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भारत के द्रविड़ कौन थे?

February 19, 2018


भारत के द्रविड़ कौन थे?

कुछ लोग दावा करते हैं कि द्रविड़ मूलतः भारत के उत्तरी भाग में रहते थे और बाद में आर्यों द्वारा इन्हें देश के दक्षिणी भाग में रहने के लिए बाध्य किया गया था। इसलिए भारत में लगभग 28 प्रतिशत द्रविड़ हैं और दक्षिण भारत में रहने वाले द्रविड़ अपनी मुख्य भाषा द्रविड़ के साथ-साथ तमिल, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ और तुलु का भी प्रयोग करते हैं। द्रविड़ भाषा के तीन उपसमूह हैं, अर्थात् उत्तरी द्रविड़, केन्द्रीय द्रविड़ (मध्य भारत में रहने वाले) और दक्षिणी द्रविड़ हैं। वर्तमान भारत में, द्रविड़ों की 28 प्रतिशत जनसंख्या आंध्र प्रदेश, कर्नाटक केरल और तमिलनाडु राज्य में निवास करती है और शेष 72 प्रतिशत आर्य उत्तर भारत में रहते हैं। दक्षिण और उत्तरी भागों की विविधता के कारण इनकी मूल भाषाओं में भी अंतर देखने को मिलता है। हम भारत में रहने वाले द्रविड़ों के बारे में बहुत कम जानते हैं, क्योंकि यह ईरान और दक्षिणी रूस के आर्यों द्वारा उत्तरी भारत पर हमला करने से पहले देश में रहा करते थे।

कुछ भाषाविदों का यह मानना है कि द्रविड़ लोग पूरे भारतीय उप महाद्वीप में निवास करते थे और इसी वजह से सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा और मोहन जोदड़ों) को द्रविड़ सभ्यता के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन क्या सिंधु घाटी सभ्यता द्रविड़ सभ्यता है या नहीं, यह अभी भी विवादास्पद मसला बना हुआ है।

वर्तमान में मध्य भारत में रहने वाले द्रविड़ लोग आदिवासी हैं, जिन्हे गोंड जनजाति के नाम से जाना जाता है और कन्नाडिगरु द्रविड़ कर्नाटक, उत्तरी केरल, दक्षिणी महाराष्ट्र और उत्तरी-पश्चिमी तमिलनाडु में निवास करते हैं। जब कि कोंधा द्रविड़ आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के पूर्वी भारतीय राज्यों में रहते हैं और कोडवास द्रविड़ कर्नाटक और उत्तरी केरल में निवास करते हैं। इसके अलावा कुरुख, मलयाली, तमिल, तेलुगु और तुलुवास लोग भारत के द्रविड़ समुदाय से संबन्धित हैं।

द्रविड़ वास्तव में शांतिप्रिय किसान थे और वे किसी भी प्रकार की युद्ध कला में प्रवीण नहीं थे। ऐसा माना जाता है कि जब आर्यों ने भारत पर आक्रमण किया, तो उन्होंने द्रविड़ों को दक्षिणी भाग में रहने का आदेश दिया, जैसा कि आर्य कुशल योद्धा थे और वह हथियारों और रथों को बनाने में भी प्रवीण थे। दूसरी तरफ द्रविड़ों के पास बहुत विवेकपूर्ण संस्कृति थी और वह पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों जैसे सभी जीवन-दायनी स्वरूपों की पूजा करते थे। आर्यों के आने के साथ ही स्वर्ग की अवधारणा और भगवान के अस्तित्व का पता चला, जिसने समाज को नाटकीय रूप से बदल दिया।

द्रविड़ों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए केवल पुरातात्विक और भाषाई अध्ययन ही उनके बारे में जानकारी का मुख्य स्त्रोत है। द्रविड़ लोग काले रंग, गहरे काले बाल व आँखों और चौड़े माथे वाले थे। संरचनात्मक समानता के कारण, यह भी माना जाता है कि द्रविड़ अफ्रीकी मूल के हैं। मानवविज्ञान और आनुवांशिक विवरण के अनुसार, इन लोगों ने अफ्रीका को छोड़ दिया था और यह करीब 50,000 साल पहले दक्षिणी मार्ग से होकर दक्षिण भारत आ गए थे। भारत की नदियों और उपजाऊ मिट्टी के कारण वे दुनिया के बाकी हिस्सों की अपेक्षा यहाँ ही अधिक संख्या में निवास करने लगे थे।

लेकिन यहाँ कई सिद्धांत और अध्ययन जैसे अफ्रीका से उनका संबंध, आर्य आक्रमण और दक्षिण भारत में द्रविड़ों का प्रवास द्रविड़ों के मूल की व्याख्या करते हैं। लेकिन सभी सिद्धांतों का निष्कर्ष यह है कि द्रविड़ बहुत ही उत्तम और कुशल प्रजाति वाले थे।