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प्रमुख भारतीय फुटबॉल क्लब

August 10, 2018


प्रमुख भारतीय फुटबॉल क्लब

दुनिया में फीफा गीत की गुनगुनाहट से प्रभावित होकर, भारत भी अपने अंदर परिवर्तन की लहर का अनुभव करना चाह रहा है। देशवासियों ने फिर से 1950-1964 के हमारे सुनहरे युग को याद करने और फुटबाल के प्रति पुन: जुनून उत्पन्न करना शुरू कर दिया है। फुटबॉल के साथ भारत का 150 से अधिक वर्षों का एक जुनूनी इतिहास रहा है, जिसने डुरंड कप (1888) जैसी सबसे पुरानी प्रतियोगिताओं में से कुछ को हमारे नाम किया है। चूँकि खेल दुनिया और देश को एकजुट करता रहा है, तो चलिए कुछ प्रमुख भारतीय फुटबॉल क्लबों पर नजर डालते हैं:

  • मोहन बागान ए.सी.

1889 में निर्मित, यह भारत का सबसे पुराना संघर्षरत क्लब होने के साथ ही एशिया के सबसे पुराने क्लबों में से भी एक है। यह क्लब आई-लीग में खेलता है, जो हमारे देश का पहला पेशेवर लीग है।कोलकाता स्थित क्लब के नामजीत की एक स्ट्राइक है। इसने कुल 250 से ज्यादा ट्रॉफियां जीतने के साथ ही 14 बार फेडरेशन कप जीता है, जो किसी भी भारतीय क्लब द्वारा सबसे ज्यादा है। विशेष रूप से, ‘शानदार कप्तान’, सुनील छेत्री ने 2002 में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत यहाँ से की।

  • ईस्ट बंगाल एफ.सी.

कोलकाता के साथ हमेशा से ‘भारतीय फुटबॉल के केंद्र’ के खिताब का दावा करने वाला एक और नाम सूची में आता है। 1920 में स्थापित, पूर्वी बंगाल एफ.सी. आई-लीग में खेलता है। डबल स्ट्राइक में एनएफएल खिताब जीतने वाला यह भारत का पहला क्लब है, इसकी यह अपने आप में एक बड़ी जीत है। यह क्लब मोहन बागान एफ.सी. के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में से एक है।

  • बेंगलुरु एफ.सी.

2013 में स्थापित, बेंगलुरु एफ.सी. क्लब ने थोड़े समय में ही अपने लिए जगह बना ली है।आईएसएल की प्रतिस्पर्धा में, इस क्लब ने दो खिताब जीते हैं, जिसमें से एक खिताब इसने अपने डेब्यू सीजन में ही हासिल किया। दो फेडरेशन कप पहले से ही इस क्लब के नाम पर हैं और इसकी सबसे हालिया जीत सुपर कप रहा है। क्लब को अपनी व्यावसायिकता के लिए नए ट्रेंडसेटर में से एक माना जाता है, जिसमें छेत्री जैसे खिलाड़ी इसके लिए खेल रहे हैं।

  • डेम्पो एस.सी.

गोवा स्थित में डेम्पो एस.सी.क्लब की स्थापना 1968 में हुई थी जिसे ‘द व्हाइट’के रूप में भी जाना जाता है। क्लब ने पांच लीग खिताब जीते हैं, जो भारतीय क्लबों में सबसे ज्यादा है। उन्होंने चार बार रोवर्स कप जीता है, जिसे दो बार मोहन बागान को हराकर जीता। क्लब आई-लीग के लिए एक प्रमुख नाम है।

  • मिनर्वा पंजाब एफ.सी.

आई-लीग में अंडरडॉग, मिनर्वा पंजाब 2005 में अपने गठन के बाद से प्रतिष्ठित होता चला गया। यह क्लब आई-लीग के मौजूदा डिफेन्डिंग चैंपियन के रूप में स्थिति हैं, जिसने डेम्पो एससी को हराया है, जो लीग में सबसे सफल क्लब है। 2015-16 सीजन में क्लब की पहली राष्ट्रीय स्तर की उपस्थिति आई-लीग की द्वितीय श्रेणी में थी, जहां वे रनर-अप के रूप में रहे।

  • सालगाकार एफ.सी.

1956 में स्थापित, सालगाकार एफसी गोवा का एक व्यवसायिक फुटबॉल क्लब है। वर्तमान में गोवा प्रोफेशनल लीग में खेल रहा है, क्लब ने 19 जीएलसी कप जीते हैं, जिनमें से एक आई-लीग चैम्पियनशिप है। यह 1998-99 सीजन में एनएफएल जीतने वाला गोवा का पहला क्लब भी था।

  • चेन्नई एफ.सी.

इंडियन सुपर लीग के मौजूदा डिफेन्डिंग चैंपियन, क्लब 2014 में आईएसएल के पहले सीजन में गठित किया गया था। तब से इसने दो बार 2015 में और साथ ही साथ 2017-18 में लीग जीता है। क्लब ने हाल के वर्षों में प्रसिद्ध साउथर्न डर्बी तिर्यो का (बेंगलुरू एफसी और केरल ब्लॉस्टर्स के साथ) एक हिस्सा होने के नाते प्रशसंकों की एक बड़ी भीड़ को जुटा ली है।

  • ऐजल एफ.सी.

वर्ष 1984 में क्लब को मिजोरम में गठित किया गया था। जनवरी 2012 में आई-लीग की द्वितीय श्रेणी में प्रवेश करने के बाद, क्लब वर्ष 2015 में इस जीत के लिए आगे बढ़ा। ऐजल एफसी पूर्वोत्तर क्षेत्र का पहला क्लब है जिसने आई-लीग खिताब जीता है।

  • चर्चिल ब्रदर्स एफ.सी.

गोवा स्पोर्ट्स क्लब की स्थापना 1988 में हुई थी, उस समय इसे वरका क्लब के नाम से जाना जाता था। यह नेशनल फुटबॉल लीग के प्रारंभिक 12 क्लबों में से एक था, जो अब प्रसिद्ध आई-लीग में बदल गया है। क्लब ने 2 लीग चैंपियनशिप, 1 फेडरेशन कप और साथ ही साथ 3 डूरंड कप जीते हैं।

  • जगतजीत कॉटन और टेक्स्टील एफ.सी.

1971 में पंजाब में स्थापित जेसीटी एफ.सी. को हाल के दिनों के सबसे सुव्यवस्थित क्लबों में से एक माना जाता है। पिछले 30 सालों में, यह पहला क्लब है जो कोलकाता के बाहर से आईएफए शील्ड में अपने नाम का दावा करने के लिए सामने आया है। जेसीटी 1996 में नेशनल फुटबॉल लीग का पहला चैंपियन बना था, उसी वर्ष इसने फेडरेशन कप जीता था। तब से आज तक, इस लोकप्रिय क्लब ने व्यापक रूप से अपने हॉल ऑफ फेम में 5 डुरंड कप जीते हैं।

भारतीय फुटबॉल के साथ इसके प्रशंसकों में एक आशाजनक वृद्धि होती दिखाई दे रही है, हमारे यश के दूसरेऔर शायद पुराने दिन फिर से वापस आ रहे हैं।

 

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फुटबॉल भारत में पुनरुत्थान का अपना सफर शुरू करने जा रहा है, आइए हम अपने कुछ राष्ट्रीय चैंपियन: भारतीय फुटबॉल क्लबों पर नजर डालते हैं।