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मिशन गगनयान: इसरो का एक मानव अंतरिक्ष मिशन

September 30, 2018
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मिशन गगनयान: इसरो का एक मानव अंतरिक्ष मिशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भारतीयों को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि 2022 तक तीन भारतीय पुरुष या महिलाएं अंतरिक्ष में जाएंगे। इस घोषणा के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पर दबाब बढ़ गया है, क्योंकि इस घोषणा के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मानव अंतरिक्ष मिशन, जो 2004 से इस मिशन पर काम कर रहा है, के लिए निश्चित समय सीमा तय कर दी गई है।

गगनयान अभियान के साथ 2022 से, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष में अपने अंतरिक्षयात्री भेजेगा, जो 5-7 दिन अंतरिक्ष में बिताएंगे। भारत के इस मानव मिशन में तीन क्रू सदस्य होंगे जो स्वदेशी मार्क जीएसएलवी तृतीय प्रक्षेपण यान के साथ पांच से सात दिनों तक पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रवेश करेंगे। इस मिशन की अनुमानित लागत लगभग 10,000 करोड़ रूपये है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का यह मानव अंतरिक्ष मिशन, अन्य सभी मिशन जो अब तक संचालित किए गए हैं, से अद्वितीय है। यदि हम गूढ़ता और जटिलता से इस मिशन के बारे में जानें, तो इस मिशन की तुलना चंद्रमा (चंद्रयान) और मंगल (मंगलयान) मिशन का उद्देश्य महत्वहीन है। इस मिशन की सफलता के बाद भारत – सोवियत संघ, अमेरिका और चीन के बाद, अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

क्या है इस मानव मिशन के पीछे का उद्देश्य?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य गगनयान नामक एक अंतरिक्ष यान बनाना है, जो तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाएगा और फिर लगभग सात दिनों की अवधि के बाद वापस ग्रह पर लौटेगा।

इस मिशन को, मिशन के पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पर वापस लाने की प्रवीणता की तरह,  इसरो द्वारा विकसित कुछ विशेष प्राथमिक सुविधाओं की आवश्यकता है। इस तरह की सुविधाओं के साथ अंतरिक्ष यान का निर्माण करने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पृथ्वी की तरह माहौल मिल सकता है। पिछले कुछ वर्षों से, अंतरिक्ष एजेंसी इन प्रौद्योगिकियों में से कुछ को विकसित करने में सफल रही है, लेकिन कई अन्य को अभी भी विकसित और परीक्षण किया जाना शेष है।

प्रक्षेपण यान: जीएसएलवी एमके -3

गगनयान मिशन के लिए एक प्रक्षेपण यान का निर्माण, जो सबसे महत्वपूर्ण था, पृथ्वी की निचली कक्षा में भारी पेलोड को पहुंचाने में सक्षम है। मिशन के लिए इसरो द्वारा एक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी एमके -3, जिसे अब एलवीएम -3 (प्रक्षेपण यान मार्क -3) कहा जाता है, विकसित किया गया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने सफलतापूर्वक 18 दिसंबर 2014 को एक प्रयोगात्मक उड़ान में इस प्रक्षेपण यान का परीक्षण किया। यह अंतरिक्ष में एक क्रू माड्यूल (चालक दल) में अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा और वापस पृथ्वी पर ले आएगा।

क्रू एस्केप सिस्टम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने क्रू एस्केप सिस्टम पर काम करते समय काफी सावधानी बरती है। इस यात्री बचाव प्रणाली का उद्देश्य अन्तरिक्ष यात्रियों को किसी संकट की स्थिति में बचाव सुविधा उपलब्ध कराना है। तंत्र यह सुनिश्चित करेगा कि क्रू मॉड्यूल में होने वाली किसी भी गड़बड़ी की पूर्व चेतावनी मिल सके।

जीवन समर्थन प्रणाली

पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस) यह सुनिश्चित करेगी कि क्रू मॉड्यूल के अंदर की स्थिति मनुष्यों के लिए सुविधाजनक हो। यह प्रणाली एक स्थिर केबिन के दबाव और वायु संतुलन को बनाए रखती है, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों को दूर करती है, तापमान, आर्द्रता और अन्य चीजों को नियंत्रित करती है।

अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण

शुरुआत में, बैंगलोर में एक अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी लेकिन इसको आकार नहीं दिया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अभी भी एक पूर्ण प्रशिक्षण सुविधा प्रदान करने की योजनाओं पर काम कर रहा है जहां इस मिशन के लिए चुने गए लोगों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। बेंगलुरू में स्थित भारतीय वायु सेना के एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उम्मीदवारों की लघुसूचीकरण प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।

प्रशिक्षण के तहत, चुने गए उम्मीदवारों को कम से कम दो साल तक प्रशिक्षित किया जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में रहने के लिए शून्य गुरुत्वाकर्षण और कई अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने जैसी चीजों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

 

 

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मिशन गगनयान: इसरो का एक मानव अंतरिक्ष मिशन
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गगनयान अभियान के साथ 2022 से, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष में अपने अंतरिक्षयात्री भेजेगा, जो 5-7 दिन अंतरिक्ष में बिताएंगे।