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भारत में बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य

November 30, 2017


भारत में बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य

लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के व्यापार का शुभारंभ वर्ष 2010 में हुआ था और शुरुआत में बिटकॉइन विनिमय की कीमत 0.003 अमरीकी डालर (यूएसडी) निर्धारित की गई थी। वर्ष 2011 के शुरुआत में, प्रत्येक बिटकॉइन की कीमत 1 अमरीकी डालर (लगभग 44.50 रुपये) कर दी गई थी। आज लगभग 6 साल के बाद पहली बार, बिटकॉइन की कीमत ने 10 लाख डॉलर का आँकड़ा पार कर लिया है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने वर्ष 2011 में बिटकॉइन में लगभग 4,50,000 डॉलर का निवेश किया था, तो आज आप उस निवेश का लगभग 7 करोड़ रूपए नकदी के रूप में ले सकते हैं। यह अजीब बात है, है ना? लेकिन यह बिटकॉइन नामक इस रहस्यपूर्ण करेंसी की अभी तक की अभूत पूर्व यात्रा रही है।

बिटकॉइन क्या है?

बिटकॉइन सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी या आभासी मुद्रा है। बिटकॉइन की वर्ष 2009 में एक अज्ञात इकाई द्वारा रचना की गई थी और इसका डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूप में दुनिया भर में उपयोग किया गया है। सभी क्रिप्टोकरेंसी की तरह यह किसी भी प्रशासनिक प्रणाली द्वारा विनियमित नहीं है और आभासी बिटकॉइन का आदान-प्रदान की प्रणाली के रूप में व्यापार किया जाता है। वर्तमान में दुनियाभर में लगभग 167 अरब अमरीकी डालर की कीमत के बिटकॉइन उपयोग में हैं – जो सभी क्रिप्टोकरेंसी की लगभग दो तिहाई हैं। अनुमान बताते हैं कि 2,500 से अधिक भारतीय दैनिक आधार पर बिटकॉइन और इसके व्यापार में व्यस्त रहते हैं।

जोखिम शामिल

बिटकॉइन के विनिमय और व्यापार में काफी जोखिम भी है, क्योंकि ऐसी सभी क्रिप्टोकरेंसी में विनियमन का अभाव होता है। हालाँकि देश में इनका उपयोग स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं है, फिर भी केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), बिटकॉइन का उपयोग करने वालों के किसी भी प्रकार के भुगतान को स्वीकार नहीं करते हैं। आरबीआई द्वारा विनियमित भारतीय रुपया के विपरीत, बिटकॉइन के उपयोग के लिए देश में किसी भी मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा कोई मंजूरी या मुद्रा नियंत्रण नहीं है। आरबीआई ने वास्तव में आभासी मुद्रा (वीसी) के उपयोगकर्ताओं को चेतावनी दी थी कि “भुगतान के एक माध्यम के रूप में बिटकॉइन सहित वीसी का सृजन, व्यापार या उपयोग किसी भी केंद्रीय बैंक या मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत नहीं हैं। ऐसी गतिविधियों को लागू करने के लिए संबंधित संस्थाओं द्वारा कोई नियामक अनुमोदन, पंजीकरण या प्राधिकरण प्राप्त नहीं हुआ है”।

300 बिलियन अमेरिकी डालर के कुल कीमत की वीसी अब पूरे विश्व में उपयोग में हैं। साधारण व्यापारी बेहद लोकप्रिय डिजिटल मुद्रा और त्वरित कमाई के साधन के रूप में विनियमन की कमी को देखते हैं, लेकिन यहाँ इस बात पर ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता है कि अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी हैं कि बिटकॉइन का बुलबुला फूटने की कगार पर है। अगर ऐसा होता है, तो उपयोगकर्ताओं को काफी नुकसान सहन करना पड़ेगा।

अन्य डिजिटल मुद्राएं

ऐसी कई डिजिटल मुद्राएं हैं, जिनका दुनिया भर में उपयोग और व्यापार किया जाता है। वास्तव में कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि ऐसी 900 से भी अधिक आभासी मुद्राएं हो सकती हैं। बिटकॉइन के अलावा, भारत में उपयोग की जाने वाली सबसे लोकप्रिय आभासी मुद्राएं निम्नलिखित हैं –

  • इथेरियम
  • लाइटकॉइन
  • रिपल
  • डार्क कॉइन (डीएएसएच)
  • नेम
  • मोनेरो

इनमें से प्रत्येक डिजिटल मुद्राओं से भारत में व्यापार और खरीददारी की जा सकती है और इन प्रत्येक डिजिटल मुद्राओं में बिटकॉइन के समान विशेषताएं हैं। पिछले साल से इन क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में काफी वृद्धि हुई है।

बिटकॉइन का भविष्य

भारत में बिटकॉइन के भविष्य से संबंधित कोई चर्चा निश्चित रूप से अनुमान के दायरे से परे है। हम निश्चितता की किसी भी अल्प भूमिका के साथ केवल एक बात कह सकते हैं कि भारत सरकार और केंद्रीय बैंक को डिजिटल या आभासी मुद्राओं के अस्तित्व को स्वीकार करना चाहिए और उनके व्यापार और लेन देन के लिए नियामक तंत्र का निर्धारण करना चाहिए। अभी तक भारत की राजकोषीय व्यवस्था व्यवस्थित है और इस तरह की डिजिटल मुद्राओं पर कोई बहुत अधिक निर्भरता नहीं दिख रही है, लेकिन डिजिटल भुगतान पर जोर देने के साथ-साथ यह हमारे कानून निर्माताओं और नियामक प्राधिकरणों की उपेक्षा नहीं कर सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी का संग्रह?

हाल की खबरों से पता चला है कि आरबीआई बिटकॉइन को मंजूरी देने के हक में नहीं है और भारत का केंद्रीय बैंक अपनी डिजिटल मुद्रा का शुभारंभ करने की योजना बना सकता है। हालाँकि, हमारे पास अभी भी केंद्रीय बैंक के अनुसंधान के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं है और अनौपचारिक सूत्रों का कहना है कि आरबीआई बिटकॉइन जैसी भारत की अपनी स्वदेशी क्रिप्टोकरेंसी लक्ष्मी का शुभारंभ करने की संभावना पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता भी है, तो आरबीआई निश्चित रूप से इस तरह के शुभारंभ की संभावना को तलाशने वाला एशिया का पहला केंद्रीय बैंक नहीं होगा। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना, यूरोपीयन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान सभी अपनी ही डिजिटल मुद्राओं के परीक्षण के विभिन्न चरणों को पूर्ण कर रहे हैं। डच सेंट्रल बैंक और डी नीदरलैंडशे बैंक की भी अपनी डिजिटल मुद्रा है, जो वर्तमान में उपयोग में लाई जा रही है।