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मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार

July 26, 2018
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मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया

हाल ही के दिनों में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ बहस का मुद्दा बना हुआ है, जिसके कारण दोनों में अंतर के बीच एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हम में से अधिकांश लोग इन पहलों को एक ही अवधारणा के रूप में सोचते हैं लेकिन निश्चित रूप से ये दो अलग-अलग आर्थिक कार्यक्रम हैं। इन पर विस्तार से चर्चा करने से सरकार द्वारा शुरू की गई दोनों पहलों पर उचित विचार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

मेक इन इंडिया

मेक इन इंडिया 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा, जब एनडीए सरकार ने भारतीय संसद के शासनकाल को संभाला था, शुरू की गई एक पहल है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के मुद्दे से निपटने के लिए लांच की गई थी।

इस पहल का उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारत को एक आकर्षक स्थान बनाने और विदेशी नीतियों की विभिन्न व्यापारिक बाधाओं को हटाकर आसानी से व्यापार करने के साथ-साथ विश्वसनीय व्यापार का वातावरण भी तैयार करना है। विदेशी निवेशकों को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के माध्यम से भारत की अपरिपक्व विनिर्माण क्षमता का उपयोग करने और देश को दुनिया भर में एक विश्वसनीय विनिर्माण भूमि बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था।

इस योजना के प्रचार से होने वाले लाभों के लिए इस पहल के तहत भारी निवेश करने हेतु दुनिया भर की कई कंपनियों का नेतृत्व किया, जिससे भारत विनिर्माण कंपनियों के लिए एक केंद्र बन गया।

लाभ

  • मेक इन इंडिया पहल भारत की लगातार बढ़ती आबादी के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करती है।
  • भारत के विभिन्न वाणिज्यिक उत्पादों के विनिर्माण केंद्र में रूपांतरण।
  • उन क्षेत्रों और पड़ोसी स्थानों का विकास जहाँ उद्योगों की स्थापना की जाएगी ।
  • यह कार्यक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देगा क्योंकि विदेशी निवेश से आय की काफी बढ़ोत्तरी होगी।
  • इस पहल के तहत एफडीआई अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के खिलाफ रुपये को मजबूत करेगा।
  • चूँकि दुनिया भर के देश नवीनतम तकनीक को साथ में लाएंगे, भारत को इसका उपयोग करने का अवसर मिलेगा क्योंकि यहाँ पर विभिन्न परीक्षण मशीनीकरण का अभाव है।
  • इस पहल के तहत उद्योगों की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने में मदद करेगी।

कमियाँ

  • मेक इन इंडिया अभियान के तहत, सभी विनिर्माण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसलिए यह भारत के कृषि क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहाहै।
  • विनिर्माण उद्योगों की स्थापना के रूप में बड़े पैमाने पर जमीन, पानी आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए, इन प्राकृतिक संसाधनों के कम होने की संभावना है जो भारत की भारी जनसंख्या के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।
  • भारत के विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी देशों के प्रवेश ने मौजूदा छोटे स्थानीय उद्यमियों के लिए खतरा पैदा कर दिया है और उनके व्यवसाय को बंद कर सकते है।
  • मुख्य रूप से विनिर्माण उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि के उपयोग के कारण कृषि क्षेत्र में व्यापक व्यवधान पड़ सकता है।
  • कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर (एफडीआई) रिटर्न कम करता है और जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था से पूंजी का बहिर्वाह हो जाता है।
  • अगर विदेशी निवेशक इस पहल से पीछे हट जाते हैं तो बेरोजगारी बढ़ सकती है।

मेड इन इंडिया

‘मेड इन इंडिया’ पहल ने भारत में निर्मित उत्पादों को पहचान दी है।ये कार्यक्रम विदेशी निवेशको को आकर्षित नहीं करता साथ ही इसमें देश के उपलब्ध संसाधनों का पुर्णतः उपयोग नहीं होता है। यह घरेलू निर्माताओं को भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यमिता, और प्रौद्योगिकी जैसे उत्पादन कारकों का उपयोग करके देश में ही माल का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे भारतीय जनता के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो। यदि इस कार्यक्रम को कुशलता से बढ़ावा दिया जाता है, तो यह निश्चित रूप से भारतीय स्वदेशी ब्रांडों को पहचान और इंडोर्स करेगा। यह घरेलू निर्माताओं को विदेशी उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपने उत्पादों के मानक को बढ़ाने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

लाभ

  • उत्पाद का निर्माण करने के लिए देश की प्रतिभा और संसाधनों का कुशल उपयोग।
  • भारतीय जनता के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • घरेलू निर्माताओं को भारत में माल का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना।

कमियां

भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान परिस्थितियां घरेलू ब्रांडों के प्रतिकूल होती हैं। बीजेपी की सरकार मेक इन इंडिया पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है क्योंकि इससे देश को विश्व स्तर पर मान्यता मिलेगी, साथ ही भारत में बने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सरकार प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रही है। घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता में कमी से निर्यात में गिरावट और उपभोक्ता आधार में कमी आई है।

प्रमुख मतभेद

पहलामेक इन इंडिया पहल भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में आवश्यक उत्पादन के कारकों में निवेश करने के लिए विदेशी निवेशकों को लुभाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है। जबकि मेड इन इंडिया का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादों के उत्पादन का निर्माण (निवेश सहित) करना है।

दूसरामेक इन इंडिया एक ब्रांड नहीं है बल्कि भारतीय विनिर्माण उद्योग में निष्क्रियता के मुद्दे से निपटने के लिए भारत सरकार की रणनीति है। मेड इन इंडिया, भारत में उत्पादित उत्पादों के ब्रांड को भारतीय और विदेशी बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए संदर्भित करता है।

तीसरामेक इन इंडिया पहल से प्राप्त लाभ में विदेशी निवेशकों का हिस्सा भी शामिल होगा, जबकि भारत में मेड इन इंडिया से अर्जित लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत रखा जाएगा।

दोनों नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था को अपने संबंधित तरीकों से लाभान्वित करती हुई प्रतीत होती हैं।एक तरफ, मेक इन इंडिया अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश को बढ़ावा देगा और दूसरी तरफ, मेड इन इंडिया उत्पादों के निर्माण के मामले में आत्मनिर्भर होने के लिए देश की मदद करेगा। इसलिए, एक बेहतर मार्ग अपनाए जाने की आवश्यकता है।

भारत की प्रमुख चिंता का विषय घरेलू निर्माताओं के साथ उपलब्ध वित्तीय संसाधनों की कमी है जिसकी वजह से उत्पादों की गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। यदि उनकी पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ आपूर्ति की जाएगी, तो घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता और मानकों में सुधार हो जाएगा। इसके लिए, मेक इन इंडिया का सिद्धांत प्रचार में आ सकता है। इस पहल का उपयोग घरेलू निर्माताओं के लिए एफडीआई के रूप में अच्छी तरह से साधनों के निर्माण के लिए किया जा सकता है ताकि वे घरेलू स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण कर सकें। इससे उन्हें और उनके उत्पादों को आत्म-विश्वसनीयता और वैश्विक मान्यता हासिल करने में मदद मिलेगी। एक बार जब वे स्थिरता का मंच प्राप्त कर लेंगे, तो वे धीरे-धीरे मेड इन इंडिया अभियान के तहत अपने उत्पादों के निर्माण में बदलाव कर सकते हैं।

 

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मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार
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मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया दो अलग अलग चीजें हैं यह हमने इस लेख में वर्णित किया है।