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सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

February 21, 2019
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भारत का लक्ष्य है कि वह इस सदी एक शक्तिशाली देश के रूप में जाना जाए। हालांकि, यह सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कि देश में सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के मुद्दों को संबोधित न किया जाए। सिस्टम को इतना प्रभावी बनाना होगा कि वह हमारी आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा कर सके। भारत में 10 लाख से अधिक स्कूल हैं, जहाँ लगभग 25 करोड़ छात्र पढ़ते हैं। अब तक, लगभग 40 प्रतिशत छात्र प्राइवेट स्कूलों में हैं। हालांकि, अगर 2025 तक मानक समान रहते हैं, तो 75 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूल का विकल्प चुनेंगे।

स्कूलों की जवाबदेही में सुधार

सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है, ताकि जवाबदेही के स्तर में सुधार हो सके। कुछ ऐसे राज्य हैं जहाँ बोर्ड परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन को केवल बेहतरीन कहकर सबसे अच्छा बताया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पंजाब में ऐसे स्कूल हैं जहां कोई भी छात्र 10 वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाया है। हिमाचल प्रदेश में अधिकांश छात्र 10 वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण करने में सक्षम हो जाते हैं, लेकिन केवल कुछ ही छात्र सम्मानजनक अंक प्राप्त कर पाते हैं। इन राज्यों की तुलना हरियाणा की स्थिति काफी बेहतर है लेकिन फिर भी, पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के प्रदर्शन में बहुत कम या कोई सुधार नहीं हुआ है।

समस्या की बात तो यह है कि इतने खराब प्रदर्शन के बावजूद सरकार ने इनमें से किसी भी स्कूल को बंद नहीं किया है। भारत की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में इस समय कोई जोखिम इनाम प्रणाली नहीं है और ऐसे में यह केवल शिक्षक पर निर्भर करता है कि वह छात्रों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना चाहता है या नहीं। यह शिक्षक के कर्तव्य के बजाय उसकी पसंद का मामला है, क्योंकि यह आदर्श रूप से होना चाहिए।

प्राइवेट निकायों के साथ सहयोग और भागीदारी

निजीकरण एक तरीका हो सकता है जिसमें भारतीय सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर अंतर को संबोधित किया जा सकता है। प्राइवेट इंटरप्राइसेज को हमेशा गुणवत्ता प्रदान करने की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें बाजार में बने रहने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार की भी आवश्यकता होती है। साथ ही उन्हें अपनी कीमतों के बारे में प्रतिस्पर्धी होना होगा। यदि स्कूल मूल्य और गुणवत्ता के मामले में ठीक नहीं हैं, तो वे ज्यादा टिक नहीं पाएंगे। ऐसे मामलों में माता-पिता अन्य विकल्पों को चुनते हैं। हालांकि इसके लिए तेजी से निजीकरण के नियमों की अनुमति देनी होगी।

रोजगार और कौशल पर ध्यान केंद्रित करना

बच्चों के पढ़ाई बीच में ही छोड़ने की उच्च दर गंभीर चिंता का विषय है। मुख्य कारण यह है कि छात्रों को लगता है कि ज्यादा पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें नौकरी तो मिलने वाली नहीं। यह विशेष रूप से उन छात्रों के लिए सच है जो कम आय वाले परिवारों से आते हैं। हालांकि, माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक अध्ययन शुरू करने से इस स्थिति को काफी हद तक संबोधित किया जा सकता है। रिटेल, नर्सिंग, हॉस्पिलिटी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है क्योंकि इनकी माँग बहुत अधिक है।

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सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता
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यहां ऐसे बिंदु हैं जो सरकारी स्कूल शिक्षा प्रणाली को बदलने और भारत के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।