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मोदी सरकार के चार साल

May 16, 2018
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मोदी सरकार के चार साल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को अपने कार्यभार की शपथ ग्रहण की थी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इस साल अपने चार साल पूरे करेगी और यह अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए तैयार है। अगले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से चुनाव का नेतृत्व करेंगे, इसलिए यह सही समय है भाजपा सरकार की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने का और उन क्षेत्रों पर नजर डालने का जहाँ सरकार लोगों पर अपनी छाप डालने में नाकाम रही है।

भारतीय जनता पार्टी के 2014 के चुनावी घोषणापत्र की समीक्षा करना एक अच्छी शुरुआत है और इस पर भी ध्यान देना है कि इनके वादे क्या थे और क्या इन्होंने इन वादों को पूरा किया है।

भारत निर्माण

भाजपा ने 100 सबसे पिछड़े जिलों के विकास के साथ 100 स्मार्ट शहरों के निर्माण का वादा किया था। सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन ध्यान केंद्रित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक रहा है। इस मिशन में 99 शहरों की पहचान हो चुकी है जिसके प्रस्तावों ने मिशन के तहत आने के लिए अर्हता प्राप्त कर ली हैं।

उपलब्धियां: परियोजनाओं की कुल लागत – 2,01,979 लाख करोड़ रुपये; कुल क्षेत्र आधारित विकास योजना – 163,138 लाख करोड़ रुपये; कुल पैन सिटी सॉल्यूशन लागत – 38,841 हजार करोड़ रुपये।

स्मार्ट सिटी की योजनाओं का कार्य प्रगति पर है और लक्षित शहरों में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। इन योजनाओं का कार्यान्वयन और देखरेख करने में केंद्र सरकार का निवेश, ध्यान और भागीदारी महत्वपूर्ण है और हर गुजरते साल के साथ इन योजनाओं का प्रभाव और भी अच्छे से दिखाई देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी इसका एक स्पष्ट उदाहरण है जहाँ भूमि के ऊपर बिजली के तारों को ज्यादातर भूमिगत स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे भीड़-भाड़ वाली कालोनियाँ साफ दिखाई देती हैं और संभावित खतरा भी कम हो गया है।

देश के सबसे पिछड़े जिलों में बुनियादी ढाँचे में महत्वपूर्ण निवेश देखा गया है। इस साल 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि 5,97,464 गांवों में लगभग 100% गांवों तक बिजली की आपूर्ति हो चुकी है – हालांकि, 2013 तक, 94% गांवों को पहले ही बिजली की आपूर्ति हो चुकी थी। पिछले चार वर्षों में, एनडीए सरकार ने 35,851 गांवों को शामिल किया। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि कुल गांवों के सभी घरों में केवल 8% बिजली की आपूर्ति हुई है। तो यह सरकार के लिए एक सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकार ने हाई स्पीड बुलेट ट्रेन की डायमंड चतुर्भुज परियोजना को लागू करने का वादा किया था। वर्ष 2018 में, अहमदाबाद-मुंबई विस्तार के साथ केवल प्रगति पर हैं और मुंबई में भूमि अधिग्रहण की समस्याओं के बावजूद यह योजना समय के साथ प्रगति कर रही है। बाकी हिस्सों में, कुछ परियोजनाओं का अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है, जबकि कुछ की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी तक वे योजनाएं पूरी नहीं हुई हैं।

एग्री-रेल नेटवर्क में भी ज्यादा प्रगति देखने को नहीं मिली है, जबकि तीर्थयात्रा आदि से संबंधित परियोजनाओं में कुछ प्रगति हुई है। राष्ट्रीय ऊर्जा नीति कार्यान्वयन में है और सरकार बिजली उत्पादन और समग्र बिजली उत्पादन के लिए कोयले की उपलब्धता में सुधार करने में सफल रही है।

