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2018 विधानसभा चुनाव: भाजपा बनाम कांग्रेस

November 14, 2018
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2018 विधानसभा चुनाव: भाजपा बनाम कांग्रेस

राज्य चुनाव जीतने के लिए दोनों पार्टियां रणनीतियां तैयार कर रहीं हैं और ये दोनों राजनीतिक योद्धा अभियान को भेदने के लिए अपने आप को सर्वक्षेष्ठ साबित करने में जुटे हुए हैं। इस समय पाँच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव होना है। तो आइए देखते हैं कि इन चार राज्यों में चुनाव इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

यह समय 2019 की सत्ता यानि आने वाले पांच वर्षों के लिए अगली सरकार के आने का है। आगामी विधानसभा चुनाव सत्ताधारी पार्टी, बीजेपी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह राष्ट्रीय पदछाप स्थापित करने के अपने उत्साह को जारी रखने के लिए तैयार है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा पहले से ही सत्ता में है, तो इसके लिए यह चुनाव इतना पेचीदा क्यों है? जनता की मनोदशा और भावना का पता चुनाव के नतीजे से ही चलेगा कि वर्तमान में भाजपा के लिए जनता क्या सहानुभूति रखती है। बीजेपी और इसकी आलोचनीय पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसके अध्यक्ष राहुल गांधी हैं, दोनों के लिए ही यह चुनाव उत्तरजीविता की लड़ाई है।

विपरीत परिस्थियां

सिंडरेला जैसे सपने के साथ अपने कार्यकाल के पहले साढ़े तीन सालों में ब्रांड मोदी ने विपरीत परिस्थियों का सामना किया। विमुद्रीकरण, जीएसटी, तेल की कीमत में वृद्धि, रुपये की कीमत में गिरावट, निर्यात में गिरावट, राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी, किसानों की समस्या, गोमांस प्रतिबंध और जाति आधारित आरक्षण आंदोलन जैसे सामाजिक-धार्मिक विवादों तथा राफले डील व सीबीआई जैसे आसपास के हालिया विवादों ने सामूहिक रूप से, विशेष रुप से इण्टरनेशनल मीडिया पर,  प्रधानमंत्री मोदी की परिश्रम से बनाई गई छवि को खराब कर दिया है और यही कारण है कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के लिए 2019 का यह आम चुनाव जीतना एक गंभीर मामला बन गया है।

राज्यसभा के मामले

लेकिन 2018 का विधानसभा चुनाव द्वार पर है और यह 2019 के चुनाव के लिए बहुत मायने रखता है। इसको जीतने के लिए न केवल धारणा और मनोदशा की बल्कि अधिक संख्याओं की भी आवश्यकता है। राज्यों के, ऊपरी सदन, राज्य सभा में सीटों की संख्या निम्नानुसार है- मध्य प्रदेश-11, राजस्थान-10, तेलंगाना-7, छत्तीसगढ़-5,  मिजोरम-1।

2014 के आम चुनावों में प्रभावशाली जीत के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में उत्कृष्ट जीत दर्ज की। लोकसभा में सहज बहुमत रखने के बावजूद, यह राज्यसभा है जिसने संसद में महत्वपूर्ण बिलों को पारित करने के लिए एचिलिस हेल के रूप में कार्य किया है। बीजेपी के पास ऊपरी सदन में आवश्यक संख्या नहीं थी।

इसलिए यदि बीजेपी मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीतने में असफल रही, तो यह राज्यसभा में बीजेपी के सभी केंद्रों में पार्टी की ताकत को नष्ट कर देगी। यदि प्रधानमंत्री मोदी 2019 में दूसरे कार्यकाल में पार्टी का नेतृत्व करते हैं तो यह बीजेपी के लिए एक तसल्लीब्ख़्श प्रत्याशा नहीं है।

कांग्रेस के लिए, एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में इसके जमीनी आधार क्षेत्रीय पार्टियों के उदय और भाजपा से आगे निकल गए हैं। किसी शक्तिशाली की तरह पार्टी विकसित होती प्रतीत नहीं होती है, लेकिन उपरोक्त वर्णित कुछ मुद्दों और विवादों से भाजपा के खिलाफ विरोधी सत्ता लाइन पर और वापसी पर है। कांग्रेस मिले मौकों को भुना नहीं पा रही है।

पिछले साढ़े चार सालों के दौरान, कांग्रेस ने संसद की सुचारू कार्यप्रणाली में खराब प्रदर्शन किया है और यदि यह सांठगांठ करके बड़े राज्यों को जीतकर कुछ अतिरिक्त सीटों को जीत भी लेती है तो भी यह बीजेपी को गंभीर राजनीतिक चुनौती देने के बजाय संसद में अपनी विघटनकारी शक्ति को ही बढ़ाएगी। 2019 के प्रधानमंत्री पद के लिए भी पसंदीदा विकल्प के रुप में मोदी जी ही लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं और वह उनकी ही पार्टी है जो क्षेत्रीय पार्टियों और सामूहिक विपक्ष के प्रति संवेदनशील है।

ताज

इस साल इन पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस की क्या संभावनाएं हैं?

मध्यप्रदेश में, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक मजबूत राजनीतिक इकाई के रुप में छाए हुए हैं और उनसे उनकी जगह लेना एक शक्तिहीन कांग्रेस के लिए इतना आसान नहीं होगा जो स्वयं राज्य की कलहप्रिय राजनीति से पीड़ित है। शिवराज सिंह के लिए, चुनौती कांग्रेस से नहीं है बल्कि उन परेशान किसानों की प्रतिक्रिया है जो गंभीर वित्तीय तनाव में हैं। व्यापम घोटाले जैसे विवादों में दोनों पार्टियों में से किसी ने भी मदद नहीं की है। भाजपा मध्यप्रदेश में स्थिति को अच्छी तरह बरकरार रख सकती है लेकिन यदि 2013 की तुलना में इसे कम सीटें और वोट मिले तो यह हार भी सकती है।

राजस्थान में, बीजेपी विरोधी सत्ता के लिए सबसे कमजोर है और इस राज्य की सरकार में बदलाव भी देखा जा सकता है। इसलिए राजस्थान राज्य में कांग्रेस के लिए सबसे अच्छा मौका है।

छत्तीसगढ़ में, मुख्यमंत्री रमन सिंह बहुत ही कमजोर विपक्ष का सामना कर रहे हैं और ये कम सीटों के बावजूद भी अपने चौथे कार्यकाल में दोबारा आ सकते हैं।

तेलंगाना में, टीआरएस के मुकाबले बीजेपी और कांग्रेस दोनो की ही लहर कम है। मिजोरम के मुख्यमंत्री लाल थान्हावाला (कांग्रेस) को हटाना इतना आसान नहीं होगा लेकिन इस बार कम सीटों के कारण ये खतरे में है।

राज्य सभा में सीटों का हिस्सा

  • मध्यप्रदेशः11
  • राजस्थानः 10
  • छत्तीसगढ़ः 7
  • तेलंगानाः 5
  • मिजोरमः 1