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2017-18 के शीर्ष 10 भारतीय राजनीतिक व्यक्तित्व

June 28, 2018
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2017-18 के शीर्ष 10 भारतीय राजनीतिक व्यक्तित्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर सख्त रुख लेने के साथ, वर्ष 2017 देश के राजनीतिक द्रष्टि से एक महत्त्वपूर्ण वर्ष रहा। 9 राज्यों ने एक नयी राज्य विधानसभा चुनने के लिए चुनाव का आयोजन किया।

राजनीति के इस बदलते स्वरूप को इस तथ्य से देखा जा सकता है कि भारत का वैश्विक स्तर हर गुजरने वाले वर्ष के साथ पूरे दमखम से आगे बढ़ रहा है।

शीर्ष 10 भारतीय राजनीतिक व्यक्तित्वों की सूची नीचे दी गई है। पिछले वर्ष 2017 में राजनीतिक क्षेत्र में, ये राजनीतिक व्यक्तित्व काफी प्रभावी रहे हैं –

इस सूची को, राजनीतिक व्यक्तित्वों की सोशल मीडिया पहुँच को और बीते वर्ष में इन संबंधित नेताओं द्वारा देश एवं राज्यों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, संकलित किया गया हैः

 

नरेंद्र मोदीनरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी, अपने चौथे वर्ष में भी सख्त निर्णय लेने से नहीं घबराए। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक मिश्रित वर्ष था। प्रधानमंत्री ने भारत और चीन के बीच टूटे हुए संबंधों को बेहतर बनाने के लिए तेजी से काम किया। भले ही डोकलाम मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनातनी की स्थित पैदा हो गई हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहुत ही दृढ़ता से इस मामले को सुलझा लिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में शुरू की गई सहज बिजली हर घर योजना और संकल्प से सिद्धि – न्यू इंडिया मूवमेंट,- 2017 से 2022 तक, जैसी कई योजनाएओं और नीतियों की शुरूआत की। जो यह सुनिश्चित करती हैं कि भारत एक आर्थिक शक्तिशाली देश बनने के एक स्थिर मार्ग पर है। घरेलू नीतियों के अलावा, प्रधानमंत्री ने दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

 

पीयूष गोयलपीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने 2017 में कैबिनेट के फेरबदल में रेल मंत्री के रूप में सुरेश प्रभु की जगह ली। पीयूष गोयल इससे पहले कोयला मंत्रालय, नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और ऊर्जा के लिए स्वतंत्र प्रभारी का पदभार संभाल चुके हैं। पीयूष गोयल एक उत्कृष्ट मंत्री रहे हैं, जिन्होंने कोयला, नई और नवीकरणीय तथा ऊर्जा में बहुत आवश्यक सुधार किए।

पीयूष गोयल ने ऊर्जा दक्षता और हरित ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए नए नीतिगत उपायों को सुनिश्चित किया है। जैसे ही पीयूष गोयल ने रेल भवन का कार्यभार संभाला, उन्हें एल्फिस्टन हादसे की भयावहता से निपटना पड़ा, जिससे वह बहुत शीघ्र सुर्खियों में छा गए।

इस घटनाक्रम के बाद पीयूष गोयल ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि इस जगह पर सुरक्षा के उचित उपाय किए जाएंगे और रेलवे अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे और मृतकों और घायलों के परिवारों को सहायता प्रदान की जाएगी। पीयूष  गोयल ने रेलवे नेटवर्क और स्टेशनों को डिजिटल बनाने के लिए एक आईसीटी (सूचना, संचार और प्रौद्योगिकी) नामक एक अलग निदेशालय का निर्माण करवाया है।

 

चंद्रबाबू नायडूचंद्रबाबू नायडू

विभाजित राज्य आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पिछले साढ़े चार सालों में राज्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आंध्र प्रदेश निवेश के अन्तःक्षेपण के साथ देश में सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक के रूप में उभरा है, आंध्र प्रदेश राज्य निवेशकों के लिए एक आकर्षक आर्थिक संभावना तैयार कर रहा है। व्यापार के अनुकूल वातावरण और व्यवसाय करने की सरलता ने राज्य को व्यवसाय का मुख्य केन्द्र बना दिया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, राज्य में शिक्षा मानक में सुधार लाने और सूखे प्रवण राज्य में जल संरक्षण नीतियों को सुनिश्चित करने के दृढ़ संकल्प के साथ काम किया है।

 

 

