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पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : इस दिवाली इन बातों का रखना होगा ध्यान

October 25, 2018
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दिवाली 2018

देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में से एक अकेले भारत में ही नौ सबसे प्रदूषित शहर हैं, जो बहुत ही दुख की बात है। यह और भी बदतर हो जाता है जब पता चलता है कि अपना ही देश सबसे अधिक प्रदूषित है। हम काफी लंबे समय से प्रदूषित वायु में ही सांस लेते आ रहे हैं जो कि अब हमारी आदत सी बनती जा रही है। वायु की गुणवत्ता कम होने पर भी हम अपने जीवन के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। लेकिन इस बार पटाखे फोड़ने के कुछ मानक तय किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जैसा कि दीपावली का त्यौहार नजदीक है और हानिकारक गैसों के संभावित काले बादल छाने लगे हैं। कुछ पर्यावरणविदों और वकीलों ने इस साल दीपावली के पावन त्यौहार पर पटाखों को लेकर राष्ट्रव्यापी पूर्ण प्रतिबंध के लिए याचिका दायर करने का फैसला किया। लेकिन, फिर पटाखा व्यवसायियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से अपील की क्योंकि यह उनकी आजीविका का स्रोत है। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे तैयार करने वालों की आजीविका के मौलिक अधिकार के साथ-साथ 1.3 अरब से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर विचार करते हुए यह फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर को कहा कि कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों को ही बनाने और बेचने की अनुमति दी जाएगी। ज्यादा प्रदूषण करने वाले और तेज आवाज फैलाने वाले पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर रोक रहेगी।

क्या हैं सभी प्रतिबंध?

अदालत ने रोक लगाने के बजाय निम्न स्थितियों को लागू किया है जो निम्नानुसार सूचीबद्ध है:

  1. आप दीपावली पर पटाखे जला सकते हैं, लेकिन केवल रात 8 बजे से रात 10 बजे तक।
  2. सीरीज और लड़ी वाले पटाखों को फोड़ना और बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
  3. केवल लाइसेंसी बाजारों या दुकानों पर ही कम प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री हो सकेगी।
  4. पटाखों को ऑनलाइन नहीं बेचा जाएगा, फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी। पटाखों की बिक्री करने पर उन्हें कोर्ट की अवमानना का दोषी माना जाएगा।
  5. जुलाई 2005 के फैसले के अनुसार निर्धारित कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों को ही बनाने और बेचने की अनुमति दी गई है।

लेकिन पूरी बात यहीं खत्म नहीं होती

पटाखे जलाए जाने के लिए समय सीमा पर प्रतिबंध केवल दिवाली के दिन तक ही सीमित नहीं है। बाद में, क्रिसमस और नए साल पर भी, पटाखे केवल रात 11:55 से लेकर 12:30 बजे के बीच फोड़े जा सकते हैं। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों को लेकर दिए गए निर्देश सभी त्यौहारों और कार्यों जैसे जन्मदिन, शादियों आदि पर भी मान्य हैं।

इसके अलावा, अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को दिवाली से 7 दिन पहले और बाद में वायु की गुणवत्ता की निगरानी करने का निर्देश दिया है। स्तरों में अवांछनीय परिवर्तन और अधिक प्रतिबंधों का कारण बन सकता है।

और, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों के लिए, केवल प्राधिकृत समुदाय क्षेत्रों में पटाखे फोड़ने की अनुमति है।

मुख्य प्रश्न: क्या इससे मदद मिलेगी?

तेज आवाज वाले पटाखों का स्तर कम करना, बड़े पैमाने उन लोगों की इच्छाओं को मारना है जो त्योहार के दर्मियान अपनी खुशी तेज आवाज वाले पटाखे फोड़कर ही जाहिर करते हैं। इन सबके बावजूद क्या यह फैसला वास्तव में मौलिक समस्याओं का निराकरण करने में सक्षम हो पाएगा? आइए देखते हैं…

दिवाली में अधिक पटाखे जलने से PM2.5 और PM10 का स्तर बड़े पैमाने पर बढ़ता है। ये इस दिन प्रदूषण बढ़ने के मुख्य घटक हैं। इसके अलावा, पटाखे ‘बेरियम साल्ट नामक जहरीली गैसें और एल्यूमीनियम सामग्री को निकालते है, जो त्वचा की समस्याओं का कारण बनता है। इस समय लाए गए हरे रंग के पटाखे नियमित पटाखों की तुलना में PM2.5 और PM10 से 30-35% कम उत्सर्जन का कारण बनते हैं। इसके अलावा, इन पटाखों में एल्यूमीनियम की भी मात्रा कम होती है और राख और बेरियम साल्ट इन पटाखों में पूरी तरह से अनुपस्थित होता है। मूल रूप से, नियमित पटाखों की सभी ‘कमियां’ हरे रंग के पटाखों हटा दी गईं है। इसलिए, हाँ यह प्रदूषण की समस्या को कम करने में सहायक है।

दूसरी बात, पटाखे फोड़ने के लिए केवल 2 घंटे का समय निर्विवाद रूप से प्रदूषण के स्तर को कम कर देगा।

तीसरी बात, पटाखे विक्रेताओं की संख्या कम हो जाएगी, क्योंकि केवल लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति ही पटाखे बेच सकते हैं। इसके अलावा, पटाखे ऑनलाइन खरीदे नहीं जा सकते हैं। इसलिए, कम खरीद से पटाखे कम जलेगें और अंत में प्रदूषण का स्तर कम होगा।

हालांकि, इससे त्योहार भी फीका पड़ सकता है। लेकिन, बेकार से बेगार भली, अगर हम अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहे तो एक दिन हमारी आने वाली पीढ़ी बहुत बड़े खतरे में पड़ सकती है।

आप इस फैसले से क्या सोंचते हैं? क्या यह फैसला अनुचित है? और हाई कोर्ट के इस फैसले ने हमारे त्योहार का रंग फीका कर दिया है? नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर अपने विचारों को हमारे साथ साझा करिए।

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हम काफी लंबे समय से प्रदूषित वायु में ही सांस लेते आ रहे हैं जो कि अब हमारी आदत सी बनती जा रही है। वायु की गुणवत्ता कम होने पर भी हम अपने जीवन के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। लेकिन इस बार पटाखे फोड़ने के कुछ मानक तय किए गए हैं।