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भारत में सबसे सनसनीखेज हत्याकांड

March 7, 2018
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भारत में सबसे सनसनीखेज हत्याकांड

जाने-माने लोगों द्वारा की गई हत्याएं हमेशा समाज में आक्रोश, जिज्ञासा, रुचि, गपशप, जुनून और जोशपूर्ण चर्चाओं को पैदा करती हैं।

शीना बोरा हत्याकांड

हाल ही में, मीडिया टाइकून पीटर मुखर्जी की सेलिब्रिटी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी को अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में और बेटे मिखाइल बोरा की हत्या की योजना बनाने के संदेह में गिरफ्तार कर लिया गया था। यह खबर, भूखी बैठी मीडिया के लिए बहुत बड़ी सनसनीखेज खबर थी और सनसनीखेज खबर (ब्रेकिंग न्यूज) के आतुर दर्शक कोे, जो हर समय टेलीविजन से चिपके रहते हैं, इंद्राणी मुखर्जी से संबंधित इस खबर ने उनकी उत्सुकता को और अधिक बढ़ा दिया था।

इंद्राणी मुखर्जी की गिरफ्तारी के बाद, उसकी निजी जिंदगी एक खुली किताब की तरह हो गई और व्हाट्सएप पर चुटकुलों के माध्यम से उनका मजाक उड़ाया गया। जब इस लेख को लिखा गया था, उस समय इंद्राणी मुखर्जी पुलिस हिरासत में थीं और इस मामले की जाँच चल रही थी।

इंद्राणी मुखर्जी के पति पीटर मुखर्जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया था और 1 दिसंबर 2015 को उन्हें दो सप्ताह के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनका सीबीआई द्वारा एक लाइ डिटेक्टर टेस्ट भी किया गया था। यह एक लम्बे समय तक चलने वाला मामला बन गया, जिसे जनता और मीडिया द्वारा बड़ी उत्सुकता से देखा गया।

नैना साहनी हत्याकांड

नैना साहनी, दिल्ली के एक युवा कांग्रेस नेता सुशील कुमार की पत्नी थीं। दोनों कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। 3 जुलाई 1995 को, एक सरकारी होटल के अंतर्गत स्थित बगिया नामक एक प्राइवेट रेस्तरां में, मानव शरीर के अंगों को भयानक तरीके से तंदूर में जलाए जाने की सनसनीखेज खबर सुनकर पूरा दिल्ली दहल उठा था। बगिया नामक यह प्राइवेट रेस्तरां सुशील कुमार का ही था।

पिछली रात घर वापस लौटने पर सुशील कुमार ने अपनी पत्नी नैना साहनी को शराब पीते हुए और किसी और से फोन पर बात करते हुए पाया। नैना ने जैसे ही अपने पति को देखा तुरन्त फोन काट दिया। सुशील ने उसी नंबर पर फिर से कॉल किया, तो उन्हें पता चला कि वो मतलूब करीम से बात कर रहीं थीं। उन्होंने गुस्से में आकर नैना पर लाइसेंस रिवाल्वर से ताबड़तोड़ तीन गोली दाग दी। जिसके कारण नैना की मौके पर ही मौत हो गई।

मतलूब करीम कांग्रेस पार्टी के एक कार्यकर्ता होने के कारण नैना और सुशील दोनों से भली भाँति परिचित थे। सुशील को कुछ समय से अपनी पत्नी नैना और मतलूब के बीच अवैध संबंध होने का संदेह था और कुछ समय पहले इस बात को लेकर उन दोनों के बीच लड़ाई भी हुई थी।

अपनी पत्नी की हत्या करने के तुरंत बाद सुशील ने उसके शव को एक बैग में डाला और अपने रेस्तरां में ले गए। रेस्तरां के प्रबंधक केशव कुमार की मदद से उन्होंने नैना के शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े करके तंदूर में डालकर जला दिया। इस प्रकार यह मामला तंदूर मर्डर केस (तंदूर हत्याकांड) के नाम से जाना जाने लगा।

शव के अवशेषों में से दो टुकड़ों का परीक्षण करने के बाद प्राप्त डीएनए रिपोर्ट के परिणाम संदेह से परे साबित हुए कि सुशील ने अपनी पत्नी के शरीर के हिस्सों को जलाने से पहले गोली मारी थी। वर्तमान समय में सुशील जेल की सलाखों के पीछे अपनी उम्र कैद की सजा भुगत रहे हैं, जबकि उनके प्रबंधक केशव को इस हत्या में उनकी मदद करने के लिए सात साल की सजा सुनाई गई थी।

