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ऑनर किलिंग: एक बुराई जिससे निजात पाना नहीं है आसान

October 16, 2018


ऑनर किलिंग: एक बुराई जिससे निजात पाना नहीं है आसान

सितंबर 2018 में, तेलंगाना में एक 23 वर्षीय शख़्स की उसकी गर्भवती पत्नी के सामने दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सात लोगों पर आरोप लगाया गया जिसमें उस शख्स की पत्नी के पिता और चाचा शामिल हैं जो इनके विवाह से नाखुश थे। “ऑनर किलिंग” के हुए इस मामले से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह ऑनर किलिंग का पहला मामला नहीं था जो सामने आया हो। इस बात की भी संभावना जतायी जाती है कि शायद ही कभी ऐसे मामलों का अंत हो पाएगा।

एक भारतीय होने के नाते हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाया जाता है, लेकिन ऐसे कई लोग हैं जो अपनी राह से भटककर एक निर्दयी मनुष्य का रूप धारण कर लेते हैं। 2007 में हुए मनोज-बबली हत्याकांड के मामले ने पूरे दुनिया को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन दस साल बाद, क्या कुछ भी बदला है?

भारत और ऑनर किलिंग की कहानियां

मई 2018 में, 23 वर्षीय केविन जोसेफ का मृत शरीर केरल के स्थानीय नहर के अंदर पाया गया था। जोसेफ के शरीर पर अत्यधिक चोट के निशान थे उसकी पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चला था कि उसकी मौत उत्पीड़न के कारण हुई थी। जोसेफ की पत्नी के परिवार के ही सदस्यों ने उसकी हत्या की थी, क्योंकि उसके घर वाले इस शादी से खुश नहीं थे।

सितंबर 2013 में, ऑनर किलिंग का एक और मामला सामने आया जिसमें हरियाणा के रोहतक के एक युवा जोड़े के चोरी-छिपे शादी कर लेने के बाद लड़की के परिवार वालों द्वारा उन दोनों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। लड़की को सबके सामने पीट-पीट कर मार डाला गया था, जबकि लड़के के हाथ-पैर तोड़ दिए गए थे और उसका सिर काट दिया गया था। इन घिनौने अपराधों के उदारणों की एक लंबी सूची है और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि ये थमने का नाम नहीं ले रहे। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2016 के आंकड़ों के अनुसार, देश में ऑनर किलिंग के मामले पिछले साल की तुलना में 796% की वृद्धि के साथ चौका देने वाले थे।

क्या है मानसिकता?

हालांकि, हरियाणा जैसे राज्य आम तौर पर ऑनर किलिंग जैसे मामलों से जुड़ते चले जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि यह एक राष्ट्रव्यापी समस्या बनती जा रही है। इसका तर्क साधारण है – यह किसी जगह की समस्या नहीं बल्कि अपराधियों की मानसिकता की वजह से ऐसा हो रहा है। कई जोड़े ऑनर किलिंग की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं, और वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वे अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करते हैं। अलग जाति, धर्म में शादी करने के मुद्दे क्या इतने बड़े हैं कि लोग अपने ही सगे संबंधियों (खून के रिश्तों) की हत्या करने पर उतारू हो जाते हैं। लेकिन क्यों?

हमारा देश जो वर्ग, जाति, धर्म, और सब कुछ के आधार पर विभाजित है। हम धर्म से संबंधित शत्रुता के अधिकांश मामलों के लिए दुनिया में चौथे स्थान पर हैं। तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ऐसी ही सामान्य सांप्रदायिक घृणा से अक्सर परिवारों को ऐसे दुष्कर्म करने का रास्ता मिल जाता है। परिचय देने के दौरान किसी व्यक्ति की जाति के बारे में पूछने की आदत लगभग हमारे घरों में सामान्य सी है। यह समाज में इन कठोर मतभेदों के कारण है, कि अंतर-जाति या अंतर-धर्म विवाह अक्सर नवविवाहितों की हत्या के साथ खत्म होता है।

हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन हम में से अधिकांश लोग अभी भी वही पुरानी धारणाओं को लेकर बैठे हुए हैं, और इसे सही ठहराने के लिए तरीके ढूंढते रहते हैं।

क्या किया जा सकता है?

