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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को कहा “मसखरा” – भारतीय राजनीति में जारी है विवादों की बयानबाजी

September 11, 2018
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को कहा "मसखरा"

भारतीय राजनीति बुद्धि और शिष्टता का खेल है, जिसे कोई चुनाव के समीप आते-आते खो देता है। प्रतिद्वंदियों ने बहुत ही चालाकी से दिल खोलकर शब्दों का प्रहार करने शुरू कर दिया है। 6 सितंबर को अटकलबाजियों से घिरे तेलंगाना में कुछ ऐसी ही घटना घटी। जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री, कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें “देश का सबसे बड़ा मसखरा” कह दिया।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में बफून शब्द को “मसखरा – बेहुदा लेकिन मनोरंजक व्यक्ति” के रूप में परिभाषित किया गया है। हालांकि यह बात गुप्त नहीं है कि वह आधे से ज्यादा समय से ‘हास्यप्रद‘ व्यक्तित्व वाले रहे हैं, सवाल हमारी आधुनिक राजनीति का है। क्या यह केसीआर के राजनीतिक स्थायित्व के लिए या इस मामले से संबंधित किसी और के लिए उचित है, जो अपने प्रतिद्वंद्वी का नाम उछालकर निश्चित सीमा को लांघते हैं?

कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव ने राहुल को क्यूं कहा ‘मसखरा‘

पिछले कुछ हफ्तों में तेलंगाना राज्य ध्यान का केंद्र रहा है, जैसा कि यहां पर विधानसभा भंग होने वाले लोकवाद ने हवा भरी। हालांकि, 6 सितंबर की दोपहर को इस विधानसभा भंग होने वाले लोकवाद को मंजूरी दे दी गई, जब मुख्यमंत्री ने आखिरकार सत्ता में 4 साल से कम समय को पूरा कर, विधानसभा को भंग कर दिया। राज्यपाल द्वारा प्रस्ताव को स्वीकृति देने के साथ ही, राज्य विधानसभा चुनाव जो कि 2019 के मध्य में होने तय थे, को इस वर्ष के अंत तक पूर्वस्थगित कर दिया गया है। इस प्रस्ताव पर विभिन्न विश्लेषकों के पास अलग-अलग राय हैं। जहां कुछ का मानना है कि यह कांग्रेस-तेलुगू देशम पार्टी के गठबंधन को रोकने के लिए टीआरएस का प्रयास है और अन्य लोगों का मत इससे पूर्ण रुप से भिन्न है। यदि अवधि पूरी हो चुकी है तो विधानसभा चुनाव 2019 के चुनाव के साथ होंगे, जो टीआरएस के मतदाता आधार के लिए भयसूचक है, क्योंकि अब पूरा ध्यान प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर डिगा होगा।

विधानसभा भंग होने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, तेलंगाना सीएम ने विवादों को जन्म देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पर तीखी टिप्पणी की। “हर कोई जानता है कि राहुल गांधी क्या हैं … वह देश के सबसे बड़े मसखरे हैं।” कुछ ही दिन पहले, गांधी ने तेलंगाना पर एक व्यंग्य करते हुए, इसे “भ्रष्टाचार की राजधानी” कहा था, जिसमें उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधते हुए मोदी और केसीआर को एक ही “श्रेणी” में रखा था। के चंद्रशेखर राव का विस्फोटक बयान उस समय चर्चा का विषय बना। जब उन्होंने राहुल गांधी द्वारा राज्य में आकर चुनाव प्रचार की योजनाओं को अपने लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा “राहुल गांधी का यहां आकर प्रचार करना हमारे लिए फायदेमंद है। जितना अधिक वे तेलंगाना में आएंगे, हमारी सीटों में उतनी ही अधिक बढ़ोत्तरी होगी”।

कांग्रेस ने भी जबाबी हमला करना शुरू कर दिया है, कांग्रेस के एक नेता ने जबाब देते हुए कहा कि “केवल एक मसखरा ही ऐसा कह सकता है।” हालांकि, इस तरह के अपशब्दों का चक्र आज से नहीं बल्कि सदियों से चलता आ रहा है। आम आदमी अचम्भित है – क्या ये मेरे देश के नेता हैं?

सत्ता के चक्कर में खुद को “राजनैतिक ढंग से” संवारना

इस बात से कोई इंकार नहीं सकता कि चुनाव नजदीक आते ही, भारतीय राजनीति हमारे प्राइम-टाइम टीवी शो से भी ज्यादा मनोरंजक हो जाती है। यहां तक कि वे लोग जो राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते, चुनाव आते ही राजनेताओं के अपवादों को बहुत ही दिलचस्पी से अपने टीवी सेटों पर रोजाना देखने लगते हैं और अगर बात आती है राजनीति की तो हमारे राजनेता अपने आप को चरित्रवान साबित करने में कभी भी पीछे नहीं रहते।

वो दिन अब चले गए जब नेताओं के बीच वाद-विवाद या तर्क-वितर्क शांतिपूर्ण तरीके से और सबसे महत्वपूर्ण सम्मानजनक तरीके से होती थी। आज की राजनीति अंतहीन प्रतिस्पर्धा पर चलती है, जिसमें यह देखा जाता है कि कौन सबसे विचित्र टिप्पणी कर पाने में माहिर है और हमारे देशवासियों को अधिक रोमांच दे सकता है तथा उन्हें हंसी से लोटपोट होने पर मजबूर कर सकता है। किसी के नाम को उछाल कर क्या हासिल होता है, यह राजनेताओं को एक-दूसरे के एजेंडों पर हमला करने या अपनी नीतियों में दोषों को खत्म करने के लिए झंझटो में न पड़ने का एक हथियार प्रदान करता है। वे अधिक तत्परता से “पप्पू” या “चाय-वाला” जैसे नामों को बुलाकर आसानी से सुर्खियां बनाने में कामयाब हो जाते हैं।

अगर यह अंततः भारतीय राजनीतिक परिदृश्य बन जाएगा, तो इसे ‘मेंढक और तिलचट्टे का खेल’ कहना गलत नहीं है। अभी-अभी हालिया घटना में केसीआर ने राहुल गांधी को “मसखरा” कहते हुए जोकर कहा है, सवाल यह नहीं है कि गांधी की विचारधारा वास्तव में गलत हैं। बल्कि क्या आज के समय में अपने आप को साबित करने के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों पर अपशब्दों का प्रहार करना सबसे अच्छा तरीका है? हाँ, भारतीय दर्शकों को “मिर्च और मसाले” वाली खबरों को देखने की आदत है, लेकिन नेताओं को दर्शकों को खुश करने के लिए इतना नीचे गिरना नहीं चाहिए।

इसमें कोई शक नहीं है कि हमारे मुख्यमंत्री, मंत्री, राष्ट्र के प्रतिनिधि अपने पद का इस्तेमाल बखूबी करते हैं। आखिरकार हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। यह दर्जा हमें कुछ निश्चित मानकों के बिना मिला है और पूरी दुनिया की नजरें हमारे ऊपर हैं।

 

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को कहा
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री, केसीआर ने हाल ही में राहुल गांधी को "देश का सबसे बड़ा मसखरा" कहा। इस बयान के साथ ही विवादों का सिलसिला शुरू हो चुका है, अपशब्दों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भारतीय राजनीति के साथ यह क्या हो रहा है?