नीरज ग्रोवर हत्याकांड

26 वर्षीय नीरज ग्रोवर एक टेलीविजन एग्जीक्यूटिव अधिकारी थे और मुंबई में काम करते थे। वह दक्षिण भारत की एक युवा महत्त्वाकांक्षी अभिनेत्री और मॉडल मारिया सुसायराज से मिले, जो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (मनोरंजन उद्योग) में अपना कैरियर बनाने के लिए मुंबई आई थीं। मारिया नीरज के साथ कुछ दिनों तक उनके फ्लैट में  रहीं और उसके बाद उन्होंने मुंबई में खुद के लिए किराए पर एक दूसरा फ्लैट ढूंढ लिया।

6 मई 2008 को नीरज की मदद से, वह अपने नए फ्लैट में रहने के लिए चली गई। समस्या यह थी कि वह पहले से ही एक युवा नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट एम.एल. जेरोम मैथ्यू के साथ सगाई के रिश्ते में बँधी थीं। उन दिनों, मैथ्यू कोच्चि में तैनात थे।

उसी दिन देर शाम को मैथ्यू ने मारिया को फोन किया और उससे बात करने के दौरान मैथ्यू को पीछे से एक पुरुष की आवाज सुनाई दी। मारिया ने उन्हें बताया कि यह नीरज था और जो नए अपार्टमेंट में रहने के लिए उसकी मदद कर रहा था। मैथ्यू ने मारिया से कहा कि वह नीरज को छोड़ दे। परंतु मैथ्यू इस बात से पूरी तरह से आश्वस्त नहीं था कि वह नीरज को छोड़ देगी, इसलिए मैथ्यू ने अगली सुबह, सुबह की फ्लाइट से मुंबई के लिए उड़ान भरी और वह सुबह 7.30 बजे मारिया के फ्लैट पर पहुँचा। मारिया ने जैसे ही दरवाजा खोला और मैथ्यू सीधे उसके बेडरूम में गया और मैथ्यू ने नीरज को मारिया के बिस्तर पर नग्न अवस्था में पाया। दोनों के बीच एक बड़ी बहस हुई और गुस्से में आकर मैथ्यू ने रसोई के चाकू से नीरज को मौत के घाट उतार दिया।

मैथ्यू ने मारिया से कहा कि वह बाजार जाकर बैग, पर्दे, चादरें, एयर फ्रेशनर और एक चाकू खरीद कर लाए। उसके बाद, मैथ्यू और मारिया ने मिलकर नीरज के शरीर को छोटे-छोटे भागों में काट दिया और उनको एक बैग में भर लिया। उसके बाद मारिया ने अपने एक दोस्त से उसकी कार माँगी और दोनों मुंबई से बाहर किसी सुनसान इलाके में पहुँचे। उन्होंने रास्ते में रुककर दो बोतल पेट्रोल खरीदा, ताकि वे नीरज के शरीर के कटे हुए अंगों को जलाने में उसका इस्तेमाल कर सकें।

नीरज के घर न पहुँचने पर, उनके परिवार वालों को कुछ संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस स्टेशन में नीरज के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस पूछताछ से इस मामले में मारिया और मैथ्यू, दोनों के शामिल होने का पता चला, जिसने इस मामले को पहले पन्ने की खबर बना दिया। नीरज ग्रोवर की हत्या के लिए मारिया को दोषी नहीं ठहराया गया, लेकिन सबूतों को नष्ट करने में उसे दोषी पाया गया और जिसके लिए उसे तीन साल की सजा सुनाई गई। लेफ्टिनेंट जेरोम मैथ्यू को इस हत्या और सबूत नष्ट करने का दोषी पाया गया और जिसके लिए उसे 10 साल की सजा सुनाई गई।

रोनाल्ड पीटर प्रिंजो हत्याकांड

22 वर्षीय युवा अभिनेत्री श्रुति चंद्रलेखा ने कुछ तमिल और कन्नड़ फिल्मों में अभिनय किया है और उन्होंने बंगलौर के 35 वर्षीय एक छोटे से व्यवसायी एस. रोनाल्ड पीटर प्रिंजो से विवाह किया था। प्रिंजो पहले तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में दो सहयोगी उमाचंद्रन और प्रिंसन के साथ ऑनलाइन किराने का व्यवसाय चलाते थे।

इस व्यापार में नुकसान होने के कारण, प्रिंजो के दोनों सहयोगियों ने व्यापार में निवेश किए गए धन को वापस लौटाने के लिए उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। अत्यधिक तनाव के कारण, वह अपनी पत्नी श्रुति के साथ बैंगलोर में रहने के लिए चले गए और जल्द ही उसने अश्लील फिल्में बनाने का कार्य करना शुरू कर दिया। उन्होंने श्रुति पर अपनी फिल्मों में अभिनय करने के लिए दबाव डालना शुरू किया, जिसमें उनके कई सहयोगी भी शामिल थे। इन सभी बातों से परेशान श्रुति ने अपने ही पति के पूर्व सहयोगियों उमाचंद्रन और प्रिंसन से मदद माँगी और उसे मारने की योजना बनाई।