अरविंद केजरीवालअरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक मिश्रित वर्ष था। जैसा कि केन्द्र और दिल्ली सरकार के बींच तना-तनी चल रही थी इसलिए उन्हें गवर्नर की सहमति के बिना काम करने और नीतिगत उपायों को लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि इतनी सारी कठिनाइयों के बावजूद, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मोहल्ला क्लीनिक के माध्यम से नागरिकों के लिए किफायती स्वास्थ्य देखभाल के लिए विशेष प्रोत्साहन के साथ दिल्ली के विकास की दिशा में काफी काम किया है। अरविंद केजरीवाल ने यह सुनिश्चित किया कि सार्वजनिक और सरकारी स्कूल विकास के मामले में पीछे नहीं हैं, अधिकांश सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढ़ाचे को खत्म कर दिया गया है। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के अलावा, केजरीवाल द्वारा इन विद्यालयों के प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार किए गए, सार्वजनिक और सरकारी स्कूल के छात्र अब निजी स्कूल के छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो सकते हैं। हालांकि, आम आदमी पार्टी को कई राज्य विधानसभा चुनावों में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनावों में ये करीब 20 सीटों को सुरक्षित करने में सक्षम रहे थे।

 

अरुण जेटलीअरुण जेटली

वर्तमान में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दूसरे कमांडर प्रभारी अरुण जेटली वित्त मंत्री के पद को संभालने में कामयाब रहे। 2014 में जब से अरुण जेटली ने कार्यालय का पदभार संभाला है तब से इन्होंने कुछ सख्त उपायों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है। अरुण जेटली ने 2017 की शुरुआत में संसद में अपना तीसरा  बजट पेश किया था। बजट को वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों के साथ-साथ उद्योग विशेषज्ञों से बहुत शाबाशी मिली, क्योंकि पूर्णकालिक बजट में समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ था। इस वर्ष  वित्त मंत्री ने आजादी के बाद से भारतीय जमीं पर सबसे बड़े कर सुधार की शुरुआत की। जैसा कि उन्होंने पूरे देश के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शुरुआत करके देश को संकीर्ण कर संरचना, जो देश के विकास में बाधा उत्पन्न कर रहा था, से मुक्त कर दिया।

 

सुषमा स्वराजसुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज ने एक मिशाल पेश की, कि कैसे हर राजनेता और मंत्री को सत्ता और धन के घमंड़ में आकर अक्खड़ होने के बजाय, अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने काम के प्रति सहानुभूति और प्रतिबद्धता के साथ लाखों लोगों के दिल जीते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के भाषण के जरिए उन्होंने तंजानिया में फंसे हुए छात्रों को मदद की, विदेश मंत्री कभी भी अपने कर्तव्य को निभाने में पीछे नहीं रही हैं। सुषमा स्वराज ने लोगों से कहा कि यदि उन्हें वीजा या पासपोर्ट के संबंध में किसी भी तरह की मदद चाहिंए तो वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या ट्विटर के माध्यम से उनके संपर्क में रह सकते हैं। सुषमा स्वराज के बारे में सबसे अधिक आकर्षक बात यह है कि वह राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना, जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। इसी तरह की स्थिति तब सामने आई, जब एक पाकिस्तानी पत्नी अपने पति को भारत लाना चाहती थी यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसे भारत में उचित स्वास्थ्य देखभाल मिल सकता है। उसके वीजा को नामंजूरी मिलने के बाद, उसने एमईए मंत्री को ट्वीट किया। सुषमा ने  शीघ्र निर्णय लिया और पाकिस्तान में भारतीय दूतावास से इस मामले को देखने के लिए कहा और उसे विश्वास दिलाया कि वह अपने पति के बेहतर उपचार के लिए उन्हें भारत लाने में सक्षम है।

 

अमित शाहअमित शाह

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सबसे अच्छे चुनाव रणनीतिकार बन गए हैं, देश में ऐसा अध्यक्ष शायद ही कभी देखा गया हो।

अमित शाह ने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में व्यापक जीत के लिए भगवा पार्टी का नेतृत्व किया, जबकि मणिपुर राज्य में पहली बार महत्वपूर्ण पकड़ बनाई। बीजेपी ने गोवा विधानसभा चुनावों में 13 सीटों पर जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गठबंधन बनाने में कामयाब रही। “चाणक्य”, जैसा कि पार्टी के लोग उन्हें इसी नाम बुलाते हैं, पंजाब में अपनी पहुँच बनाने में असफल रहा। जैसा कि अकाली-बीजेपी गठबंधन को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अमित शाह और नरेंद्र मोदी दोनों ने भाजपा के विजयरथ को जारी रखा है और अब उनकी नजर राज्य चुनावों और आने वाले 2019 के लोकसभा चुनावों पर होगी। वे अपने 2014 के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेंगे।

