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दिवाली समारोह और पाखंड

November 5, 2018


बराक ओबामा ने 2015 के दौरान नई दिल्ली का दौरा किया था और उस समय अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए लगभग 1800 इनडोर एयर प्यूरिफायर खरीदे थे। इस खबर ने राजधानी शहर में आम लोगों के साथ-साथ उच्च वर्ग के बीच काफी नकारात्मक भावनाओं को जन्म दिया था। नागरिक उनसे इसलिए निराश थे क्योंकि शहर को साफ रखने के लिए राज्य सरकार से कार्रवाई की कमी को देखा जा रहा था।  नौकरशाहों और राजनेताओं ने निराशा व्यक्त की और यह माना कि बीजिंग के साथ दिल्ली, जिसे दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से एक माना जाता है, की तुलना करना अनुचित है खासकर पश्चिमी मीडिया द्वारा।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर रिपोर्ट

कई भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध संगठनों और समाचार पत्रों ने दिल्ली की वायु प्रदूषण की समस्याओं और शहर की हवा में फैले जहरीले केमिकल्स के खतरनाक स्तरों के बारे में बताया है, यह न तो राष्ट्रीय राजधानी के लिए कोई मनगढ़ंत कहानी है और न ही इसे  बदनाम करने का प्रयास जितना कि लोग इस पर विश्वास कर लेते हैं, यह एक कठिन और गंभीर ‘तथ्य’ है। यहां तक कि हाल ही के समय में शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक जैसे आंकड़े इस तरह के एक बयान का समर्थन करते हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना 29 अक्टूबर, 2018 को की गई थी और यह सूचकांक 367 पाया गया था, जो अधिक खतरे वाले क्षेत्र को इंगित करता है। यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से अधिक हो, तो वास्तव में गंभीर माना जाएगा। हालांकि, यह वह स्थान नहीं हैं जहां इस समस्या का अंत न हो।

अमेरिकी माप

अमेरिकी दूतावास चाणक्यपुरी में स्थित है, जो दिल्ली के उन इलाकों में से एक माना जाता है जहां बहुत अधिक पेड़-पौधे हैं और अपेक्षाकृत रूप से सफाई करने वाले मौजूद हैं। दूतावास से प्राप्त खबरों से संकेत मिलता है कि शहर में अपेक्षाकृत रूप से बेहतर क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता काफी अस्वास्थ्यकर है।

एक बिगड़ती स्थिति

इससे भी बदतर यह है कि दिवाली को कुछ दिन ही बाकी रह गए हैं, जो सर्दी के आने की शुरुआत करेंगी, लेकिन स्थिति पहले से ही काफी गंभीर है। यह आम सूचना है कि राष्ट्रीय राजधानी में खराब गुणवत्ता वाली हवा के संपर्क में आने पर लोग बीमार पड़ जाते हैं। दिल्ली सरकार नियमित आधार पर डेटा एकत्र करती है लेकिन यह अपने नागरिकों के लाभ के लिए स्वास्थ्य अलर्ट जारी नहीं करती है।

अलर्ट के साथ क्या हो सकता है? अन्य देशों के उदाहरण

अलर्ट सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्थितियों वाले दिनों को कम करने में बेहद सहायक हो सकता है। बीजिंग जैसे स्थानों में, जब रेड अलर्ट की घोषणा की जाती है तो स्कूल बंद हो जाते हैं, सरकारी कारों को सड़कों से हटा दिया जाता है और प्रदूषण वाले उद्योग बंद हो जाते हैं। अमेरिका में, जब वायु गुणवत्ता सबसे खराब होती है तो लोग अपनी कारों का उपयोग करना बंद कर देते हैं और औद्योगिक इकाइयों को उनके उत्सर्जन को कम करने के निर्देश दिए जाते हैं। हालाँकि स्थिति पर नजर रखना अच्छा होता है, लेकिन फॉलो-अप कार्रवाई करना भी महत्वपूर्ण है, अन्यथा, ऐसी निगरानी व्यर्थ हो जाती है।

दिवाली पर एक अच्छी शुरुआत कैसे हो सकती है?

हाई कोर्ट पहले से प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर रोक लगा चुका है। लेकिन एक और उपाय किया जा सकता था। उदाहरण के लिए…

– मुख्य त्यौहार के अलावा किसी अन्य दिन पटाखे फोड़ने को लेकर लोगों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाया जाए।

– त्यौहार के महीने में इस तरह के सामान की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगाया जाए।

– उन पटाखों से दूर रहें जो ध्वनि उत्सर्जित करते हैं और केवल प्रकाश वाले पटाखों तक ही सीमित रहें।

हालांकि कुछ भी अकस्मात नहीं होता, अगर चीजें सामान्य तरीके से संभाली जातीं। अगर कोई नया फैसला अकस्मात सुनाया जाता है, तो कोई भी चौंक सकता है।

लोग इसमें क्या भूमिका निभा सकते हैं?

दिल्ली और साथ ही साथ अन्य शहरों तथा कस्बों में उच्च प्रदूषण के साथ रहने वाले लोग यह उम्मीद करते हैं कि उनको कुछ न करना पड़े और सरकार द्वारा वायु की गुणवत्ता को सुधार दिया जाए। हम बिजली, पानी और पेट्रोल जैसी ऊर्जा की फिजूलखर्ची करने से खुद को रोक सकते हैं। हम अपने आस-पास के वातावरण को साफ-सुथरा रख सकते हैं। इसके बाद हम किसी और से अपेक्षा कर सकते हैं।

इस तरह की उम्मीदें हमारे पाखंड को दर्शाती हैं जो कम से कम मानने योग्य हैं। कोई गलत काम करने वाला व्यक्ति यह क्यूं सोचता है कि कोई दूसरा उसकी गलती को सुधार देगा? दुर्भाग्यवश, इन मामलों का आधे से ज्यादा कारण यही है।

सवाल यह कि जब लोग खुद पर्यावरण को इतना अधिक प्रदूषित कर रहे हैं तो क्या इन्हें स्वच्छ हवा में साँस लेने का अधिकार है।

जब इस तरह के मामलों की बात आती है तो क्यूं आपका मन उदास हो जाता है? क्यूं आप सब कुछ जानबूझकर अपने द्वारा किए गए सभी गलत कार्यों के गलत नतीजों को जानने में असफल रहते हैं?

आपको खुद से यह सोचने और पूछने की आवश्यकता है कि अगर हम तेज आवाज वाले पटाखे न फोड़ें, तो क्या हमारे खुशियों के त्योहार में कोई कमी रह जाएगी, जबकि मान्यता  के अनुसार इस पर्व पर अपने घरों को रोशन करना और अपने बड़ों से आशीर्वाद लेना शामिल है।

क्या वास्तव में अस्थमा से पीड़ित उन असहाय बच्चों के बारे में सोचना गलत है जिन्हें दिवाली के समय अस्पतालों में भर्ती होना पड़ता है?

क्या बूढ़े और बीमार लोगों के प्रति दयालु होना गलत काम है, जिन्हें पटाखों का तेज आवाज से तकलीफ होती है और डर लगता है?

अगर इस समस्या के बारे में कुछ सोचा न जाए, तो जरा सोचिए हमारी आने वाली पीढ़ी का क्या हाल होगा? पल भर की मौज-मस्ती के लिए क्या हम अपने अनुशासनों को ताक पर रख देंगे? इन प्रश्नों के उत्तर भविष्य में चीजों को कैसे आकार देते हैं यह निर्धारित करने में एक लंबा रास्ता तय कर सकती हैं।

आप सभी को खुशियों के पर्व दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं।