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गुरु नानक देव जी की कुछ महत्वपूर्ण शिक्षाएं

November 21, 2018
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गुरु नानक देव जी

गुरु नानक देव जी

गुरु नानक देव जी की महत्वपूर्ण शिक्षाओं के बारे में जानें

गुरुनानक देव जी की माँ का मायका (मातृ गृह) सुल्तानपुर लोधी में था, जहाँ सिखों के पहले गुरू, गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के लगभग 15 वर्ष बिताए थे। इसलिए, इस स्थान पर गुरु नानक देव जी को समर्पित कई गुरुद्वारे बने हुए हैं। गुरुनानक देव जी की बहन बेबे नानकी की शादी सुल्तानपुर में हुई थी। गुरुनानक देव जी को समर्पित उन्हीं गुरुद्वारों में से एक ‘बेर साहिब’ है, जो गुरु नानक देव जी का एक बहुत ही प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। गुरु नानक जी इस गुरुद्वारे के पीछे स्थित बेन नदी का इस्तेमाल स्नान करने के लिए करते थे और एक बेरी वृक्ष (भारतीय बेर का पेड़) के नीचे ध्यान लगाते थे। यह सब कुछ अभी भी वहाँ मौजूद है, जो वहाँ के संपूर्ण वातावरण को बहुत ही शांत बनाता है। आप संपूर्ण जगह में गुरु नानक देव जी की उपस्थित महसूस कर सकते हैं।

गुरु नानक देव जी का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने कभी भी उसको स्वीकार और उसका पालन नहीं किया था, उनका सिर्फ यह मानना था कि वह एक विशेष समुदाय में पैदा हुए हैं। उन्होंने जनेऊ (पवित्र धागा) पहनने से भी इनकार कर दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि इस तरह से कुछ भी पहनने से आपको पाप से मुक्ति नहीं मिल सकती है। गुरु जी ने कहा कि यह पवित्र धागा सर्वशक्तिमान की स्तुति करके और एक ईमानदार जीवन जीते हुए स्वतः धारण हो जाएगा और इस प्रकार जो इसे पहनेगा, वह इसका कभी भी विखंडन नहीं कर सकता है। यह बातें अगर हम समझते हैं, तो हमारा व्यक्तित्व काफी हद तक बदल सकता है।

गुरु नानक देव जी एक अच्छी तरह से पढ़े-लिखे और हर जगह यात्रा करने वाले व्यक्ति थे और यह उनकी आध्यात्मिक शिक्षा ही थी, जिसने सिख धर्म की नींव रखी थी। गुरु जी ने लंगर परंपरा की शुरूआत की और इसके माध्यम से ‘संगत और पंगत’ नामक अपनी शिक्षा का क्रियान्वयन किया, जिसका अर्थ है कि किसी भी समुदाय, जाति, विश्वास, रंग या पंथ को अनदेखा करते हुए सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन और परमात्मा की प्रार्थना करेंगे।

परमात्मा केवल एक है और यह परम सत्य और वास्तविकता है। उन्होंने बताया कि परमात्मा जन्म और मरण जैसी संसारिक चीजों से घिरा हुआ नहीं है। वह सभी जगह और हर प्राणी में विद्यमान है, इसलिए उसे एक विशिष्ट पूजा के प्रतिरूप में बाँधना उचित नहीं है।

गुरु नानक देव जी ने हमेशा वस्तुओं का आदान-प्रदान करने पर जोर दिया, क्योंकि इससे परम संतोष और खुशी मिलती है, जो इस दुनिया में अन्य कोई नहीं दे सकता है। इसके अलावा, उन सभी लोगों की मदद करनी चाहिए, जो गरीब हैं। अपनी सभी स्वार्थी इच्छाओं और लालच का त्याग कर देना चाहिए।

गुरु नानक जी ने यह भी उपदेश दिया कि हर किसी को अपना जीवन ईमानदारी और किसी को भी किसी तरह का दर्द न देते हुए, धोखाधड़ी के बिना जीना चाहिए।

गुरु नानक जी ने एक और बात पर जोर दिया कि हमेशा परमात्मा को याद रखें, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान है। गुरु नानक ने परमात्मा की पूजा को बहुत महत्व दिया है और व्यक्ति को उसे हर समय याद रखना चाहिए। हर व्यक्ति को प्रार्थना करते समय न केवल अपने परिवार या समुदाय के लिए, बल्कि संपूर्ण समुदाय के कल्याण की कामना करनी चाहिए। किसी को भी आत्म केंद्रित (खुदगर्ज) नहीं होना चाहिए।

गुरु नानक जी ने अपनी अन्य शिक्षाओं में यह कहा कि सत्य को बिनी किसी झिझक और भय के बोलना चाहिए।

गुरु नानक जी ने अपने सभी अनुयायियों को यह सलाह दी थी कि किसी में भी मृत्यु का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक अटल सत्य है।

जैसा कि गुरु नानक देव जी का जन्म महान असमानताओं की अवधि के दौरान हुआ था और उस समय के दौरान महिलाओं को पुरुषों की तुलना में हीन समझा जाता था, लेकिन फिर भी गुरु नानक जी ने पुरुषों और महिलाओं की समानता के उपदेश दिए थे।

गुरुजी ने यह भी कहा कि अहंकार बहुत खतरनाक है, इसलिए इसका त्याग कर देना चाहिए।

मुझे लगता है कि यदि हम सभी अपने जीवन में गुरु नानक देव जी के आदर्शों का पालन करते हैं, तो हर जगह अमन-चैन और शांति का माहौल बन सकता है।

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