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भारत के पिछड़े राज्यों में विकास की आवश्यकता

December 21, 2017
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भारत के पिछड़े राज्यों में विकास की आवश्यकता

भारत दुनियाभर में तीसरा ऐसा देश है, जिसके राज्य अभी विकास जैसे मामलों से वंचित हैं। हालाँकि यह अजीब है कि भारत के कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जो कि काफी विकसित हैं और अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में हैं। भारत के विकसित राज्यों के उदाहरण में पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु,पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। हालाँकि, कुछ राज्यों की स्थिति बहुत ही शोचनीय है। यह अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि सभी देशों में विकास का स्वरूप असमान है। देश के राज्यों ने पहले यूरोपियन कालोनियों (उपनिवेश) को प्राप्त करने पर जोर दिया और अब प्रगति के पथ को चित्रित करने की कोशिश करते हुए, विनाशकारी परिणाम वाले शासन-काल के साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है? कुछ स्तर पर इसे दोषपूर्ण नीति निर्माण और संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा समान रूप से गरीबी कार्यान्वयन के लिए विभाजित किया जा सकता है। भारत जैसा देश एक वैश्विक शक्ति होने की आकांक्षा रखता है, लेकिन यह आदर्श स्थिति में नहीं है।

रघुराम राजन समिति की रिपोर्ट

वर्ष 2013 की रघुराम राजन समिति की रिपोर्ट द्वारा सूचित किया गया कि भारत के चार सबसे पिछड़े राज्य बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड हैं। ओडिशा को अभी भी भारत का सबसे पिछड़ा राज्य माना जाता है। उसमें यह भी कहा गया था कि गुजरात भारत के कम विकसित राज्यों में से एक है। हाल ही के दिनों में, खासकर जब नरेंद्र मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री बने, तब से गुजरात ने शहरीकरण के मामले में काफी प्रगति की है। इसके बावजूद भी यह राज्य विकास के मामले में भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निचले पायदान पर पाया गया। तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ने मई 2013 में इस समिति का गठन किया था। इस संदर्भ में, हमें यह भी याद रखने की जरूरत है कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्रमोदी जी ने अपने भाषण के दौरान, गुजरात के विकास मॉडल का पालन करने की अपनी इच्छा जाहिर की थी।

रघुराम राजन ने पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में देश सेवा की और वर्तमान में वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर हैं। समिति को सौंपी जाने वाली मुख्य जिम्मेदारी, विभिन्न विकास सूचकांक के आधार पर राज्यों को विभाजित करना था। रिपोर्ट से प्राप्त निष्कर्षों के अनुसार, राष्ट्रीय सरकार द्वारा संबंधित राज्यों को धन आवंटित किया जाना था। उस समय, इस रिपोर्ट ने भारत के गोवा, तमिलनाडु और केरल को सबसे अधिक विकसित राज्य घोषित किया था। वास्तव में, गोवा इन सब में सबसे शीर्ष पर है।

इस सूची में पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा भी शामिल हैं और यह राज्य विकास की अपेक्षाकृत उचित स्तर हासिल कर चुके हैं। सूची के जरिए एक नया सूचकांक भी तैयार किया गया है, जिसमें यह निर्धारित किया जाएगा कि एक राज्य कितना पिछड़ा है और इसके बदौलत राष्ट्रीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करने में आसानी होगी कि राज्य को कितनी सहायता की आवश्यकता है।

एक राज्य कैसे पिछड़ा माना जाता है?

कोई राज्य पिछड़ा है या नहीं, यह निर्धारित करने के कई कारक हैं। रघुराम राजन समिति ने कई कारकों को ध्यान में रखकर, उक्त सूचकांक प्रस्तुत करने के लिए उन्हें समान महत्व दिया। जो नीचे प्रस्तुत हैं:

  • महीने भर में प्रति व्यक्ति द्वारा उपभोग की गई व्यय
  • महिला साक्षरता
  • शिक्षा
  • जनसंख्या का प्रतिशत, जिसे अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है
  • स्वास्थ्य
  • शहरीकरण की दर
  • घरों में उपलब्ध सुविधाएं
  • वित्तीय समावेश का स्तर
  • गरीबी दर
  • शारीरिक संयोजकता

मानव विकास सूचकांक (एचडीआई)

मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) ऐसे ही कई सूचकों में से एक है, जिसका उपयोग हम किसी भी राज्य या किसी विशेष क्षेत्र की विकासात्मक स्थिति का पता लगाने के लिए कर सकते हैं। 0.899 और 0.849 के बीच का एचडीआई बहुत ही उच्च विकास वाले स्तर को इंगित करता है। जबकि 0.549 और 0.799 के बीच का एचडीआई मध्यम स्तर वाले विकास का संकेत करता है। 0.250 और 0.499 के बीच की गिनती का एचडीआई निम्न स्तर के विकास का संकेत करता है। यह ध्यान देने की जरूरत है कि पूरे भारत को एचडीआई के निम्न स्तर वाले देश के रूप में जाना जाता है। वास्तव में भारत का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है, जो उच्च स्तर वाले एचडीआई का संकेत करता है। केरल, संपूर्ण पूर्वोत्तर क्षेत्र, दिल्ली, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा, हरियाणा और पंजाब भी एचडीआई के मध्यम स्तर वाली सूची में शुमार हैं, जबकि शेष सभी राज्य कम स्तर वाले एचडीआई में शामिल हैं। शायद यह महत्वपूर्ण है कि सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों का संचालन करती है और कृषि जैसे क्षेत्रों को भी दृढ़ता प्रदान करती है और देश के ज्यादातर लोग इन विनिर्माण रूपी क्षेत्र में काम करते हैं।