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भारतीय संविधान का इतिहास: कुछ कम ज्ञात तथ्य

March 30, 2018
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भारतीय संविधान का इतिहास

1946 में अंग्रेजों ने भारत को स्वतंत्रता देने पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया था। अंग्रेजों ने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए व संविधान सभा स्थापित करने की संभावना पर चर्चा करने के लिए, ब्रिटिश सरकार और विभिन्न भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलने  योजना के कारण, भारत में एक कैबिनेट मिशन भेजा गया था। यहाँ पर भारत के संविधान के बारे में कुछ कम ज्ञात तथ्य दिए गए हैं।

  • 1946: संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था। डॉ राजेंद्र प्रसाद इसके स्थायी अध्यक्ष और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। प्रारूप रिपोर्ट तैयार करने के लिए 13 समितियों की स्थापना की गई थी, जिनका गठन संविधान पूरा होने के बाद किया गया था।
  • संविधान सभा में 389 सदस्य थे, जिसमें प्रारंभिक विश्लेषित विवरण में – प्रांत के 292 प्रतिनिधि, देशी रियासतों के 93 प्रतिनिधि, मुख्य आयुक्त क्षेत्रों के 3 प्रतिनिधि तथा बलूचिस्तान का 1 प्रतिनिधि शामिल था। बाद में मुस्लिम लीग की संख्या कम होने के कारण 299 प्रतिनिधि रह गए थे।
  • जनवरी 1948: भारतीय संविधान का पहला प्रारूप विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत किया गया था।
  • 4 नवंबर 1948: 32 दिनों तक विचार-विमर्श जारी रहा था। इस अवधि के दौरान, 7635 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे और उनमें से 2473 पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई थी। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे थे।
  • 24 जनवरी 1950: संविधान सभा के 284 सदस्यों द्वारा भारत के संविधान पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं।
  • 26 जनवरी 1950: इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था।
  • भारत के मूल संविधान को हिंदी और अंग्रेजी में प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा लिखा गया था। संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को जटिल लेख और इटैलिक धाराप्रवाह में लिखा गया था। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन के कलाकारों ने प्रत्येक पृष्ठ के प्रस्तुतीकरण पर भी कार्य किया था। इसकी अंग्रेजी और हिंदी की मूल प्रतियाँ भारतीय संसद पुस्तकालय में, हीलियम से डिजाइन किए गए विशेष पात्र में संरक्षित हैं।
  • भारत का संविधान दुनिया का सबसे दीर्घ और सबसे विस्तृत संविधान है और इसमें 25 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं तथा मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 9 अनुसूचियाँ सम्मिलित हैं।
  • भारत के संविधान को संस्कृति, धर्म और भूगोलिक की दृष्टिकोण से सबसे अच्छा लिखित संविधान माना जाता है। तथ्य यह है कि आज तक केवल इसमें 101 संशोधन हुए हैं, जो संविधान सभा द्वारा लिखित अपने विचारों की व्यापक प्रकृति को दर्शाते हैं।

भारतीय संविधान, नीचे दिए गए अन्य देशों के संविधानों की प्रेरणा और विशेषताओं का पालन करता है:

  • फ्रांस: भारत के संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारे के आदर्शों को शामिल किया गया है। यह प्रेरणा फ्रेंच क्रांति से ली गई थी, जिसका निर्माण पहली बार फ्रांस में हुआ था।
  • ग्रेट ब्रिटेन: भारतीय संसदीय प्रणाली, ब्रिटिश संसदीय प्रणाली की संरचना और कार्यप्रणाली से काफी हद तक प्रभावित हुई थी। इसलिए कानून बनाने की प्रक्रियाएं, कानूनी नियम और एकल नागरिकता के सिद्धांतों की प्रेरणा ब्रिटिश संविधान से ली गई हैं।
  • कनाडा: संघीय ढाँचे में मजबूत केन्द्रीय सत्ता की अवधारणा।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: भारतीय प्रस्तावना “हम लोग” के साथ शुरू हुई है और इसकी प्रेरणा अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना से ली गई थी। भारत के मूलभूत अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा प्रणाली, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानान्तरण भी अमेरिका के संविधान का प्रतिपालन करता है।
  • आयरलैण्ड गणराज्य: राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत।
  • ऑस्ट्रेलिया: समवर्ती सूची।
  • जर्मनी (वाइमर गणराज्य): आपातकाल की अवधारणा।
  • यूएसएसआर: पंचवर्षीय योजनाओं की अवधारणा।

संघ या महासंघ:

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत एक संघ है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। संविधान के पहले अनुच्छेद के अनुसार, “भारत” “राज्यों का संघ है”। जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था, तब एक तर्क प्रस्तुत हुआ था कि क्या भारत एक संघ है या एक महासंघ। डॉ अंबेडकर ने प्रारूप तैयार करने के चरण में, भारत को मजबूत एकतावादी बनाने के लिए महासंघ कहा था। ‘सहयोगी संघवाद’ शब्द जल्द ही लोकप्रिय हो गया था, जिसमें राज्यों और केंद्रों की दोहरी राजनीति के बारे में बात की गई थी।

भारत के संविधान की प्रस्तावना है कि भारत एक सर्वश्रेष्ठ समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है। “समाजवादी” शब्द संविधान के 42वें  संशोधन अधिनियम 1976 के माध्यम से, 1976 के पश्चात सम्मिलित किया गया था।