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सेना दिवस विशेष: वीरता पुरुस्कारों पर एक परिचय

January 11, 2018


सेना दिवस विशेष: वीरता पुरुस्कारों पर एक परिचय

भारत में सेना दिवस, प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को भारतीय सेना के एक ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाया जाता है। इस सेना दिवस का आयोजन भारत के लेफ्टिनेंट जनरल कोडंडेरा मडप्पा (केएम) करिअप्पा को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया था। संयोग से, ऑफीसर करिअप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ भी थे। सेना दिवस का यह अवसर प्रत्येक वर्ष आर्मी कमांड के मुख्यालय में मनाया जाता है। सेना दिवस का यह समारोह नई दिल्ली में सैन्य शो के साथ आयोजित किया जाता है। इस वर्ष सेना दिवस 70 वें संस्करण के रूप में मनाया जा रहा है।

सेना दिवस का महत्व

भारतीय सेना दिवस भारत के उन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और सलामी देने के उद्देश्य से मनाया जाता है, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के रूप में, ब्रिटिश सेना के एक जनरल ‘रॉय बुचर’भारतीय अधिकारी के.एम. करिअप्पा के साथ इस आयोजन को करने में सफल रहे। पिछले कुछ वर्षों में, भारत के सैनिक हमेशा, प्राकृतिक आपदाएं हों या देश की सुरक्षा खतरे में हो तो देश की इन सब समस्याओं को पूरा करने के लिए हमेशा उत्तरदायी रहे हैं।

कैसे मनाया जाता है सेना दिवस?

15 जनवरी को सेना दिवस का यह समारोह सामान्य रूप से नई दिल्ली के इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति में भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करके शुरू किया जाता है। शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के बाद सैनिक परेड और सैन्य शो का आयोजन करते हैं। सैनिकों की इस परेड और शो में वे अपने जौहर तथा कार्यक्षेत्र की शक्तियों का प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं। इस दिन सेना पदक और यूनिट क्रेडेंशियल्स (व्यक्ति की प्रामाणिकता) जैसे वीरता पुरुस्कार प्रदान किए जाते हैं।

भारतीय सैन्य वीरता पुरुस्कार

भारत के सैनिकों को दिए गए वीरता पुरुस्कारों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है – युद्ध के समय वीरता पुरुस्कार और शांति के समय वीरता पुरुस्कार। युद्ध के समय वीरता पुरुस्कार – जब सैनिक दुश्मन का सामना कर रहा हो, तो उस समय युद्ध के मैदान में उनके द्वारा दिखाई गई वीरता और निर्भयता के लिए यह पुरस्कार प्रस्तुत किया जाता है। महत्व के अनुसार क्रम में क्रमबद्ध तीन पुरुस्कारों को परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र को स्थान दिया गया है। परमवीर चक्र वीरता पुरुस्कार का सर्वोच्च रूप है। इस वीरता पुरुस्कार की शुरुआत 26 जनवरी 1950 को की गई थी। अब तक, सेना के 20 सैनिकों और नौसेना से एक सैनिक को यह पुरुस्कार प्राप्त हुआ है।

जब बॉर्डर पर इस तरह का ऐसा कोई युद्ध नहीं होता है, तब शांति के समय वीरता पुरुस्कार साहस दिखाने के लिए प्रदान किया जाता है। सामान्य तौर पर इन पुरुस्कारों को काउंटर विद्रोही ऑपरेशन के काम के दौरान दिखाई गई वीरता के लिए प्रस्तुत किया जाता है। इस श्रेणी में पुरस्कार के महत्व के क्रम में तीन पुरुस्कारों अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र को शामिल किया गया है। अशोक चक्र सर्वोच्च पुरुस्कार है। अशोक चक्र सर्वोच्च पुरुस्कार नागरिक को सम्मानित करने या फिर मरणोपरांत भी दिया जा सकता है। यह पुरुस्कार परमवीर चक्र की सर्वोच्चता के बराबर है, आज तक सिर्फ 58 लोगों ने इस पुरुस्कार को प्राप्त किया है।