सरकार ने सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा को कवर करते हुए अक्षय ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। दिसंबर 2014 में, अक्षय ऊर्जा के लिए स्थापित क्षमता 33,791 मेगावॉट थी, जिसमें पवन ऊर्जा-22,465 मेगावॉट, सौर ऊर्जा-3,062 मेगावॉट, जैव ऊर्जा-4,272 मेगावॉट और लघु जलविद्युत की 3,990 मेगावॉट ऊर्जा शामिल थी। दिसंबर 2017 तक, देश ने 108,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को कार्यान्वित किया था। यही कारण है कि वर्ष 2014 से इसकी लगभग तीन गुना क्षमता बढ़ गई है। वर्ष 2022 तक इसका 175 गीगावॉट तक पहुँचाने का लक्ष्य है। इसमें से सौर 100 गीगावॉट, पवन 60 गीगावॉट, बायोगैस 10 गीगावॉट और न्यूनतम जल विद्युत 5 गीगावॉट शामिल हैं। नवीकरणीय (अक्षय) ऊर्जा में, इस सरकार ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को प्रमुख स्थान पर रखा है।

इसके अलावा, एनडीए सरकार ने क्लीनर पावर जनरेशन की ओर ध्यान केंद्रित करने वाले क्षेत्रों में से एक के रूप में नाभिकीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया है। पेरिस की वार्ता में भारत के मजबूत पक्ष की काफी सराहना की गई है और अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आवाज बनकर उभरा है।

मूल्य वृद्धि की जाँच

बढ़ती कीमतें सरकार के लिए एक समस्या बनी हुई हैं। पिछले चार सालों में महँगाई काफी हद तक विकास में बाधा रही है, लेकिन कच्चे तेल की कम कीमतों से इसको काफी मदद मिली है। किसानों की समस्या में कृषि उत्पादकता एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि अभी तक कोई कार्यक्षमता प्रगति नहीं हुई है। हालांकि, सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना, बीमा योजना जैसी कई पहल की शुरूआत की है और अपने किए गए वादे के अनुसार राष्ट्रीय कृषि बाजार की स्थापना भी की है।

भ्रष्टाचार से लड़ाई

सरकार ने सरकारी अनुबंधों के लिए ई-टेंडरिंग योजना को शुरू करने का वादा किया था और अब यह पूरी तरह से कार्यान्वयन में है। परिणामस्वरूप, पक्षपात और इसी प्रकार के भ्रष्टाचारों की बहुत ही कम शिकायतें दर्ज की गई हैं।

भ्रष्टाचार विरोधी मंच पर जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी ने हासिल कर लिया है, मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले को छोड़कर, कोई बड़े घोटाले की जानकारी नहीं मिली है। विदेशों से काले धन को वापस लाने का वादा अभी तक एक वादा ही बना हुआ है। साथ ही, एनडीए सरकार को निकटता का लाभ उठाने वाले पूँजीपतियों के लिए आरोपों का सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर, सरकार स्वच्छ प्रशासन की धारणा को बनाए रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

रोजगार और उद्यमिता

रोजगार देने का वादा भी काफी चर्चा में रहा है। कपड़ा आदि जैसे श्रम-केंद्रित क्षेत्रों में नई नौकरियां देने का वादा किया गया था। विपक्षी पार्टी का दावा है कि प्रधानमंत्री 20 लाख नई नौकरियाँ देने के अपने वादे को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। लेकिन एनआईटीआई आयोग के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण ने सितंबर 2017 और फरवरी 2018 के बीच औपचारिक क्षेत्र में 35.3 लाख नई नौकरियाँ उपलब्ध कराने का डेटा जारी किया है। अनौपचारिक क्षेत्रों में नौकरियों के निर्माण पर कोई डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन भारत में, नई नौकरियों के अतिरिक्त प्रत्याशित परिणाम के साथ सालाना 7% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

महिलाएं – राष्ट्र निर्माता

भारतीय जनता पार्टी ने संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का वादा किया था, लेकिन वह अपने इस वादे को पूरा करने में भी नाकाम रही। हालांकि, अप्रैल 2018 में 26 कैबिनेट मंत्रियों में से 6 महिला मंत्री हैं। भारत दो महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्रीस्तरीय पदों – रक्षा और विदेश मामलों में महिलाओं का दावा कर सकता है।

सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना को लागू करने और इसका अधिक विस्तार करने का वादा किया था। इस योजना की शुरुआत 2015 में की गई थी और तब से देश के सभी 640 जिलों में इसकी शुरुआत हुई है। इसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा और कल्याण को बढ़ावा देकर कन्या भ्रूण हत्या की दर को कम करना था। अप्रैल-मार्च 2015-2016 और 2016-2017 के बीच, 161 जिलों में से 104 जिलों में जन्म के समय महिला लिंगानुपात में सुधार की सूचना मिली थी।

परिणामों पर सरकार के सुदृढ़ ध्यान को देखते हुए और अधिक बेहतर परिणामों के विस्तार की उम्मीद की जा सकती है क्योंकि इस डेटा में और अधिक वृद्धि हो रही है।

लड़कियों और महिलाओं के बलात्कार के बढ़ते मामलों की समस्या में भी काफी वृद्धि देखी गई है। सरकार ने 12 साल से कम उम्र की नाबालिगों के बलात्कार के लिए तत्परता दिखाते हुए कठोर ‘पीओसीएसओ अधिनियम’ के तहत मृत्युदंड दंड का फैसला लिया है। बलात्कार मामलों की बढ़ती हुई प्रवृत्ति चिंता का एक प्रमुख विषय बना हुआ है।

एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग – सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण

घोषणापत्र में सामाजिक न्याय और सामाजिक सद्भाव का वादा किया गया था। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सरकार को जनता की धारणा का सामना करना पड़ता है, विशेष रूप से उपेक्षित समूहों के बीच। दलित, अनुसूचित जनजातियां और अन्य पिछड़े वर्ग को अन्य वर्गों के लिए मान्य विशेषाधिकारों से इनकार करना और उनकी मांगों का मत लगातार जारी रहा है। कुछ चुनिंदा हमलों ने मीडिया के ध्यान को आकर्षित किया है जिससे नकारात्मक धारणा को बढ़ावा मिला है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सरकार को और अधिक योजनाए लागू करने की जरूरत है, क्योंकि 2019 के आम चुनाव नजदीक हैं।

अल्पसंख्यक – समान अवसर

घोषणापत्र में देश भर के मदरसों और समग्र सांप्रदायिक सद्भाव के आधुनिकीकरण का वादा किया गया था। मुस्लिम समुदाय देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह है और कई दक्षिण-पंथी हिंदू समूहों द्वारा हिंदुत्व एजेंडे के निरंतर दबाव के तहत असुरक्षित महसूस कर रहा है। सरकार आंशिक रूप से मदरसों के पाठ्यक्रम में सामाजिक विज्ञान और गणित की शुरुआत करने में सफल रही है लेकिन अभी भी देश के कई क्षेत्र प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं। घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुसार सरकार को अल्पसंख्यक समूहों को विकास में समान अवसर के साथ आश्वस्त करने के लिए कुछ और अधिक योजनाओं को अमली जामा पहनाने की जरूरत है।

सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास ध्यान केन्द्रित करते हुए इन क्षेत्रों पर काफी निवेश किया है, सरकार के इस प्रयास को बड़े पैमाने पर रेलवे परियोजनाओं में देखा जा सकता है। रणनीतिक रूप से 14 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान मिल गई है, जिनमें से 498 किलोमीटर बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन सबसे महत्वपूर्ण है। पूर्वी थिएटर नियंत्रण रेखा से सटी हुई छह रेल परियोजनाओं का निर्माण विभिन्न चरणों में हैं। 2014 के प्रारंभिक चरण के तहत सड़क, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश किया जा रहा है। घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को रद्द करने की बात की गई थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद, सरकार ने धीरे-धीरे इस दावे को खारिज कर दिया है।

नव-मध्य वर्ग- उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना

एक सामान्य वादा जो स्वास्थ्य, चिकित्सा बीमा, आवास और परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए किया गया था। सरकार ने सभी क्षेत्रों में निवेश में वृद्धि की है लेकिन अधिकांश शहरों में मेट्रो रेल की कार्यान्वयन दर सबसे अधिक दिखाई दे रही है। मध्यम वर्ग के लिए किफायती आवासों में अभी भी प्रथम स्तरीय और द्वितीय स्तरी के शहरों में कार्य चालू नहीं हो पाया है। विभिन्न राज्यों में कार्यान्वयन के तहत आरईआरए के साथ, घर खरीददार अब रियल एस्टेट(अचल संपत्ति) में निवेश करने पर अधिक विश्वास कर रहे हैं और 2018-19 में फिर से निवेश करने की उम्मीद की जा रही है।

आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता

एनडीए सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है, जो कि स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, लेकिन इन प्रयासों के बाद भी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के माओवादी प्रभावित इलाके अभी भी इससे जूझते नजर आ रहे हैं। हालांकि, सरकार जम्मू-कश्मीर को अपनी राजनीतिक अधीनता में ला चुकी है जहाँ पर आतंकवादी गतिविधियों के अधिकतम मामले होते हैं। सरकार गठबंधन सहयोगी पीडीपी के साथ कभी हाँ कभी ना वाले संबंध के कारण एक कठिन रुख अपनाने के लिए अपनी अक्षमता को उजागर करती रही है।

वरिष्ठ नागरिक

घोषणापत्र ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर में छूट देने का वादा किया था और सरकार ने उनके लिए कई लाभों में वृद्धि की है। 2018 के बजट में, वरिष्ठ नागरिक सबसे बड़े लाभार्थी थे। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज से आय के लिए छूट सीमा प्रति वर्ष 50,000 रुपये तक बढ़ा दी गई है। इसी प्रकार, स्वास्थ्य बीमा और स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च के लिए कटौती लाभ 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है।

विकलांगों पर खास नजर

घोषणापत्र में विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों को पारित करने का वादा किया गया था, और यह दिसंबर 2016 में पारित हुआ। इस बिल (विधेयक) के तहत, विकलांगों की सूची 7 से बढ़कर 21 हो गई। यह विधेयक विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के अंतर को पूरा करने में एक लंबा सफर तय करेगा।

युवा – भारत को अदम्य बनाएं

घोषणापत्र में युवाओं के विकास के लिए एक प्रतिभा खोज पहल की स्थापना करने का वादा किया गया था। संभावित ओलंपिक पदक विजेताओं की पहचान और उनको समर्थन देने के लिए लोकप्रिय ओलंपिक पोडियम योजना की पहल का कार्यान्वयन किया जा रहा है। यह कई अन्य पहलों में से एक पहल है।

स्वास्थ्य सेवाएं – पहुँच बढ़ाएं, गुणवत्ता में सुधार करें, लागत कम करें

इस क्षेत्र में परंपरागत रूप से निवेश करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। घोषणापत्र में हर राज्य में एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) का वादा किया गया था। 2014 तक, सात एम्स परिचालन में थे, दिल्ली एम्स को 1956 जबकि अन्य को 2012 मे स्थापित किया गया था।

एनडीए सरकार ने भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में छह नए एम्स स्थापित किए हैं। रायबरेली (यूपी) और रायगंज उत्तर दीनाजपुर (पश्चिम बंगाल) में एम्स स्थापित करने की दो और योजनाएं हैं। रायबरेली में 148 एकड़ जमीन में से 97 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और पश्चिमी बंगाल की सरकार ने हाल ही में आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई है।

सरलीकृत कर व्यवस्था

भाजपा ने कर भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने का वादा किया था और इसको बखूबी निभाया भी है। व्यक्तियों और व्यवसायों द्वारा भरी जाने वाली सूचना में काफी कमी आई है और कर भुगतान पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है। कर वापसी में लगने वाले समय में भी कमी आई है।

कृषि – उत्पादक, वैज्ञानिक और लाभप्रद

सरकार ने घोषणापत्र में एपीएमसी अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय भूमि उपयोग नीति में सुधार करने का वादा किया था, जिससे उत्पादन लागत पर किसानों को 50% मुनाफा सुनिश्चित किया गया था। एपीएमसी अधिनियम सुधार और उत्पादन लागत पर 50% लाभ अभी भी लागू नहीं किया गया है। किसान काफी परेशान हैं और कृषि क्षेत्रों में अब तक विकास की उम्मीद लगाए हुए हैं। किसान ऋण और फसल बीमा की कमी ने देश में कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को गंभीर स्तर तक बढ़ा दिया है। बड़े निवेश के बावजूद, सरकार किसानों की उम्मीदों के साथ अपना तालमेल नहीं बना पाई है।

