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जानिए भारत की जेलों के बारे में

February 18, 2019


जेल अपराधियों के सुधार का केंद्र हैं लेकिन इसके बारे में आम धारणा यह है कि यह सजा का एक साधन है। हालांकि, जेल मूल रूप से सुधार केंद्र है। ये जेल अधिनियम, 1894 और राज्य सरकारों के जेल मैनुअल द्वारा शासित है। जेलों का प्रबंधन राज्य सरकारों के क्षेत्र में भी आता है जो केंद्र सरकार की सहायता से जेलों की सुरक्षा, रहन-सहन, चिकित्सा सुविधाओं, बुनियादी सुविधाओं और आंतरिक विकास में सुधार के लिए काम करती हैं। भारत की जेलों का प्रशासन भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के तहत विषय 4 द्वारा कवर किया गया है। भारत में 8 तरह की जेलें हैं।

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सेंट्रल जेल – सेंट्रल जेल में उन कैदियों को रखा जाता है जिन्हें 2 साल से अधिक की सजा सुनाई जाती है। यह जेल उम्रकैद और जघन्य अपराध करने वाले लोगों के लिए हैं। इस प्रकार की जेल में व्यक्ति की नैतिकता और अखंडता को बहाल करने का प्रयास किया जाता है। अपराधी इस प्रकार की जेलों में मजदूरी करते हैं। सेंट्रल जेल में अन्य जेल की तुलना कैदियों को आवास प्रदान करने की बड़ी क्षमता है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 11 सेंट्रल जेलें  हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब और कर्नाटक में 9 सेंट्रल जेलें हैं और दिल्ली में 8 हैं। अरुणाचल प्रदेश और मेघालय जैसे राज्यों में कोई सेंट्रल जेल नहीं है। नेशनल रिकॉर्ड्स क्राइम ब्यूरो के अनुसार, भारत में कुल 134 सेंट्रल जेल हैं, जिनमें 1,59,158 कैदियों को रखने की क्षमता है। 2015 के आंकड़ों के अनुसार, सेंट्रल जेलों में 1,85,182 कैदी मौजूद हैं।

जिला जेल – जिला जेल और सेंट्रल जेल के बीच बहुत अंतर नहीं है। जिला जेल भारत के उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य जेलों के रूप में कार्य करती हैं जहाँ कोई सेंट्रल जेल नहीं होती हैं। भारत में कुल 379 जिला जेल हैं, जिनमें केवल 137972 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में, पूरे भारत में जिला जेलों में 180893 कैदी मौजूद हैं। कुछ राज्य जिनमें जिला जेलों की संख्या काफी अधिक है, उनमें शामिल हैं – उत्तर प्रदेश – 57, मध्य प्रदेश -39, बिहार – 31 और महाराष्ट्र में 28 जिला जेल हैं।

उप जेल – भारत में उप जेल उप-मंडल स्तर की जेलों की भूमिका निभाती हैं। जैसा कि ये न्यून विन्यास पर हैं, उनके पास एक बेहतर और सुव्यवस्थित जेल सेट-अप है। भारत में अन्य राज्यों की तुलना 9 राज्य हैं जिनकी उप-जेलों की संख्या अधिक है।  महाराष्ट्र में सबसे अधिक उप-जेल 100 हैं, इसके बाद आंध्र प्रदेश में 99 जेल हैं। तमिलनाडु में 96, ओडिशा -73, मध्य प्रदेश – 72, कर्नाटक -70 और राजस्थान में 60 हैं। कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उप-जेलें नहीं हैं। वे राज्य निम्नलिखित है- रुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम हैं। 46368 लोगों की क्षमता वाली कुल 741 उप-जेलें हैं। लेकिन वर्तमान में इन जेलों में 39989 कैदी रहते हैं।

