Home / Government / सौभाग्य योजना के अंतर्गत 100 करोड़ के नगद पुरस्कार को लेकर जारी है संघर्ष

सौभाग्य योजना के अंतर्गत 100 करोड़ के नगद पुरस्कार को लेकर जारी है संघर्ष

October 17, 2018


सौभाग्य योजना के अंतर्गत 100 करोड़ के नगद पुरस्कार को लेकर जारी है संघर्ष

पिछले साल सितंबर में मोदी सरकार ने बिजली से वंचित ग्रामीण और शहरी भारतीय परिवारों को दिसंबर 2018 तक बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से सौभाग्य योजना की शुरूआत की थी। आज की तारीख में यह योजना 93 प्रतिशत भारतीय परिवारों तक अपनी पहुँच बनाकर अच्छी तरह से बिजली आपूर्ति कर रही है। जैसा कि सौभाग्य योजना की समाप्ति तिथि नजदीक है इसलिए सरकार ने देश के शेष बचे राज्यों में विद्युतीकरण प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाने का फैसला किया है। 15 अक्टूबर को, ऊर्जा मंत्रालय ने दिसंबर 2018 से पहले घर-घर तक बिजली पहुँचाने के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लेने वाले राज्यों को 100 करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

सरकार ने इस पुरस्कार योजना को केवल राज्यों तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि इन डिस्कॉम/राज्यों को बिजली आपूर्ति करने में लगे हुए कर्मचारियों को भी शामिल किया है। अगर इन कर्मचारियों ने निश्चित अवधि से पहले शेष भारतीय परिवारों में विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के कार्य को पूरा कर दिया तो उन्हें सामूहिक रूप से 50 लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। कर्मचारियों के बीच योजना के प्रति उनके असाधारण काम के लिए 50 लाख रुपये के पुरस्कार से, 20 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी। बिजली वितरण कंपनियों के 50 लाख रुपये के पुरस्कार में से 20 लाख रुपये कपंनी या बिजली विभाग की उस इकाई के कर्मचारियों को दिया जाएगा जिन्होंने यह सराहनीय कार्य किया है।

इस पुरस्कार योजना का हिस्सा बनने वाले राज्य

पुरस्कार योजना के दायरे में आने वाले राज्यों (विशेष श्रेणी स्थिति वाले राज्यों सहित) को निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है-

  • ऐसे राज्य जहां कम से कम पांच लाख परिवार बिजली के बिना रह रहे हों
  • ऐसे राज्य जहां पांच लाख से अधिक परिवार बिजली के बिना रह रहे हों

ये राज्य हैं- बिहार (98.11%), झारखंड (88.27%), पश्चिम बंगाल (98.26%), कर्नाटक (96.43%), राजस्थान (9 3.8 9%), छत्तीसगढ़ (98.31%), तेलंगाना (96.54%), उत्तराखंड (95.37% ), ओडिशा (89.66%), असम (80.56%), जम्मू-कश्मीर (9 0.81%), सिक्किम (92.72%), मेघालय (77.01%), मणिपुर (88.02%), मिजोरम (9 3.13%), नागालैंड (79.27% ) और अरुणाचल प्रदेश (75.77%)। ये आँकड़े इन राज्यों में बिजली पहुँचाने का  कार्य पूरा होने के प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पुरस्कार योजना के दायरे के बाहर राज्य

यहां कई ऐसे भारतीय राज्य हैं जो पहले से ही 100 प्रतिशत भारतीय परिवारों को बिजली पहुँचाने का लक्ष्य हासिल कर चुके हैं या अधिकतर 100 प्रतिशत अंकों को छुआ है, जो बहुत ही गर्व की बात है। ऐसे राज्यों को सरकार की पुरस्कार योजना से बाहर रखा गया है।

ये राज्य – गुजरात (100%), पंजाब (100%), गोवा (100%), आंध्र प्रदेश (100%), हरियाणा (99.61%), केरल (100%), तमिलनाडु (100%) और हिमाचल प्रदेश ( 99.46%) हैं।

हालांकि मध्य प्रदेश (99.78%) और महाराष्ट्र (99.64%) राज्य लगभग 100% भारतीय परिवारों को बिजली की आपूर्ति करने के कगार पर हैं, लेकिन उन राज्यों में उनकी गणना नहीं की गई है जो 100 करोड़ रुपये के पुरस्कार के लिए पात्र नहीं हैं।

निर्णायक शब्द

मौद्रिक पुरस्कार प्रदान करना निश्चित रूप से अनुमानित समय से पहले प्रत्येक भारतीय परिवार को विद्युतीकरण के कार्य को पूरा करने में लगे कर्मचारियों के साथ-साथ राज्यों की सरकार को प्रोत्साहित करने का एक अविश्वसनीय तरीका है। ऐसी पहलों को लाने से निश्चित रूप से कर्मचारियों और राज्य सरकारों के आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलेगा, और उनमें प्रतिस्पर्धात्मकता की भावना जागेगी। कौन होगा जो 100 करोड़ रुपए की इस पुरस्कार राशि के लिए अपना दावा पक्का कर पाएगा?

Summary
Article Name
सौभाग्य योजना के अंतर्गत 100 करोड़ के नगद पुरस्कार को लेकर जारी है संघर्ष
Author
Description
15 अक्टूबर को, ऊर्जा मंत्रालय ने दिसंबर 2018 से पहले घर-घर तक बिजली पहुँचाने के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लेने वाले राज्यों को 100 करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।