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विजय माल्या के फरार होने में दोषी कौन?

September 20, 2018
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विजय माल्या को देश से फरार कराने का दोषी कौन?

‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ विजय माल्या कानून को चकमा देकर तीन साल के लिए देश छोड़ कर भाग गया था, हालांकि अब वह भगोड़ा होने से इंकार कर रहा है। माल्या, जो 17 भारतीय बैंको का लगभग 9000 करोड़ रुपये का ऋणी है, वित्तीय धोखाधड़ी और काले धन को वैध बनाने के आरोपों के कारण इस समय जाँच के अधीन है। माल्या, जो विवादों को लेकर देश और देश के बाहर सुर्खियों में रहा, ने हाल ही में एक और विवादित मामला खड़ा कर दिया है।

माल्या 2016 में देश छोड़कर भाग गया था और तब से वापस नहीं लौटा। बड़े पैमाने पर हुए इन घोटालों के मामलों में राजनीतिक पार्टियाँ एक-दूसरे पर दोषारोपण के मौके को भुनाने से एक बार भी नहीं चूकीं। लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है – कि कैसे विजय माल्या बिना किसी की मदद के देश से भागने में सफल गो पाया? और अगर विजय माल्या को सहायता मिली भी, तो किससे?

9000 करोड़ रुपये का इतिहास

किंगफिशर एयरलाइंस, जो देश की दूसरी सबसे बड़ी कपंनी थी, के संस्थापक विजय माल्या ने अपनी एयरलाइंस के लिए पूरे भारत में अलग-अलग बैंको से ऋण लिया था जो अब जाँच के अधीन है। अपनी अध्यक्षता में उसने कई प्रमुख बैंकों से ऋण लिया। उदाहरण के लिए, किंगफिशर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का 1600 करोड़ रुपये का कर्जदार है।

दिलचस्प बात तो यह है कि जिस दिन विजय माल्या ने ब्रिटेन जाने के लिए (2 मार्च 2016)  देश छोड़ा था, उस पर सहायक बैंकों का कर्ज बकाया होने के कारण उसके खिलाफ ऋण बसूली अधिकरण जारी किया गया था। जिसके परिणामस्वरूप 6 दिन बाद बैंकों ने आधिकारिक तौर पर माल्या को देश छोड़ने से रोकने का अनुरोध सर्वोच्च न्यायालय में किया। साथ ही बैंकों ने किंगफिशर के चेयरमैन के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अनुरोध भी न्यायालय से किया था। अप्रैल 2016 में विदेश मंत्रालय द्वारा उसके पासपोर्ट को निरस्त कर दिया गया था। हालांकि उस समय माल्या विदेश में बसे अपने परिवार के पास जाने की इच्छा जाहिर करके एक महीने के लिए देश से बाहर चला गया था।

दो बार उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए संसद के एक स्वतन्त्र सदस्य के रूप चुने जाने वाले विजय माल्या को न्यायिक उपस्थिति के लिए कई बार समन भेजा गया, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। 2016 में माल्या ने, सांसद समिति की बैठक के समक्ष अपने निष्कासन की सिफारिश करते हुए, अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

क्या है मौजूदा हालात?

विजय माल्या इस समय ब्रिटेन में हैं जहाँ 12 सितंबर 2018 को उसे वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में पेश किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोपों में भारत द्वारा प्रत्यर्पण अनुरोध को चुनौती देने के लिए उसे कोर्ट में पेश होना पड़ा था। माल्या का कहना है कि उसने जेनेवा में होने वाली एक मीटिंग की वजह से देश छोड़ा था न कि आपराधिक इरादे से। ब्रिटेन की अदालत के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए उसने कहा कि “मेरा इरादा नेक है और (मैंने) करीब 15000 करोड़ रूपये की संपत्तियां कर्नाटक उच्च न्यायालय की मेज पर रख दी है।”

हालांकि, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का कहना है कि किंगफिशर के अध्यक्ष का इरादा आपराधिक था वह ऋण नहीं चुकाना चाहता था। इसके अलावा एजेंसी का यह भी कहना है कि उसके पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि माल्या ने उन क्षेत्रों में ऋण को विविधता से अलग कर दिया था जिसके लिए उसे शुरू में मंजूरी दी गई थी। हालांकि, 62 वर्षीय माल्या सभी आरोपों से इंकार करते हुए कहता है कि वह “राजनीतिक फुटबॉल” बन गया है। इस समय, यूके न्यायायिक प्रणाली उसके मामले की जांच कर रही है और उसके देश छोड़कर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसके लिए विजय माल्या को कोई परेशानी नहीं है, उसका कहना है कि उसका लगभग पूरा परिवार अब ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में रहने लगा है।