महिला जेल – एनसीआरबी की रिपोर्ट में उपलब्ध नवीनतम जेल विश्लेषणों के अनुसार, भारत में कुल कैदियों में से लगभग 4.3% महिलाएँ हैं, जिनकी संख्या लगभग 17, 834 हैं। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, विशेष रूप से अलग महिला कैदियों के लिए जेल बनाई गई है। इन जेलों में महिला कर्मचारी शामिल हैं। देश में कुल 14 महिला जेलें हैं जिनमें 4748 कैदियों को रखने की क्षमता है। 2015 के एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में महिला जेलों में 2985 कैदी हैं।

ओपन जेल – इन प्रकार की जेलों का नाम असत्यवत सा लग सकता है लेकिन हाँ यह सच है। ओपन जेल वे हैं जिनमें कम से कम सुरक्षा है। राजस्थान जेल के नियमों की परिभाषा के अनुसार, ओपन जेलें बिना दीवारों, सलाखों और तालों की जेलें होती हैं। इस तरह की जेलों में कैदी कृषि जैसी गतिविधियों में लगे होते हैं और उन्हें अपने परिवार के लिए कमाने की अनुमति होती है। केवल उन्हीं कैदियों को खुली जेलों में प्रवेश दिया जाता है जो जेल में निर्धारित कुछ मानदंडों को पूरा करते हैं। ओपन जेलों के कैदियों को अच्छा व्यवहार रखने वाला माना जाता है। भारत में 17 राज्य हैं जिनमें 63 ओपन जेलें हैं और इनमें 5370 कैदियों को समायोजित करने की क्षमता है। वर्तमान में, 3789 कैदी इस प्रकार की जेलों में रहते हैं। 28 अगस्त, 1962 को केरल के तत्कालीन गृहमंत्री पी. टी. चाको ने नेट्टुकलथेरी (त्रिवेंद्रम के पास) में भारत की पहली ओपन जेल की शुरुआत की। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2017 में केंद्र को भारत में और अधिक ओपन जेल स्थापित करने का निर्देश दिया।

बोर्स्टल-शाला – बोर्स्टल एक प्रकार का युवा अवरोध केंद्र है। जो आमतौर पर भारत में बोर्स्टल-शाला के रूप में जाने जाते हैं। इस प्रकार की जेलों का उपयोग विशेष रूप से किशोर या नाबालिगों के कारावास के लिए किया जाता है। मूल रूप से, ये स्कूल युवा अपराधियों के कल्याण, देखभाल और पुनर्वास को सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। उन्हें जेल के माहौल से दूर रखा जाता है। बोर्स्टल स्कूलों में किशोरों को विभिन्न प्रकार की शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। बोर्स्टल स्कूलों में शिक्षा और प्रशिक्षण पर जोर दिया जाता है। साथ ही, अपराध की रोकथाम ऐसे स्कूलों का प्रमुख केंद्र है। भारत में केवल नौ राज्य हैं जैसे कि हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, और तेलंगाना जहां पर इस तरह के स्कूल हैं। भारत के किसी भी केंद्र शासित प्रदेश में बोर्स्टल स्कूल नहीं हैं।

विशेष जेल – विशेष जेल वे हैं जिनमें उच्च सुरक्षा है और आतंकवाद और उग्रवाद सहित हिंसक अपराधों के लिए दोषी लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। भारत में कुल 43 विशेष जेल हैं जिनमें 10915 कैदियों को रखने की क्षमता है। केरल में 16 विशेष जेल हैं जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे अधिक विशेष जेल हैं। महिला कैदियों को रखने का प्रावधान असम, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित विशेष जेलों में भी उपलब्ध है।

अन्य जेल – भारत में केवल तीन अन्य जेलें हैं – कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र। इन तीनों को छोड़कर भारत के किसी भी राज्य में कोई अन्य जेल नहीं हैं।

जेलों को मनुष्यों को केवल सजा देने के बजाय उन्हें सुधारने में मदद करनी चाहिए। समाज में सुधार तभी लाया जा सकता है जब अपराधियों को सुधार के लिए सही मौके दिए जाएंगे।

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भारत के जेलों का प्रशासन भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के तहत आइटम 4 द्वारा कवर किया गया है। भारत में 8 तरह की जेलें हैं। आगे जानिए भारतीय जेलों के बारे में।