18 जनवरी 2014 को श्रुति नेअपने पति के दूध में जहर मिला दिया और उमाचंद्रन और प्रिंसन की मदद से प्रिंजो को गला घोटकर मार डाला। उसके बाद उन्होंने तीन अन्य लोगों की मदद से उसके शव को पलायमकोट्टई के असीरवाथा नगर में दफना दिया। बाद में पुलिस जाँच के दौरान श्रुति चंद्रलेखा और अन्य सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

नानावटी हत्याकांड

27 अप्रैल 1959 को नौसेना के कमांडर कवास मनेकशॉ नानावटी, अपना एक असाइनमेंट पूरा करने के बाद घर लौट कर आए थे। युवा और तेजस्वी पारसी कमांडर, कफ परेड में अपनी अंग्रेजी मूल की पत्नी सिल्विया और बच्चों के साथ रहते थे। जब नानावटी अपने घर पहुँचे, तब उन्होंने अपनी पत्नी को खुद से बहुत दूर और भावशून्य पाया। जब उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा कि क्या हुआ, तब वह खामोश रही। उन्होंने पूछा कि क्या वह अब भी उससे प्यार करती है। फिर भी वह चुप रही। और अधिक जोर देने पर, जब उससे पूछा कि क्या वह उसके प्रति वफादार है और तब उसने ना में जवाब दिया। अंत में उसने पूरी बात बताई कि उसका, उसके करीबी दोस्त, प्रेम भगवंदास आहुजा, जो कि एक समृद्ध और सफल सिंधी व्यवसायी था, उसके साथ अफेयर चल रहा था और वह उससे शादी करना चाहती थी। हालांकि आहुजा को उससे शादी करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उस वक्त कमांडर नानावटी ने ऐसा महसूस किया कि मानो सारी दुनिया उसके लिए खत्म हो गई हो।

उसके बाद वह नौसेना के अपने कार्यालय में गए, वहाँ से अपनी सर्विस रिवॉल्वर ली और कार्यालय में स्वयं से संबंधित अपने आधिकारिक कार्यो को समाप्त किया और सीधे प्रेम आहूजा के कार्यालय पहुँचे। उसे वहाँ न पाकर, वह उस के घर गए और आहुजा से मिले। उन्होंने आहूजा से पूछा कि क्या वह उसकी पत्नी से शादी करने और उसके बच्चों की देखभाल करने के लिए तैयार है। प्रेम आहूजा ने नानावटी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह उस प्रत्येक महिला से शादी करने की उम्मीद नहीं कर सकता, जिसके साथ वह कभी सोया हो। इस बात ने नानावटी को हिंसक प्रतिक्रिया करने पर मजबूर कर दिया था, जिसके परिणामस्वरुप उन्होंने उसके साथ एक संक्षिप्त संघर्ष के बाद, उसे गोली मार दी थी।

यह मामला सनसनीखेज सुर्खी बन गया, क्योंकि प्रिंट मीडिया में इस मामले की जाँच काफी समय तक चली थी। कमांडर नानावटी को जूरी द्वारा इस मामला का दोषी नहीं ठहराया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले बाद उन्हें दोषी ठहराकर जेल भेज दिया गया था। जेल में तीन साल बिताने के बाद, महाराष्ट्र की तत्कालीन राज्यपाल विजया लक्ष्मी पंडित ने उनकी सजा माफ करवा दी थी। शीघ्र ही कमांडर नानावटी अपने परिवार के साथ कनाडा में जाकर बस गए। वर्ष 2003 में उनका निधन हो गया था।

गैलोर मामला

भारत हमेशा से कई प्रसिद्ध हस्तियों, अभिनेताओं, राजनेताओं आदि जैसी सनसनीखेज हत्याओं का गवाह रहा है और इस तरह के प्रत्येक मामले ने यहाँ की मीडिया और जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इसके अलावा कुछ अन्य प्रसिद्ध मामले हैं, जो सनसनीखेज सुर्खियाँ बन गए हैं, जिसमें जेसिका लाल हत्याकांड, नीतीश कटारा हत्याकांड, राजनेता रोमेश शर्मा से जुड़ा हत्या का मामला और उच्च प्रोफाइल चार्ल्स शोभराज सीरियल हत्याकांड आदि शामिल हैं। इस तरह की हत्याओं की सूची बहुत लंबी है और मीडिया का ध्यान और जनता की जिज्ञासा के साथ अगले सनसनीखेज मामले के उजागर होने प्रतीक्षा कर रही है।