बच्ची घर में अकेली फंसी हुई हर सेकेण्ड खतरों का सामना करती है। लेकिन जैसे ही फिल्म आगे की ओर बढ़ती है तो कुछ दृश्य जिन्हें बार-बार दिखाया गया है फिल्म को उबाऊ बनाती है। यदि निर्देशक ने कैमरे पर अच्छी तरह से ध्यान दिया होता तो यह और बेहतर हो सकती थी।

हमारा विचार:

यदि आपको थ्रिलर पसंद हैं और आप देखना चाहते हैं कि एक बच्ची पूरे एक दिन के दौरान बाधाओं से कैसे बचती है, तो आपको इस पीहू मूवी को देखना चाहिए। छोटे सी बच्ची मायरा का अद्भुत प्रदर्शन देखना आपके लिए बहुत ही मजेदार होगा और यह निश्चित रूप से आपका सबसे अद्भुत समय होगा।

रेटिंगः 3

Summary
Reviewer
पी बख्शी
Review Date
Reviewed Item
पीहू मूवी समीक्षा
Author Rating
3