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जानिए अविश्वास प्रस्ताव क्या है – भारतीय संविधान में क्या है भूमिका

July 20, 2018
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जानिए अविश्वास प्रस्ताव क्या है

अविश्वास प्रस्ताव या निंदा प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है, जिसे पारंपरिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में एक सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है या उदाहरण के रूप में यह एक तत्कालीन समर्थक द्वारा पेश किया जाता है, जिसे सरकार में विश्वास नहीं होता। यह प्रस्ताव नये संसदीय मतदान (अविश्वास का मतदान) द्वारा पारित किया जाता है या अस्वीकार किया जाता है।

वर्तमान में चल रही मोदी सरकार के कार्यकाल का आखिरी मानसून संसद सत्र 18 जुलाई से शुरू हो गया। जैसे कयास लगाए जा रहे थे उसी प्रकार सदन की बैठक की शुरुआत हंगामेदार रही। विपक्षी पार्टियों ने सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए अविश्वास का प्रस्ताव रखा। लोकसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार कर लिया है और अब 20 जुलाई को इस पर संसद में चर्चा होगी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब भाजपा बहुमत के साथ एनडीए गठबंधन के रूप में सरकार चला रही है तो क्या यह अविश्वास प्रस्ताव किसी भी तरह से उसके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। तो इसका जवाब है नहीं। फिलहाल लोकसभा में एनडीए का संख्या बल 311 है। जबकि विपक्ष की सारी जद्दोजहद इस बड़ी संख्या के आगे दम तोड़ देगी।

अविश्वास प्रस्ताव का नियम

सबसे चौकाने वाला तथ्य यह है कि संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है। लेकिन अनुच्छेद 118 के तहत हर सदन अपनी प्रक्रिया बना सकता है जबकि नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है। ऐसा ही मंगलवार 18 जुलाई को टीडीपी और कांग्रेस के सदस्यों ने नोटिस देकर किया। जिसपर अब शुक्रवार को बहस होगी।

पारित होने की प्रक्रिया

प्रस्ताव पारित कराने के लिए सबसे पहले विपक्षी दल को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी लिखित सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहता है। यह बात सदन में तब उठती है जब किसी दल को लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है। फिलहाल विपक्ष भाजपा को घेरने में जुटी है। लगभग सभी विपक्षी दल अब एकजुट होते नजर आ रहे हैं। फिलहाल ऐसा पहली बार हो रहा है जब मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है। इससे पहले बजट सत्र में भी टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी लेकिन तब विपक्ष एकमत नहीं था।

आजादी के बाद 26 से अधिक बार रखे गए अविश्वास प्रस्ताव

देश आजाद हुए 71 साल हो चुके हैं और संसद में 26 से ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं। लेकिन अगर इतिहास पर नजर डालें तो सिर्फ 1978 में अविश्वास प्रस्ताव की बजह से मोरारजी देसाई की सरकार गिरा दी गई थी। मोरारजी देसाई के शासन काल में उनकी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव रखे गए थे। पहले प्रस्ताव के दौरान घटक दलों में आपसी मतभेद होने की वजह से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका लेकिन दूसरी बार जैसे ही देसाई को हार का अंदाजा हुआ उन्होंने मत विभाजन से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।