Home / society / दिल्ली में यातायात जाम: कारण, परिणाम और समाधान

दिल्ली में यातायात जाम: कारण, परिणाम और समाधान

November 4, 2017
by


दिल्ली में यातायात जाम

हमारे देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यातायात जाम या ट्रैफिक जाम सबसे आम और परेशान कर देने वाली समस्याओं में से एक है। दिल्ली की सड़कों पर यातायात की भीड़ दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही है और राजधानी में बढ़ती हुई विकासशील गतिविधियाँ सार्वजनिक परिवहन के आधारिक संरचना की विफलता को दर्शाती है। दुख की बात है, लेकिन यह सच्चाई है कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और विकसित शहरों में से एक दिल्ली, अपने गलत कारणों जैसे यातायात भीड़ और प्रदूषण के लिए मशहूर है। वर्ष 2013 में आईबीएम ने वैश्विक, यात्रियों को होने वाली समस्याओं पर अध्ययन करके एक रिपोर्ट जारी की थी, उस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में नई दिल्ली की यातायात भीड़ का स्तर सबसे ऊपर है। वास्तव में, दिल्ली की सड़कों पर बढ़ती यातायात की भीड़ राजधानी शहर की एक निराशाजनक रूप रेखा प्रस्तुत करती है।

दिल्ली में यातायात की भीड़ के प्रमुख कारण

  • हाल ही के वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। अध्ययनों से पता चलता है कि दिल्ली की अधिकांश महत्वपूर्ण सड़कों पर लगभग एक लाख से ज्यादा वाहन चल रहे हैं।
  • दिल्ली की सड़कों का प्रति वर्ष 4.53 प्रतिशत की दर से विस्तार हो रहा है, इससे पता चलता है कि होने वाला विस्तार बढ़ती आबादी के विपरीत नहीं है। यह बताया गया है कि दिल्ली की सड़कों का घनत्व प्रति 100,000 आबादी के करीब 155 कि.मी. और करीब 80 वाहन प्रति कि.मी. है।
  • दिल्ली के चौराहों पर किसी भी वाहन को गुजरने में लगभग 120 से 180 सेकंड तक का समय लगता है, यह व्यस्ततम समय विशेष रूप से यातायात भीड़ की अगुवाई करता है।
  • एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि दिल्ली की सड़कों पर मिश्रित यातायात की विशेषता है, जिसमें व्यक्तिगत वाहन, बसों, ट्रकों, तीन पहिया वाहन, दोपहिया वाहन के साथ-साथ पशु-चालित गाड़ियाँ और पैदल चलने वाले लोग शामिल हैं। इससे यातायात के प्रबंधन में समस्याएं पैदा होती हैं और इससे यातायात चालन में भी विलंब होता है।
  • एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि दिल्ली की आबादी में वृद्धि हुई है और जिसमें कर्मचारियों की उच्च संख्या शामिल है।
  • दिल्ली में सार्वजनिक परिवहनों की कमी है। मेट्रो और बस सेवाओं के बावजूद, परिवहन व्यवस्था बढ़ती आबादी के साथ तालमेल रखने में सक्षम नहीं है। जिसके परिणामस्वरूप अधिक से अधिक लोग अपने निजी वाहनों का उपयोग करते हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ का जमावड़ा लगा रहता है।
  • शहर की यातायात की भीड़ में विभिन्न स्थानों में मेट्रो लाइनों के चल रहे निर्माण-कार्य, क्षतिग्रस्त सड़कें और सड़कों की होने वाली मरम्मत अहम भूमिका निभाते हैं।

परिणाम

  • इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनावश्यक देरी और वाहनों की कम गति यातायात की भीड़ में मुख्य योगदान देते हैं।
  • यह ज्यादातर लोगों के लिए निरर्थक गतिविधि के रूप में सामने आया है, जब लोग यातायात भीड़ में फंस जाते हैं, तो वह देर से अपने कार्यस्थल पहुँचते हैं और जिसके कारण घर पहुँचने में भी देर हो जाती है।
  • दिल्ली में यात्रा और ड्राइविंग बहुत ही असुरक्षित होने के कारण सड़क यातायात संबंधी मुत्युदर में काफी वृद्धि हुई है।
  • यातायात की भीड़ के कारण सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। वास्तव में, भारत में दिल्ली की दुर्घटना दर सबसे अधिक है और दुनियाभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में यह तीसरे स्थान पर है।
  • यहाँ की विडंबना यह है कि हर कोई जल्दी में होता है, लेकिन समय पर कोई भी नहीं पहुँचता है।
  • दिल्ली में यातायात की भीड़ का प्रमुख कारण यह भी है कि दिल्ली के लोग यातायात नियम और लाल-बत्ती (रेड लाइट) का पालन नहीं करते हैं।
  • यात्रा के समय का पूर्वानुमान करने में असमर्थ होना।
  • ईंधन की बर्बादी।
  • वायु और ध्वनि प्रदूषण में इजाफा होना।
  • वाहनों की टूट फूट।
  • यातायात में सड़क पर चलने वाले लोगों द्वारा हिंसक क्रोध व्यक्त करना।
  • यातायात भीड़ के कारण आपातकालीन वाहनों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।

