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झंडेवालान् मंदिर: नई दिल्ली

January 11, 2018


झंडेवालान् मंदिर

झंडेवालान् मंदिर दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह माँ दुर्गा का अवतार मानी जाने वाली देवी आदि शक्ति का बहुत प्राचीन मंदिर है, जो हिंदू धर्म की माँ काली के साथ स्त्री शक्तिका सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। झंडेवालान् मंदिर करोल बाग के मार्ग पर मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित है। यह मंदिर सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और यह मंदिर भी अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की तरह ही हर साल बहुत से भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। मंदिर को झंडेवालान् नाम शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान प्रार्थना झंडे (हिंदी में झण्डा) से मिला था।

मंदिर की पौराणिक कथाएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में झंडेवालान् स्थान एक पहाड़ी क्षेत्र था। हालाँकि, जब लोगों ने उस स्थान को खोदा, तो वहाँ पर उन्हें देवी की एक पवित्र मूर्ति प्राप्त हुई थी, जो वर्तमान समय में उस स्थान पर एक मंदिर की स्थापना करने का मुख्य कारण साबित हुई। यह भी कहा जाता है कि आज के दिन जिस मूर्ति का दर्शन करने लोग यहाँ आते हैं उसके आधार की संकल्पना मातारानी के भक्तों में से सबसे प्रमुख भक्त बद्री के स्वप्न में आईं एक देवी ने की और उसके तुरन्त बाद अपने निर्धारित स्थान यह मंदिर बनवाया गया।

हिंदू धर्म में महत्व

झंडेवालान् मंदिर, हिंदुओं से संबंधित पौराणिक देवता व अन्य देवी – देवताओं के मंदिरों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर सभी भक्तों के लिए खुला है, किसी व्यक्ति की सामाजिक – आर्थिक स्थिति या जाति जैसे नियमों के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव नहीं करता है। मंदिर में हरदिन कुछ विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है, जिन्हें वहाँ से गुजरने वाले लोग ध्यानपूर्वक सुनकर याद भी कर सकते है। इस प्रकार यह मंदिर कुछ अलग प्रकार का स्वाभाविक अनुभव कराता है।

मंदिर में मनाये जाने वाले त्यौहार

मंदिर में कई त्यौहार मनाए जाते हैं। नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजन का आयोजन किया जाता है। इन दिनों मंदिर को दीपक और फूलों से सजाया जाता है।

आरती का समय

मंदिर में आरती की शुरुआत करने का समय अलग-अलग है – जो मौसम के आधार पर बदलता रहता हैं। दिन के प्रारम्भिक चरण में सुबह 5:30 पर की जाने वाली आरती को मंगल आरती कहा जाता है। इस समय सूखे मेवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। दूसरी आरती को श्रृंगार आरती कहा जाता है, जो सुबह 9:30 बजे शुरू होती है। इस मंदिर में दिन की तीसरी आरती दोपहर 12:00 बजे होती है। इस समय प्रसाद के रूप में केला, दूध, नारियल (नट), चना, रोटी (भारतीय ब्रेड) तथा दालें भी चढ़ाई जाती हैं। शाम की आरती का आयोजन 7:30 पर किया जाता है। रात की आरती रात्रि 10:00 बजे शुरू होती है। जिसमें प्रसाद के रूप में केवल दूध चढ़ाया जाता है। सर्दियों के मौसम के दौरान आरती की शुरूआत सुबह 6 बजे की जाती है, जिसे गर्मियों की अपेक्षा में कुछ देर का समय माना जाता है। गर्मियों के समय में अंतिम आरती अपने निर्धारित समय के आधे घंटे पहले की जाती है।

भक्तों के लिए मंदिर कब खोला जाता है?

आमतौर पर, यह मंदिर सप्ताह में दो दिन खुलता है – मंगलवार और रविवार। इस के अतिरिक्त अष्टमी के दिन यह मंदिर दोपहर के बाद खुलता है। शुक्लपक्ष में अष्टमी तिथि को विशेष जागरण (रात के समय में प्रार्थना) का आयोजन किया जाता है और रात्रि 10 बजे से प्रार्थना आरम्भ कर दी जाती है। हालांकि, मंदिर में हर सुबह कीर्तन, प्रार्थना और हवन या यज्ञ का आयोजन भी किया जाता है। लोगों को प्रार्थना कक्ष में तस्वीरें खीचनें की इजाजत नहीं है।