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क्यों होते हैं बलात्कार?

September 26, 2018
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क्यों होते हैं बलात्कार?

जैसा कि इस लेख का शीर्षक संदेहास्पद है इसलिए इसकी सच्चाई पर अभी भी सवाल उठते हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारतीयता के टैग के साथ अपने आपको गर्वान्वित महसूस करने के बावजूद हमारे अंदर औरतों के प्रति सम्मान का अभाव है। रोजाना, यहां तक कि हर एक घंटे के बाद आपको रेप या फिर गैंग रेप जैसी घटनाओं की एक नई खबर सुनने को मिलती है।

जब मैं “बलात्कार” शब्द का नाम लेती हूं तो मेरा मतलब यह नहीं होता कि महिलाओं का सम्मान उतर रहा है, क्योंकि यह अपने आप में ही एक समस्यात्मक दृष्टिकोण है। मेरा कहने का मतलब यह है कि हम 21वीं शताब्दी में जी रहे हैं लेकिन अभी भी कई ऐसे भारतीय पुरुष हैं जिनकी विचारधारा पुरानी है जिस वजह से वे औरतों का सम्मान नहीं करते और उन्हें बहुत ही गंदी निगाहों से देखते हैं। “बलात्कार क्यों होता है?” का बहुत ही सीधा जवाब आपके सामने है, लेकिन इस बारे में कई लोग ऐसे भी हैं जिनकी “राय” इससे अलग है।

हमारे राजनीतिक नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियां

जब आपको लगता है कि भारत प्रगतिशील होने में एक लंबा सफर तय कर चुका है, तभी एक और नई घटना आपको सीधे “अच्छे” पुराने दिनों में जाने पर मजबूर कर देती है। बलात्कार को लेकर विवादित टिप्पणियों के नवीनतम नामों में, हरियाणा से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विधायक प्रेमलता सिंह का नाम शामिल है जिन्होंने बलात्कार के कारणों को “समझाने” की कोशिश करते हुए एक विवादित बयान दे डाला।

उन्होंने का कहा “निराशा” जो हमारे युवाओं के दिमाग में अपना घर कर रही है, इस तरह की घटनाओं (बलात्कार) के पीछे हो रहे कारणों में से एक है। ऐसे युवा जो बेरोजगार हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, इस तरह के जघन्य अपराधों (बलात्कार) को अंजाम देते हैं।” प्रेमलता सिंह ने हरियाणा में एक पूर्व सीबीएसई टॉपर के साथ हुए गैंगरेप को लेकर यह बात कही।

इसके बाद, विधायक की आलोचनाओं का एक लंबा तांता लग गया। लेकिन, दुर्भाग्यवश ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी नेता ने बलात्कार (रेप) जैसे मामलों को लेकर ऐसा विवादित बयान दिया हो, बल्कि देश में कई ऐसे नेता हैं जो इस तरह के विवादित बयान दे चुके हैं।

2013 में, एक कांग्रेस नेता सत्यदेव कटारे ने कहा था कि “महिलाओं के साथ छेड़खानी तब तक नहीं होती जब तक कि महिलाएं पुरुषों को खुद इशारे नहीं करती। बताने की जरूरत नहीं है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्य नेता मोहन भागवत जो अक्सर संदिग्ध टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, ने उसी वर्ष कहा था कि “बलात्कार इंडिया में प्रचलित है भारत में नहीं।” हम अपने देशवासियों से क्या उम्मीद कर सकते हैं, जब देश के नेताओं की विचाधाराएं ही ऐसी हों?

गलती कहाँ पर है?

जब आप कहते हैं कि “बेरोजगारी” जैसी चीजें बलात्कार का कारण बनती हैं, तो इस प्रक्रिया में आप अनिवार्य रूप से इस कृत्य को न्यायसंगत ठहरा रहे हैं, जबकि इसके मंसूबे कुछ भी हो सकते हैं। बलात्कार किसी के शारीरिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित को इस आघात से उबरने में सालों लग जाते हैं। यह एक भ्रष्ट मानसिकता है जो किसी को बलात्कार जैसे घिनौने अपराध की तरफ ले जाती है। जिस वक्त आप इसके अन्य कारणों को ढूंढना शुरू कर देते हैं, आप इस समस्या का हिस्सा बन जाते हैं।

यह कहकर कि एक महिला के इशारे से ही पुरुषों को इस कृत्य के लिए बढ़ावा मिलता है और आखिरकार इससे बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को अंजाम मिलता है। यह एक दूसरा ऐसा कलंक है जिसका सामना रूढ़िवादी महिलाओं को करना पड़ता है। यहाँ पर ऐसे कई मामले हैं जिनमें 2-3 साल की लड़कियों को भी बलात्कार का शिकार होते देखा गया है, यहां तक कि उन लोगों के द्वारा जो इनके सगे संबंधी होते हैं। तब ये सुझावक कहां थे? इसके अलावा कोई भी औरत अपने आप को कष्ट देने के लिए कभी सहमत नहीं होती – यही कारण है कि इसे “उत्पीड़न” कहा जाता है। अगर वह आपको देखकर मुस्कुराती है, आपको गले लगाती है या आप से मित्रतापूर्ण व्यवहार करती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह “आपको गलत कामों के लिए आमंत्रित कर रही है”।

निष्कर्ष

भारतीय संस्कृति का “गौरव” जैसे शब्दों का उपयोग शायद बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को पनाह देने का सबसे प्रचलित रूप है। यहाँ पर ऐसे नेताओं की और आम आदमियों की कमी नहीं है जो बलात्कार के लिए पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को दोषी ठहराते हुए कहते हैं कि –

“वह छोटे कपड़े पहनती थीं।”

“वह रात में एक क्लब में शराब पीती थीं।”

“वह देर रात पुरुषों के साथ समय व्यतीत करती थीं।” – उनके द्वारा इस तरह के दोषों की एक लम्बी सूची होती चली जाती है।

इसलिए आप यह कैसे साबित करेंगे कि आपका इस परिदृश्य को दोषी ठहराना सही है? सीधी बात आप यही कहेंगे न, कि बलात्कार की वजह क्या थी? अगर आप “बलात्कार करने वाले” के अलावा कुछ और जवाब देते हैं न, तो हम लोगों को समस्या है। छोटे कपड़े पहने हुए या नशे की हालत में कोई लड़की तब तक आपको आमंत्रित नहीं करती, जब तक कि वह खुद आपसे संबंध बनाने के लिए साफ-साफ न कहे। लेकिन फिर भी, उसको “ना” कहने का अधिकार है। अगर कोई अपनी मर्दानगी के घमंड में चूर सीधे-सीधे “हाँ” या “ना” नहीं पचा पा रहा है तो फिर आपको उसके विरोध में उँगली उठानी चाहिए।

 

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हम 21वीं सदी में आगे बढ़ रह हैं, जबकि हमारे नेता हमें पीछे की ओर धकेल रहे हैं। अभी हाल ही में एक विधायक ने बलात्कार को लेकर एक विवादित टिप्पणी की है, जिसकी वजह से हमारे मन में सवाल उठ रहा है कि भारत आखिर जा कहाँ रहा है?