दिल्ली में यातायात को नियंत्रित करने में सरकार की भूमिका

सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कुछ उपाय निम्न हैं:

  • दिल्ली मेट्रो के दूसरे चरण की समाप्ति से दिल्ली के यात्रियों और गुड़गांव, नोएडा और गाजियाबाद के आसपास के एनसीआर शहरों को एक सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रदान की गई है।
  • दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने 3,500 से अधिक वातानुकूलित और गैर-वातानुकूलित बसों सहित कॉरपोरेट सेक्टर की बसों का शुभारंभ किया है।
  • ब्लू-लाइन की बसों का फिर से शुभारंभ।
  • मौजूदा सड़क नेटवर्क की नई सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए पुल, फ्लाइओवर और सड़कों का विस्तार किया गया है।
  • दिल्ली के कुछ इलाकों में रिंग रोड बाईपास और ऊँची सड़कों जैसे बारपुला ड्रेन ट्रैफिक के सिगनल फ्री प्रवाह के साथ प्रदान किए गए हैं।

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) और दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड (डीआईएमटीएस)।

डीआईएमटीएस का मुख्य उद्देश्य यात्रियों के लिए सुरक्षित, सुलभ, विश्वसनीय, टिकाऊ और अनुकूल सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रदान करना है। दिल्ली की सड़कों पर यातायात की समस्या को उचित तरीके से इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) के कार्यान्वयन के साथ हल किया जा सकता है, जैसा डीआईएमटीएस ने अपनाया है। दिल्ली का आईटीएस, यातायात भीड़ के लिए पूरे भारत में एक स्थायी और संतुलित परिवहन समाधान के रूप में अपनाया जा सकता है। यह मूलतः परिवहन समस्याओं के समाधान में कंप्यूटर और संचार तकनीकों का उपयोग करता है। इसकी सहायता से विवरण या सूचना का आसानी से आकलन किया जा सकता है और फिर यातायात प्रबंधकों और सड़क उपयोगकर्ताओं पर प्रतिक्रिया जारी की जा सकती है। आईटीएस कार्यान्वयन से यातायात की कम भीड़, बेहतर यातायात दक्षता, चालकों की बेहतर सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है। आईटीएस के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं-

  • एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
  • एडवांस व्हीकल कंट्रोल सिस्टम
  • एडवांस ट्रैवलर इन्फार्मेशन सिस्टम
  • इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्सन सिस्टम
  • एडवांस पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम
  • वायरलेस ट्रैफिक सिग्नल कन्ट्रोलर
  • रेड लाइट-स्टॉप, लाइन वॉइलेशन और डिटेक्शन सिस्टम
  • सीसीटीवी जंक्शन सर्विलांस
  • वैरिएबल मेसेज सिग्नल
  • वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन इत्यादि

अन्य देशों में यातायात के प्रभावी प्रबंधन के लिए इसका पहले से ही उपयोग किया जा रहा है। दिल्ली में इसका हाल ही में शुभारंभ हुआ है। आईटीएस का उचित कार्यान्वयन निश्चित रूप से यातायात परिदृश्य में सुधार करेगा।

अन्य कदम क्या उठाए जा सकते हैं ?

यातायात के उचित परिगमन के लिए दिल्ली सरकार द्वारा कुछ तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्कता हैः

  • बेहतर और विकसित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की योजना बनाना।
  • विभिन्न आकार और वजन वाले वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए अलग-अगल सड़कों या लेन का निर्माण कराना।
  • शिक्षा, विज्ञापन और सख्त प्रवर्तन के माध्यम से यातायात सुरक्षा और यातायात नियमों को बढ़ावा देना।
  • वाहन की रूप रेखा में सुधार करने पर जोर देना।
  • निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रचुर साधन और सख्त नीतियों को लागू करना।
  • प्रमुख सार्वजनिक परिवहन की भीड़-भाड़ वाली सड़कों के लिए सार्वजनिक परिवहन के लागत प्रभावी, पर्यावरण-अनुकूल और नए कुशल तरीके अपनाना।
  • सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना।
  • अंतिम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पैदल चलने वाले और साइकिल चलाने वालों को प्रोत्साहित करना।

इस तरह के उपायों की कार्यसाधकता काफी हद तक लोगों, सड़क उपयोगकर्ताओं, पुलिस और कानून के प्रवर्तकों पर निर्भर करती है।