हाल ही में, एक अलग अपराध के रूप में “ऑनर किलिंग” घोषित करने की आवश्यकता के बारे में देश में चर्चाएं हुई हैं। आशा की जाती है कि, यह एक मजबूत निवारक के रूप में कार्य करेगा, इसके साथ ही इन मामलों में न्याय-अनुदान करना आसान होगा। एक निश्चित सीमा तक, यह सच है। बेशक, यह एक चमत्कारिक समाधान नहीं होगा, लेकिन इस तरह की एक गंभीर समस्या के साथ हर एक सुधार का कदम महत्वपूर्ण है, चाहे वह कितना ही छोटा हो।

एक व्यापक परिप्रेक्ष्य से, उचित समाधान हमारे लोगों के दृष्टिकोण को बदलने में निहित है। किसी भी समुदाय आये एक व्यक्ति को पूरी तरह से सीमित करना, काफी हद तक समस्याग्रस्त है। दूसरी बात, जो कोई भी व्यक्ति शादी करने का विकल्प चुनता है और अपना जीवन उसके साथ व्यतीत करता है, यह पूरी तरह से उसकी व्यक्तिगत पसंद होती है। पती और पत्नी के विवाद में अन्य कोई नही होता है, उन्हें यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या चाहते हैं। हालांकि मानसिकता में इस बदलाव के लिए, विशेष रूप से हमारे जैसे देश में अधिक समय लगेगा।

निष्कर्ष

इन हत्याओं के बारे में सबसे भयानक बात तो यह है कि ऑनर किलिंग को हमेशा परिवार के सगे संबंधियों द्वारा अंजाम दिया जाता है। परिवार और सगे संबंधी जिन्हें लोग अपना रक्षक समझते हैं, आखिर वहीं उनके भक्षक बन जाते हैं, ऐसा क्यूं? तथाकथित “सम्मान” को संरक्षित करना, जो किसी कारणवश किसी व्यक्ति के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। और विडंबनापूर्ण तरीके से इन हत्याओं को हम ऑनर किलिंग का नाम देते हैं, जबकि इन हत्याओं में सम्मान का क्या मतलब?

किसी को भी किसी अन्य व्यक्ति पर अपनी मान्यताओं को लागू करने का अधिकार नहीं है, हर किसी को अकेले रहने के अधिकार वंचित न करें। 2013 में हरियाणा की हत्याओं में, लड़की के पिता को कोई खेद नहीं था, और यह कहकर उद्धृत किया गया था कि “अगर मुझे करना है तो मैं इसे फिर से करूंगा”। लड़के के परिवार ने उसके शरीर को लेने से इंकार कर दिया, यहां तक कि हत्यारों के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी। ऐसे गलत कामों के लिए रक्षकों की यह गंदी मानसिकता वाकई में बहुत ही घृणास्पद है।

जैसा कि हम 21 वीं शताब्दी में जी रहे हैं, जरूरी है कि हमारी मानसिकता भी विकसित हो। यदि ऐसा नहीं होता है, तो खुद को प्रगतिशील, विकासशील राष्ट्र का नागरिक कहने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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एक भारतीय के रूप में, हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाया जाता है, लेकिन ऐसे कई लोग हैं जो अपनी राह से भटककर एक निर्दयी मनुष्य का रूप धारण कर लेते हैं। 2007 में हुए मनोज-बबली हत्याकांड के मामले ने पूरे दुनिया को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन दस साल बाद, क्या कुछ भी बदला है? भारत और ऑनर किलिंगः एक भद्दा सच।