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रानी पद्मावती कौन थीं? – तथ्य, कल्पना और किवदंती

November 14, 2017


रानी पद्मावती कौन थीं? - तथ्य, कल्पना और किवदंती

निर्देशक संजय लीला भंसाली की प्रसिद्ध रचना (फिल्म) पद्मावती में मुख्य कलाकार दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह हैं और संभावना की जाती है कि यह ऐतिहासिक फिल्म 1 दिसंबर 2017 को रिलीज होगी। इस फिल्म की लागत 200 करोड़ रुपए है। यह फिल्म काफी विवादों के घेरे में है और विभिन्न समूहों द्वारा इस फिल्म की आलोचनाएं भी की जा रही हैं। असल में, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने निर्देशक के खिलाफ हिंसा को अपनाते हुए, फिल्म की शूटिंग लिए बनाए गए सेट को नष्ट कर दिया था। हिंसा को धारण करने वाले प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मेवाड़ पूर्ववर्ती रियासतों के शाही राजा थे और इस फिल्म में राजपुताना अभिमान और विरासत का अपमान हुआ है। शाही परिवार का दावा है कि फिल्म में गर्व, सम्मान, सौंदर्य और बलिदान की प्रतीक रानी पद्मिनीया पद्मावती का ग़लत ढंग से चित्रण किया गया है। आइए अब हम रानी पद्मावती के बारे में जानें और इतिहास से मिथक को अलग करने का प्रयास करें।

पद्मावती कौन थी?

भंसाली की फिल्म का शीर्षक पद्मावती है, लेकिन जिस आधार पर इस फिल्म का निर्माण हुआ है, वह पद्मावती के जीवन से भिन्न है। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, चित्तौड़ के शासक रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मावती की भूमिका निभाती हैं। माना जाता है कि चित्तौड़ के किले में रानी पद्मावती ने दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की गिरफ्त और अपमान से बचने के लिए हजारों महिलाओं के साथ जौहर या आत्मदाह कर लिया था।

क्या रानी पद्मावती वास्तव में मौजूद हैं? क्या कोई ऐतिहासिक सबूत है, जो इन प्रसिद्ध कवियों द्वारा काल्पनिक कृतियों के अलावा इस कहानी की सत्यता को इंगित करते हैं? इस सवाल का जवाब यह है कि अधिकांश इतिहासकार भिन्न-भिन्न होते हैं। कुछ इतिहासकार जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के समय राजपुताना इतिहास का अध्ययन किया है वह दावा करते हैं कि पद्मावती के अस्तित्व की पुष्टि करने का कोई सबूत नहीं है। अन्य इतिहासकारों का दावा है कि साहित्य की प्रचुरता ही इस बात का सबूत है कि रानी पद्मावती अस्तित्व में है। उनका दावा है कि पद्मावती गुहिलों के राजा रतनसिंह (चित्तौड़ के राजा) की 15 वीं पत्नी थीं और राजा रतन सिंह (रतनसेन)को वर्ष 1303 में अलाउद्दीन खिलजी के साथ घेराबंदी का सामना करना पड़ा था। हालाँकि, कई लोग दावा करते हैं कि पद्मावती अस्तित्व में है, (लोकप्रिय साहित्यिक विवरणों के विपरीत) पद्मावती सिंहल द्वीप (श्रीलंका) की राजकुमारी नहीं थीं, लेकिन बीकानेर के आस-पास इनका जन्म हुआ था। हालाँकि बहस को व्यवस्थित करने वाला कोई भी ठोस सबूत मौजूद नहीं है।

जायसी की पद्मावत

अवधी साहित्य की सबसे बेहतरीन कृतियों के रचनाकार, सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत की रचना की है। माना जाता है कि यह महाकाव्य 1540 ईस्वी में लिखा गया था। जयसी ने पद्मावत में कहा है कि सिंहल साम्राज्य के राजा गंधर्वसेन की बेटी पद्मावती (पद्मिनी), पृथ्वी की सबसे सुंदर महिला थीं। पद्मावती ने एक बात करने वाला तोता पाल रखा था। किसी कारणवश वह तोता चित्तौड़ में पहुँच जाता है और राजा रतनसेन उस तोते को पाल लेते हैं। तोते द्वारा पद्मावती के बारे में करने वाले वर्णन को सुनकर ही, राजा पद्मावती के प्यार में पड़ जाते हैं और अपने राज्य को छोड़कर पद्मावती से शादी करने के लिए सिंहल जाते हैं। चित्तौड़ में वापस आने पर राजा रतनसेन की पत्नी नागमती पद्मावती को अपने प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और उससे काफी नफरत भी करती हैं। दूसरी ओर जादूगर राघव चेतन काली ताकतों का आह्वान करता है और इसलिए रतनसेन उसे राज्य से निर्वासित कर देते हैं। राघव चेतन बदला लेने की प्रतिज्ञा करता है और दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी से मिल जाता है।

अलाउद्दीन खिलजी की संगीतकारों की सभा में, राघव चेतन दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला पद्मावती के बारे सुल्तान को बताता है और उपहास करता है। खिलजी पद्मावती को देखने के लिए जाता है, लेकिन राजपूत द्वारा महिलाओं को अजनबियों से, अपनी सुरक्षा करने के दिए जाने वाले अभ्यास के कारण वह बैठक करने से वंचित रह गया जाता है। फिर वह एक चालाकी करता है और पद्मावती को देखने के लिए आई ने के प्रतिबिंब का सहारा लेता है। रानी की सुंदरता से मोहित होकर वह राजा को बैठक के लिए (दोस्ती करने के लिए) आमंत्रित करता है और राजा को बंदी बना लेता है। तब राजा रतनसेन को बहादुर राजपूत गोरा और बादल मुक्त करवाते हैं। क्रोध में आकर खिलजी चित्तौड़ को चारों तरफ से घेर लेता है और राजपूतों को हार का सामना करना पड़ता है, यह देखकर रानी पद्मावती 16,000 महिलाओं के साथ किले में आत्मदाह कर लेतीं हैं। रानी पद्मावती का आदर्श वाक्य -अपमान से पहले मौत -खिलजी और उसके सैनिकों से लड़ने वाले लोगों को प्रेरित करने का कार्य करता था। इसलिए रानी पद्मावती राजपुताना बहादुरी और सम्मान का एक चमकता हुआ उदाहरण मानी जाती हैं।

एक तरफ जहाँ हम रानी पद्मावती के ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में अनिश्चित हैं, तो दूसरी तरफ फिल्म पद्मावती के विवादों ने एक और राजनीतिक स्वर गुंजाय मान करना शुरू कर दिया है। हरियाणा, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों के विभिन्न भाजपा मंत्री ऐतिहासिक तथ्यों का गलत तरीकों से प्रस्तुतीकरण करने और खिलजी और रानी पद्मावती के बीच रोमांस (प्रेमलीला) का सुझाव देने के लिए निर्देशक की आलोचना कर रहे हैं। फिल्म के निर्देशक और मुख्य कलाकारों ने जनता को आश्वासन दिया है कि फिल्म में तथ्यों का कोई गलत ऐतिहासिक प्रस्तुतीकरण नहीं किया गया है, लेकिन समीक्षक फिर भी शांत रहने के लिए तैयार नहीं है।