 

राहुल गांधीराहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की गंभीर बीमारी के कारण, कांग्रेस पार्टी की कमान युवा राहुल गांधी के हाथों में हैं। राहुल गांधी ने जिस समय पार्टी का जिम्मा उठाया, उस समय पार्टी की स्थिति बेहद खराब थी, जैसा कि पार्टी कई विधानसभा चुनावों में हार का सामना कर चुकी थी। हालांकि पंजाब में पार्टी, अकाली-बीजेपी गठबंधन वाली पार्टी को मात देने में कामयाब रही, इसी के साथ राहुल गांधी के लिए एक उम्मीद की किरण भी जागी। वर्ष के अंत में सोनिया गांधी द्वारा अंतरिम प्रमुख राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी की कमान सौंप दी गई थी। हालांकि जैसे ही राहुल ने कांग्रेस के शासनकाल को संभाला, पार्टी को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन गुजरात, जैसा कि यह भाजपा का गढ़ माना जाता है, के नतीजों ने पार्टी का मनोबल और भी बढ़ा दिया, हालांकि कांग्रेस ने कई लोकसभा और राज्य विधानसभा उप-चुनावों में भी जीत दर्ज की। 2017 के सकारात्मक नतीजों के बाद उनका निशाना अब पार्टी को मजबूत बनाने पर होगा, जिसे भाजपा लहर ने खत्म कर दिया था।

 

नीतीश कुमारनीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने के बाद पुनः कार्यभार संभाल लिया है, जैसा कि आरजेडी के साथ गठबंधन में उनकी पिछली सरकार गिर गई थी। नीतीश कुमार ने अपने इस निर्णय के पीछे बिहार में फैली समस्याओं को इसका कारण बताया था।  हालांकि, बिहार के लंबे समय तक के कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री, अपने पुराने साथी भाजपा जो दुश्मन बन गई थीं, की मदद से एक नई सरकार बनाई। छह बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए एक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य उन प्राथमिक प्रथाओं को समाप्त करना है जिन्होंने वर्षों से राज्य के विकास को प्रभावित किया है। राज्य में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) ने राज्य में हाल ही के हुए विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है और समाज में महिलाओं को अधिकार दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की संख्या 10 लाख एसएचजी तक बढ़ाने की योजना बनाई थी, जबकि राज्य में महिलाओं को सशक्त बनाने के एक और कदम में, नीतीश कुमार ने शहरी और स्थानीय निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व का 50% तक कर दिया है, जिससे महिलाएं बेडियों के बंधन से बाहर निकलेंगी और सरकार के कामकाज में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगी।

 

सुरेश प्रभुसुरेश प्रभु

यह वर्ष पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु के लिए एक उतार-चढ़ाव भरा रहा, जैसा कि केंद्रीय मंत्री चारों और हो रही दर्दनाक रेल दुर्घटनाओं के कारण विवादों में घिरे रहे। हालांकि, उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी कार्यों को वित्त पोषित करने के लिए ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ (आरआरएसके) की शुरुआत की। सुरेश प्रभु 2020 तक ब्रॉड गेज पर मानव रहित क्रॉसिंग लेवल को खत्म करने की नीति के साथ आए थे। इसके अलावा मंत्री ने देश में 200 रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई की सुविधा शुरू करवाई। कैबिनेट के फेरबदल में सुरेश प्रभु को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में मंत्री पद पर नियुक्त किया गया और देश के भीतर मौजूद निवेश के अवसरों के बारे में खुलासा करते हुए कई देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंधों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने भारतीय निवेश की संभावनाओं को उजागर करने के लिए, कि वे आने वाले सालों में आर्थिक शक्तिशाली देश के रूप में भारत की सफलता की कहानी का हिस्सा कैसे बन सकते हैं, सभी निवेशकों और कॉर्पोरेट संगठनों को लाने के लिए इंडिया इंक से मुलाकात की है। उन्होंने निवेशकों और उपभोक्ताओं की उत्पाद अपेक्षाओं को पूरा करने हेतु नियमित मानक के मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की।

* सूची का क्रम राजनीतिक व्यक्तित्वों के स्थायित्व का प्रतिनिधित्व नहीं करता

 

Summary
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2017-18 के शीर्ष दस भारतीय राजनीतिक व्यक्तित्व
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इस तथ्य से राजनीति की बदलती हुई प्रकृति को देखा जा सकता है कि कैसे भारत का वैश्विक स्तर प्रत्येक गुजरते हुए वर्ष के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।