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भारत में बाल विवाह का खतरा

February 23, 2018
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यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपात निधि) के अनुसार बाल विवाह की परिभाषा – यूनिसेफ ने बाल विवाह को “18 वर्ष से पहले की शादी” के रूप में परिभाषित किया है और इस प्रथा को मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में माना जाता है।

हम में से अधिकांश लोगों ने “बालिका वधू” नामक एक टीवी धारावाहिक देखा है, जो कि राजस्थान के गांवों में बाल विवाह की अवधारणा पर आधारित है और जिसकी निंदा तहे दिल से की गई। हालांकि यह कहानी सिर्फ एक राज्य पर आधारित थी, लेकिन भारत में ऐसे कई राज्य हैं, जहाँ बाल विवाह एक आम बात है। कम उम्र में विवाह या बाल विवाह, जिसमें ज्यादातर लड़कियों की 18 वर्ष से कम आयु में और कुछ की 15 वर्ष से कम आयु में और यहाँ तक कुछ की तो सिर्फ 3 महीने की उम्र में शादी करवा दी जाती हैं। यद्यपि भारत में बाल विवाह गैरकानूनी है, लेकिन फिर भी यह भारतीय समाज का हिस्सा है और दुनिया भर में होने वाले सभी बाल विवाहों में से 40% बाल विवाह मात्र भारत में ही होते हैं। भारत में राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में बाल विवाह की उच्चतम दर है।

सत्तावादी शासकों की वजह से बाल विवाह की प्रथा मध्ययुगीन भारत में शुरू हुई थी। महिलाओं की स्थिति को कमजोर करने के लिए, बाल विवाह अस्तित्व में आया। लोगों ने इस अधिनियम को उचित साबित करने के लिए विभिन्न विसंगत तर्क देने शुरू किए। बाल विवाह का एक अन्य कारण भारत में शाही परिवारों के बीच के गठबंधनों को गहरा करना भी है चूँकि जब बच्चे कम उम्र के होते है तो वे अपने माता-पिता के दबाव में आकर शादी के लिए मान जाते हैं, लेकिन अगर वे एक बार युवा हो जाते हैं तो वे अपना जीवन साथी खुद चुनने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा भारत में जाति व्यवस्था को जारी रखने के लिए, बाल विवाह की प्रथा शुरू की गई थी, जब विदेशी शासकों ने भारतीय महिलाओं का बलात्कार करना प्रारम्भ कर दिया, तब लड़कियों के माता-पिता ने अपनी बेटियों की रक्षा करने के लिए, कम उम्र में उनकी शादी करनी शुरु कर दी थी। कभी-कभी गरीब माता-पिता पैसों के लालच में अपनी जवान बेटियों की शादी उनसे कहीं बड़े उम्र के पुरुषों के साथ कर देते थे। यह प्रथा भी एक बड़ा कारण हो सकती है जिसने महिलाओं के जन्म और उनके अधिकार की स्थिति को बिगाड़ दिया है।

  • सबसे पहले, यह प्रथा मानव अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि युवा लड़कियों को बहुत कुछ सहन करना पड़ता है।
  • इन मामलों में कई शुरुआती मातृत्व संबंधी मौतों की सूचना मिली है।
  • चूँकि, कम उम्र की लड़की का शरीर गर्भाधारण के लिए तैयार नहीं होता है, इसलिए इन विवाहों में गर्भावस्था से संबंधित मौतें होनी एक आम बात है।
  • जो लड़कियाँ 18 वर्ष से कम उम्र में माँ बन जाती हैं, वे कमजोर शिशुओं को जन्म देती हैं, जिनके मरने की बहुत अधिक संभावना होती है या फिर शिशु भविष्य में कुपोषण, मानसिक विकास या कमजोरी का शिकार हो सकते हैं।
  • घरेलू हिंसा और साथ ही यौन हिंसा एक और मुद्दा है जिसका सामना इन युवा लड़कियों को करना पड़ता है और अधेड़ महिलाओं की तुलना में वे इस तरह की हिंसा से ज्यादा ग्रस्त होती हैं।
  • छोटी उम्र में विवाह होने के कारण इन लड़कियों को बचपन में ही अपनी प्रारम्भिक शिक्षा बीच में छोड़नी पड़ती है ताकि उनके ससुराल वालों को उनकी शिक्षा को लेकर कम से कम परेशानी हो।

संयुक्त राष्ट्र समुदाय के मुताबिक, भारत के बिहार राज्य में बाल विवाह का सर्वाधिक प्रतिशत 60% है जबकि गोवा, मणिपुर और केरल में बाल विवाह का प्रतिशत क्रमानुसार 11%, 13% और 15% है। इसके अलावा कुछ आंकड़ों ने यह भी स्पष्ट किया है कि 15 वर्ष से कम आयु की लड़कियों की बाल विवाह की दर में, 18 वर्ष की लड़कियों की तुलना में दोगुनी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि यह बहुत अच्छा संकेत है लेकिन फिर भी लड़कियों की शिक्षा और अन्य अधिकारों के बीच में एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है, जो उन्हें दिया जाना चाहिए।

बाल विवाह एक बहुत ही बड़ा चिंता का विषय है, जिसे पूरी ईमानदारी के साथ सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसी नाजुक उम्र में विवाह करना, महिलाओं से संबंधित अपराधों का समाधान करना नहीं है। दूसरी ओर बाल विवाह से अन्य समस्याओं की संख्या और उनके परिणामों में बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रत्येक माता-पिता को अपनी बेटियों को शिक्षित करना चाहिए ताकि वह अपनी जिंदगी में प्रगति कर सकें और जब भी उनके परिवार को उनकी आवश्यकता हो तो वे अपने परिवार का समर्थन कर सकें। इस समस्या का समाधान करने के लिए जन स्तरीय जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। किसी भी माता-पिता को अपनी बेटियों को एक बोझ के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि सभी को लड़कियों का सम्मान करना चाहिए और पूरे सम्मान और गरिमा के साथ उन्हें जीवन में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।