अयप्पा मंदिर, चेन्नई


अयप्पा मंदिर के बारे में
अन्ना नगर स्थित अयप्पा मंदिर वहां रहने वाले कुछ लोगों के समूह द्वारा बनवाया गया था। यह लोग अयप्पा की पूजा करते थे और इन्होंने साथ मिलकर उनके लिए एक मंदिर बनाने का निर्णय किया।

यह मंदिर पहले बहुत छोटे स्तर पर बनाया गया लेकिन बाद में यह बड़ा होता गया और अब चैन्नई की पहचान बन चुका है। इसमें भगवान अयप्पा की पंचलोक मूर्ति है और साथ ही गणेश, अंजंनेयर, दुर्गा और मुरुगा की भी प्रतिमाएं हैं। इस मंदिर का विस्तार इसके असंख्य भक्तों के आर्थिक और नैतिक सहयोग से किया गया। यह मंदिर सामूहिक कार्य का नतीजा है और इसके द्वारा कई सामुदायिक कार्यों की पहल होती है जो लोगों को आपस में जोड़े रखती है। शहर का सबसे स्वच्छ और अच्छी व्यवस्था वाला मंदिर होने को कारण भी इस मंदिर को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। इस मंदिर में ज्यादातर उत्सव और त्यौहार केरल शैली में मनाए जाते हैं और इससे इसका बहुसांस्कृतिक मूल्य भी बढ़ता है।

इतिहास
जब चैन्नई में सब जगह विकास कार्य हो रहे थे तब अन्ना नगर के रहवासियों ने नवनिर्मित शांति काॅलोनी में एक मंदिर बनाने का निर्णय लिया। तब एक तंबू में बनाया गया मंदिर इस भव्य मंदिर के निर्माण की ओर पहला कदम था। सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए एक परिसर आबंटित किया और स्थानीय लोगों की मदद से धन जुटा कर बना यह मंदिर आज सालों बाद इस भव्य रुप में हमारे सामने है। आज यह मंदिर विस्वैसरैया टाॅवर में बड़ी सी भूमि पर स्थित है।

एक छोटे और स्थानीय रुप में शुरु हुआ प्रयास आज एक बड़े समूह के सपने के रुप में मौजूद है। लोगों का यह सपना तब पूरा हुआ जब अधिकारियों ने इसके लिए एक अलग स्थान मुहैया कराया।

वास्तुकला
इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी वास्तुकला है, जो केरल के मंदिरों की तरह दिखती है। इस मंदिर में केरल के मंदिरों की सभी विशेषताएं हैं और बड़ा सभागार है जिसमें धार्मिक आयोजन किए जा सकते हैं। इस सभागार में 1,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है और यहां शादी या अन्य पवित्र समारोह आयोजित होते हैं। इस मंदिर में प्रवेश करते ही यह महसूस होता है मानो पड़ोसी राज्य केरल के प्राचीन काल के मंदिरों में प्रवेश किया हो।

यहां की जाने वाली पूजा में भी केरल का प्रभाव है जिससे ये रस्में मनभावन लगती हैं और एक अलग ही माहौल बना देती हैं। मुख्य भगवान अयप्पा और गणेश का मुख पश्चिम की ओर है। मंदिर के कोने में एक नवग्रह मंदिर भी है। अयप्पा मंदिर में केवल नंबूधीरी ही पूजा करते हैं जिससे केरल का प्रभाव और स्पष्ट होता है। यहां एक सालाना उत्सव भी आयोजित होता है जो लोगों के लिए उत्सव और उल्लास का समय होता है।

समय
मंदिर के दरवाजे सुबह 6 बजे खुलते हैं और रात 9 बजे बंद होते हैं। बीच बीच में पूजा के लिए भी मंदिर बंद रखा जाता है। सुबह से लेकर रात तक मंदिर में कई पूजाएं होती हैं और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी होते हैं। यहां पढ़े जाने वाले ज्यादातर मंत्र मलयालम और तमिल में होते हैं।

स्थान
यह मंदिर अन्ना अगर के मध्य में स्थित है और छठीं सड़क और दूसरे एवेन्यू के पास है। यह चैन्नई के सबसे व्यस्त इलाके में मौजूद है और शहर के लोकप्रिय स्थानों से पास होने के कारण लोगों के बीच खासा मशहूर है।

कैसे पहुंचे?
अन्ना नगर में स्थित इस मंदिर तक सड़क के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मार्ग पर कई बसें भी चलती हैं। रेलवे स्टेशन भी यहां से बहुत करीब है और अन्ना अगर पहुंचने के लिए एमआरटीएस रेल का भी उपयोग किया जा सकता है। भारत के सभी प्रमुख शहरों से चैन्नई पहुंचा जा सकता है। बस और टैक्सी का किराया भी किफायती है। चैन्नई की यात्रा करने पर इस मंदिर में जाना ना भूलंे। यह सचमुच अनूठा है जैसे हीरों के बीच मोती होता है।

चेन्नई में देखने योग्य स्थान
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अंतिम संशोधन : नवंबर 10, 2014