जुलाई 2018 में, माल्या के खिलाफ चल रहा मामला एक बार फिर पूरे बाजार में गर्मा गया, जब उन्होंने बैंकों को बकाया राशि चुकाने की अपनी इच्छा व्यक्त की। ज्यादातर लोगों के मुताबिक, यह सब देश में लागू हुए भाग्यशाली आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018 के कारण हुआ था। भारत में लागू किया गया बिल, अर्थशोधन निवारण अधिनियम, (पीएमएलए) किसी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने के लिए अदालत को अनुमति प्रदान करता है, जिसे एक भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया हो। इसलिए, माल्या के अचानक से “हृदय परिवर्तन” होने का कारण देश भर में अपनी संपत्तियों को जब्त होने से बचाने के प्रयास से ज्यादा और कुछ नहीं हो सकता है।

भागने की योजना और दोषारोपण का खेल

लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर कोर्ट में अपनी हालिया उपस्थित दर्ज कराते हुए विवादित विजय माल्या ने एक और विवादित बयान दे डाला कि वो देश से बाहर निकलते वक्त अरुण जेटली से मिला था। संवाददाताओं से पूछताछ पर माल्या ने एक संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि मैंने देश छोड़ने से पहले अग्रिम सूचना दी थी। “जेनेवा में होने वाली एक मीटिंग की वजह से मैंने देश छोड़ा था। मार्च 2016, जब वह आखिरी बार भारत में था, का जिक्र करते हुए माल्या ने कहा, ‘मैं मामला निपटाने को लेकर जेटली से मिला था। मैं बैंक का बकाया कर्ज चुकाने के लिए तैयार था। हालांकि इस बयान ने आम जनता, मीडिया के लोगों और राजनेताओं के बीच चर्चाओं की जोरदार लहर बना दी है। विपक्षी, विशेष रूप से कांग्रेस, आगे आकर माल्या को फरार कराने की योजना में भाजपा सरकार को सहयोगी बता रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हालिया मामले को लेकर प्रधानमंत्री से प्रत्यक्ष जाँच की माँग की है। उन्होंने वित्त मंत्री को त्यागपत्र देने के लिए कहा है। देश से विजय माल्या के भागने को लेकर मौजूदा सरकार सवालों के कटघरे में है। 2016 में, जब माल्या ने देश छोड़ा था, तो भाजपा सरकार सत्ता में थी और अरुण जेटली वित्त मंत्री थे।

विजय माल्या के लिए सीबीआई के लुकआउट सर्कुलर में बदलाव की वजह से भी विवादों को बढ़ावा मिला है। 16 अक्टूबर 2015 को दिनांकित पहले एलओसी में, उल्लेख किया गया था: “किसी भी नागरिक को भारत छोड़ने से रोको”। हालांकि 24 नवंबर 2015 को एक दूसरा एलओसी जारी किया गया, जिसमें कहा गया था कि माल्या को वापस भारत लाओ। इस पत्र में लिखे शब्दों के अनुसार “किसी भी नागरिक को देश में आने / जाने पर प्रवर्तक को सूचित करना शामिल था”। लगभग चार महीने बाद, विजय माल्या बहुत ही आसानी से देश छोड़कर चला गया और उसे वापस लाने के प्रयास अभी भी चल रहे हैं। अब सवाल उठाया जा रहा है, एलओसी क्यों बदल गया, कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से देश छोड़कर क्यों चला गया? जैसा कि यह घटना मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुई है इसलिए सरकार की आलोचना की जा रही है। कई लोगों को तो मौजूदा सरकार पर संदेह भी है क्योंकि कोई भी नागरिक बिना किसी की सहायता के देश नहीं छोड़ सकता।

बदले में, भाजपा ने भी कांग्रेस पर तीखे प्रहार करते हुए कहा है कि माल्या को इन सभी ऋणों के लिए मंजूरी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मिली थी, जिनमें से कई बैंक सार्वजनिक क्षेत्र से संबंधित हैं। इसलिए दोषी पूर्व सरकार है, खासकर जब किंगफिशर द्वारा जारी सिक्योरिटी ऋण राशि की तुलना में काफी अपर्याप्त थी।

निष्कर्ष

विपक्ष सरकार को दोषी ठहरा रहा है और सरकार कांग्रेस को दोषी ठहरा रही है, माल्या ने दोनों को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। उसका कहना है कि बैंकों की दूसरी बड़ी, गैर-व्यवसायी संपत्ति (एनपीए) के बावजूद उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उसके अनुसार, दोनों प्रमुख पार्टियां उन्हें पसंद नहीं करती हैं और इसलिए गलत तरीके से दोषी ठहराकर उसे फंसाया जा रहा है।

हालांकि दोषारोपण के खेल की प्रथा जारी है, न्याय केवल प्राथमिकता बनकर रह गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो अभी भी माल्या को वापस देश में लाने का प्रयास कर रहा है। सवाल यह है कि क्या यह ऐसा करने में सफल हो पाएगा?

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विजय माल्या का देश छोड़कर भागना – दोषी कौन?
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विवाद की एक नई लहर उठाते हुए, किंगफिशर के चेयरमैन विजय माल्या ने कहा है कि वह देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री, अरुण जेटली से मिले थे। चूंकि इससे देश में बहस का एक माध्यम मिल गया है, सवाल अभी भी खड़े होते हैं। माल्या ने कैसे किया देश छोड़कर भागने का प्रबंधन?