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एक अच्छे माता पिता कैसे बनें?

August 28, 2018
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एक अच्छे माता पिता कैसे बनें?

जॉन स्टीनबेक ने कहा, “शायद बच्चों की उन्नति करने में माता पिता का हाथ होता है …” और ऐसी ही संभावना जतायी जाती है-जोकि उचित है।

आधुनिक दिनों में बच्चे एक कैंडी बार जाने को लेकर किए गए वादे की जिद नहीं करते, बल्कि वे बाहर जाने की तुलना में कंप्यूटर पर गेम खेलना पसंद करते हैं , वे अपने किशोरावस्था से पहले दुर्व्यवहार वाले तरीके अपनाने लगते हैं। संक्षेप में कहें तो,वे सब कुछ करते हैं जो उनके माता-पिता उन्हें संस्कार का हवाला देकर छोड़ देते हैं। तो कैसे, क्या कोई एक अच्छे माता-पिता बनने की कला में निपुण हो गया है। आपको सुनिश्चित करना है कि अपने बच्चे की उचित परवरिश हो रही है और कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आपसे नफरत करता है? वास्तव में, यह मुद्दा पेचीदा है।

यहां, हम आपको एक कमजोर बंधन के साथ “डू इट योरसेल्फ” के मार्गदर्शन में एक अच्छे माता-पिता कैसे बनें, बता रहे हैं।

1.व्यक्तित्व- आपके पास भी अपना जीवन है

जैसे ही “भारतीय अभिभावक”वाक्यांश सुनाई देता है तुरंत कड़ी मेहनत से परवरिश करने वाले माता-पिता की एक तस्वीर चित्रित होती है,जिसे अधिक प्रयास करते हुए देखा जाता है, मुख्य रूप से यह एक त्याग करने वाला व्यक्ति होता है। संभावना है, अगर आप भी एक माता-पिता हैं, तो आपने भी अपने बच्चों के लिए उचित बलिदान दिया होगा; अपने बच्चों के लिएकुछ व्यक्तिगत सपने देखे होंगे जिनका भी आपने त्याग किया होगा। समस्या यह नहीं है कि आप अपने बच्चों की खुशहाली की परवाह करते हैं, लेकिन आप इसे अपने आप खो देते हैं।

भारत में, माता-पिता को परोपकारी व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो अपने बच्चों की उन्नति करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ते हैं, यहां तक कि अपनी खुशियों को भी बलिदान कर देते हैं।व्यक्तिगत पहचान से लेकरअसफल होने के तक, यह बच्चों पर जबरदस्त दबाव भी डालते हैं। अंत में, वे खुद को उन विकल्पों के साथ पाते हैं जो वे कभी नहीं बनाना चाहते थे। क्यों? क्योंकि तर्क वितर्क करने का मतलब उन माता-पिता को परेशान करना होगा जिन्होंने अपने बच्चों को आराम पहुँचाने के लिए अपना सब कुछ त्याग कर दिया। हमारे देश में तर्क प्रचलित होने के अलावा दूर तक फैला हुआ है जो अभी भी घातक सिद्ध होता है।

2-महत्वाकांक्षाओं को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है

माता-पिता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि आप अपने सपनों के लिए अपने बच्चों को मजबूर न करें। इतने सारे बच्चे अपनी कर्तव्यनिष्ठा से मेडिकल लॉ आदि के क्षेत्र में अध्ययन कर रहे हैं, भले ही वह कुछ बन न पाएं। माता-पिता के रूप में, लोग आमतौर पर सोचते हैं कि वे बड़े हैं और वो खुद निर्धारित करेंगे कि उनके बच्चों के लिए सबसे सही क्या है। जबकि कुछ अन्य माता पिता अपने बच्चो कोउनके सपनों को खुदतय करने का मौका देते हैं,वे स्वयं चाहते हैं कि वह अपने जीवन का अनुभव करें, भले ही वह इसमें प्रत्यक्ष रूप से माहिर न हों। लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों औरउनके जीवन के बीच के दायरे को पहचानने की जरूरत है। अपने बच्चों के कंधों पर अपने अधूरे सपनों को डाल देना पूरी तरह से गलत है,इसलिए वह अपना खुद का रास्ता तय करने के लिए इन बातों को गलत ठहराते हैं।

3.पीढ़ी के अंतराल के आसपास अपना रास्ता स्वीकार करें और बनाएं

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगता है, पीढ़ी का अंतराल व्यापक और भी व्यापक होता चला जाता है। माता-पिता और बच्चे एक-दूसरे को थोड़ा कम समझना शुरू कर देते हैं और दूरियाँ गहरी होती चली जाती है। क्यों?क्योंकि वे अलग-अलग पीढ़ी के हैं। जिसमें एक के लिए कुछ सामान्य और सहीहै, तो दूसरे के लिए वही चीज अरुचिकर है।

उदाहरण के लिए, अधिकांश भारतीय माता-पिता अपने बच्चों का डेटिंग और रिलेशनसिप में रहना बंद करवा देते हैं लेकिन मानक हजार साल या जेनरेशन जेड के बच्चों के लिए कुछ हद तक स्थापित तथ्य है।ऐसे ही कई अन्य उदाहरण भी हैं, कई माता-पिता के लिए यह पता लगाना कि बच्चों को कितनी स्वतंत्रता देना “सही” है एक मुश्किल काम बन जाता है। अलग-अलग समयावधि के संबंध में, पहले उन्हें इस तथ्य को प्रस्तुत करना होगा कि वे हमेशा अपने बच्चों को समझने में सक्षम होंगे। अगला कदम विभिन्न पीढ़ियों के बीच एक सामंजस्य स्थापित करना जरूरी है।