उद्योग – आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और देखभाल

भाजपा ने मल्टी ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश को रोकने का वादा किया, लेकिन इस साल वॉलमार्ट ने ईकॉमर्स स्टार्ट-अप – फ्लिपकार्ट के साथ दुनिया का सबसे बड़ा निवेश किया है। अन्य ब्रांड भी प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। एमएसएमई को बढ़ावा देना सरकार का एक और वादा था और यहां सरकार ने कई पहलें की हैं – आसान शर्तों पर ऋण, पूंजीगत उपकरणों का आधुनिकीकरण करने के लिए वित्त पोषण और कौशल विकास, जो सभी सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में योगदान दे रहे हैं। 2018 के बजट में एमएसएमई क्षेत्र को 3,794 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं, जीएसटी की शुरूआत एमएसएमई प्रदर्शन को बढ़ावा देने में मदद करेगी। सरकार ने 2015 में शुरू हुई मुद्रा योजना के तहत 4.5 लाख करोड़ रूपए की मंजूरी दी है। सबसे ज्यादा (76%) लाभार्थी महिलाएं हैं जिनमें से 50% लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के हैं।

पूर्व सैनिक

पार्टी ने शिकायतों को दूर करने के लिए एक वयोवृद्ध आयोग की स्थापना करने का वादा किया था। ओआरओपी योजना सैन्य सेवानिवृत्त लोगों को बड़ी राहत प्रदान कर रही है।

घोषणापत्र में अन्य वादे

घोषणापत्र में एक समान नागरिक संहिता का वादा किया गया था, जिसे बाद में धीरे-धीरे बंद कर दिया गया। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का वादा किया गया, जो न्यायालय में विचाराधीन है। लोकपाल की स्थापना को भी दरकिनार कर दिया गया।

घोषणापत्र में प्रमुख लाभों का वादा नहीं किया गया लेकिन वे प्राप्त हुए हैं

विदेश नीति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले ही भारत को अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र मंच पर ले जाने का दावा कर सकते हैं। भारत ने अमेरिका के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित किया है, सावधानीपूर्वक रूस को अपने पक्ष में रखते हुए निवेश तथा सामरिक सहयोग के लिए जापान के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश से भी अपने रिश्तों को मजबूत किया है। हालांकि, सरकार नेपाल, श्रीलंका और मालदीव के जरिये चीनी वस्तुओं का प्रभाव भारत में कम करने के लिए संघर्ष कर रही है।

जन धन योजना और आधार

जन धन योजना और आधार के कार्यान्वयन की गति और इसके पैमाने ने भारत को अन्य अविकसित और विकासशील देशों के सामने एक आदर्श मॉडल के रूप में पेश किया है।

प्रमुख झटके:

विमुद्रीकरण

सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम गलत साबित हुआ है, सरकार ने क्या वादा किया था और क्या इससे हासिल हुआ है इसने एक पुनर्प्राप्ति अर्थव्यवस्था को बाधित कर दिया और सरकार की उपलब्धियों को कम कर दिया।

एनपीए में वृद्धि

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण सहित वित्तीय प्रणाली में सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा, एयर इंडिया, रेलवे और कई अन्य पीएसयू जैसे कई पीएसयू को कम से कम आंशिक रूप से निजीकरण की आवश्यकता है। मजबूत बहुमत के बावजूद, सरकार पिछले चार वर्षों में सुधारों को हल करने में विफल रही है

सारांश
लेख का नाम-   मोदी सरकार के 4 साल

लेखक का नाम-  देबू सी

विवरण-   भाजपा के 2014 के चुनाव घोषणापत्र पर फिर से विचार करना और जो वादे किये गये थे, उनके वादे क्या थे और क्या वे वादे पूरे किये हैं, इस सरकार की नीतियाँ अच्छी हैं, का विश्लेषण किया गया है।

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