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जानिए दिल्ली सिग्नेचर ब्रिज के बारे में

November 6, 2018
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जानिए दिल्ली सिग्नेचर ब्रिज के बारे में

4 नवंबर 2018 को सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन होने के बाद यह कई कारणों से सुर्खियों में रहा है। यह देश का पहला असममित केवल-संरक्षित पुल है, इसे पूरा होने में करीब 14 साल से अधिक का समय लगा है। सिग्नेचर ब्रिज का प्रस्ताव वर्ष 1998 से रखा गया था और तब से इसके निर्माण में कई बाधाएं सामने आईं। सिग्नेचर ब्रिज अब पूर्वी दिल्ली को वजीराबाद से जोड़ देगा, शहर के उत्तर और पूर्वोत्तर हिस्सों के बीच यात्रा के समय को कम करने के साथ-साथ दोनों क्षेत्रों में यातायात की अधिकता को कम करने की उम्मीद है।

सिग्नेचर ब्रिज की शुरुआत और निर्माण

वर्ष 1998 में, वजीराबाद पुल पर हुई एक स्कूल बस दुर्घटना में स्कूल के 22 छात्रों की जान चली गई थी। घटना को भयावह बनाने में ब्रिज (पुल) के संकीर्ण होने की भी बड़ी भूमिका थी, ब्रिज के संकीर्ण होने की वजह से उस पर हमेशा की तरह जाम लगा रहता था। तब से ही दिल्ली सरकार ने इस ब्रिज को बनाने पर विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया था जो मौजूदा हालातों के समानांतर था। उसी वर्ष, एक मसौदा योजना को अंतिम रूप दिया गया था, हालांकि जनशक्ति, धन आदि की कमी जैसे कारणों के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया था।

2004 में, कई बाधाओं से  निपटने के बाद, इस साइट पर पूरी तरह से काम शुरू हुआ। शुरुआती योजना 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से शुरू हुई। लेकिन समय-सीमा पूरी नहीं पूरी नहीं हो पाई था। फिर, 2016 के लिए एक नया समय निर्धारित किया गया था। एक बार फिर से देरी हुई और इस कार्य के समापन को 2018 तक घसीटा गया। इसके बाद पुल का उद्घाटन अंततः 4 नवंबर को किया गया है।

सिग्नेचर ब्रिज की खासियत?

सिग्नेचर ब्रिज के लिए निर्माण कार्य 1100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू हुआ। हालांकि, तब से, परियोजना में कई बार लागत में वृद्धि देखी गई है। उद्घाटन के समय अंतिम अनुमानित लागत लगभग 1875 करोड़ रुपये थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा उद्घाटन सम्पन्न हुआ। इसके बाद इसे “सिविल इंजीनियरिंग स्पेक्ट्रम” कहा गया है। यहां कुछ प्रमुख विशेषताएं दी गई हैं:

  1. आठ लेन की यह सिग्नेचर ब्रिज वजीराबाद रोड को आउटर रिंग रोड से जोड़ता है।
  2. गाजियाबाद रोड की तरफ जाने वाले लोगों के लिए, यह यात्रा के समय को लगभग 30 मिनट तक कम कर देगा।
  3. यह भारत का पहला असममित केवल-रक्षित पुल है।
  4. इसमें 154 मीटर का व्यूइंग बॉक्स होगा, जो शीशे का बना होगा- जिसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से दोगुनी होगी।
  5. व्यूइंग बॉक्स शहर के लोगों के लिए एक मनोरम दृश्य प्रदान करेगा, जो एक सेल्फी प्वाइंट के रूप में भी कार्य करेगा।

उद्घाटन और आगे का मार्ग

आधिकारिक तौर पर जनता के लिए इसके खुलने से पहले ही सिग्नेचर ब्रिज पर राजनीतिक विवाद देखा गया है। यह परियोजना दिल्ली सरकार (वर्तमान में आप) के अधीन थी। दिल्ली के प्रमुख और उत्तर-पूर्व दिल्ली के बीजेपी सांसद मनोज तिवारी उद्घाटन से कुछ समय बाद इस स्थान पर पहुंचे, जिसमें उनकी  दोनों पक्षों के साथ-साथ पुलिस से भी हाथापाई  हुई।

इस समारोह के लिए तिवारी को आमंत्रित नहीं किया गया था, जिसकी उन्होंने बात की, और आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहुंचने पर, उन्हें पुलिस ने रोक दिया था और उनके साथ हाथापाई भी की गई। दूसरी तरफ, केजरीवाल ने बीजेपी को उस स्थान पर अशांति फैलाने के लिए लिए दोषी ठहराया है।

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि शुरुआत से ही ब्रिज के लिए राजनीति होने के बावजूद, दिल्ली के निवासी इस उद्घाटन से कम या फिर बहुत खुश हैं। शहर में कई लोगों के लिए इस ब्रिज पर यात्रा करना अपेक्षाकृत रूप से आसान होगा।