4.व्यक्तिगत फासला और स्वतंत्रता

अक्सर अपने बच्चों के करीब आने के प्रयास में, माता-पिता जाने-अनजाने में कुछ सीमाओं को खत्म कर देते हैं। हाँ, सीमाएं। हालांकि, अपने बच्चों के साथ घनिष्ठ बंधन, प्रेमपूर्ण बंधन रखना महत्वपूर्ण है, उसी समय उनकी व्यक्तिगत फासला का सम्मान किया जाना चाहिए।

पश्चिमी दुनिया इस “व्यक्तित्व” प्रचार जीवनशैली से काफी परिचित है। हालांकि, भारत को इस तथ्य को सहने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है कि एक निश्चित उम्र के बाद, एक बच्चा पूरी तरह से वयस्क होने पर कम से कम कानूनी रूप से अपने जीवन के मामलों को चुनने का पूरी तरह से हकदार है। एक माता-पिता के रूप में, अपने कदम पीछे हटाने की बजाय आपको एक नियमित अभ्यास करना चाहिए, और देखें कि यदि आप अपने बच्चे को उचित जगह (स्पेस) दे रहे हैं तो उसे भी आगे बढ़ने की जरूरत है। बच्चे की अनुमति के बिना उसकी व्यक्तिगत चीजों में जासूसी करना आपका अच्छा व्यवहार नहीं कहलाएगा, जिसके कारण आपका बच्चा आप पर से अपना विश्वास खो सकता है।

5.सामान्य जोखिम व्यवहार को आपको शीघ्र रोकना चाहिए

हमारी संस्कृति और माहौल परिभाषित करता है कि हमारे लिए “सामान्य” का क्या मतलब है।इसकी वजह यह है किहमारी सामान्य जीवनशैली में विषाक्त आदतें हमें महसूस हुए बिना ही शामिल हो जाती हैं। नियमित रूप से भारतीय परिवार में, आमतौर पर ऐसे कई भयसूचक चिन्ह होते हैं जिन्हें हम नजरअंदाज कर रहे हैं। यदि आप स्वयं नीचे दी गई सूचीबद्ध चीजों में से या इन्हीं के समान कोई भी कर रहे हैं तो यह आपके लिए अपने, विचारों और भावनाओं का परीक्षण करने का समय हो सकता है।

 

  • बच्चों के कमरे इत्यादि के माध्यम से संबंधित चीजें जैसे कंप्यूटर में प्राइवेशी, डायरी, आदि कोउनकी अनुमति के बिना छूना।
  • खुलकर चर्चा करने के बजाए ताने कसने और टिप्पणियों के माध्यम सेअसंतोष व्यक्त करना।
  • अपने बच्चों की अन्य लोगों के साथ तुलना करना।
  • तर्कों में अमानवीय शब्दों का प्रयोग करना, जाने-अनजाने में उनके आत्मविश्वास को कम करना। उदाहरण के लिए”आप बेकार हैं” जैसे वाक्यांश बहुत हल्के दिखाई देते हैं, लेकिन इसके हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं।
  • अपने लाभ के लिए बच्चे की वित्तीय और भावनात्मक निर्भरता का उपयोग करना। उदाहरण के लिए, माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को अपनी पसंद के विकल्पों को चुनने के कहते हैं और भावनात्मक तरीके से उन्हें ब्लैक मेल करते हैं, जिनसे वे सहमत नहीं होते।

 

  • अपनी खुशी के लिए अपने बच्चों को जिम्मेदार बनाना। बच्चों से परिवार में प्रसन्नता का माहौल लाने के लिए कहा जाता है। हालांकि, अपनी खुशी और संतुष्टि की ज़िम्मेदारी को उनमें स्थानांतरित करना – सीधे या परोक्ष रूप से उनके कंधे पर डालना जो अत्यधिक गंभीर है और जिस तरह से वे अपने जीवन का नेतृत्व करते हैं उन्हें प्रभावित करता है।
  • उनकी हर इच्छा को पूरी करना।

निष्कर्ष

अक्सर, नियंत्रण और ‘बच्चे की उन्नति’ के क्रम को समझना  बहुत अस्पष्ट हो जाता है।

“वे आप के माध्यम से आते हैं लेकिन आप से नहीं।

और यद्यपि वे आपके साथ हैं फिर भी वे आपके नहीं हैं। ”

-कहलिल गिब्रा

सार यह है किअच्छे माता-पिता बनना काफी मुश्किल होता हैऔर इसे सही करने के लिए एक दिन से अधिक समय लगता है। आप गलतियां करते हैं, आप निराश हो जाते हैं, लेकिन आप उनसे कैसे सीखते हैं इस बात से दुनिया में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। अपने बच्चों को परिपक्व होने के लिए, बेहतर व्यक्तियों को उनके आस-पास की दुनिया के साथ विकसित होने की निरंतर प्रक्रिया अपनाएं। जितना बेहतर आप करेंगे, दुनिया के लिए आपका संदेश उतना ही याद रखने योग्य होगा।

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माता पिता बनना(पेरेंटिंग) कभी आसान नहीं होता है, खासकर तब जब बात आधुनिक दिन के बच्चों की हो। यहां, हम आपको एक कमजोर बंधन के साथ "डू इट योरसेल्फ" के मार्गदर्शन के साथ एक अच्छे माता-पिता कैसे बनें, बताया गया है।