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बॉलीवुड में कैसे पहुंचा “मी टू” अभियान

October 3, 2018
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बॉलीवुड में कैसे पहुंचा “मी टू” अभियान

# मी टू – एक ऑनलाइन आंदोलन है, जिसने अक्टूबर 2017 में बहुत ही तेजी से फैलते हुए हमारे बेव के हर एक कोने को कवर किया। “मी टू” यौन उत्पीड़न के मामलों का पता लगाने का एक बेहतरीन माध्यम है। इस आंदोलन की शुरुआत, लगातार यौन उत्पीड़न के आरोप झेल रहे हॉलीवुड निर्माता हार्वे वेनस्टेन के खिलाफ उद्योग से कम से कम 80 महिलाओं द्वारा आवाज उठाने के बाद हुई।

“मी टू” की लहर हॉलीवुड में दौड़ रही है, यह आंदोलन पूरे विश्व में भ्रमण कर रहा है – विभिन्न देशों की महिलाएं जो उत्पीड़न का सामाना कर रही हैं, के बारे में यह तेजी से जानकारी संचारित कर रहा है। बॉलीवुड की आकर्षक गलियों में कोई अपवाद नहीं है। ताजा खबरों में, अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने, दस साल पहले नाना पाटेकर पर शूटिंग के दौरान बदतमीजी और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। हालांकि यह घटना अभी भी जांच के अधीन है, फिर भी इन तनावपूर्ण समय में एक असहज सवाल उठता है। क्या हमारा बॉलीवुड उद्योग महिलाओं के लिए सुरक्षित है?

महिलाओं का बॉलीवुड से नाता

बॉम्बे को अवसरों और सपनों का शहर कहा जाता है। आखिरकार, यह भारत की मनोरंजन राजधानी जो ठहरी। हालांकि शहर, फिल्मों और संगीत की इस आकर्षक दुनिया में कुछ कमियां हैं। प्रगति के कुछ वर्षों बाद, हमारी फिल्म उद्योग अभी भी महिलाओं के प्रति काफी उदासीन और अपरिवर्तनीय बना हुआ है।

अभिनेत्रियां कई बार फिल्म उद्योग में पुरुषों और महिलाओं के बीच वेतनमान अंतर के खिलाफ शिकायत करने के लिए आगे भी आई हैं। आगे बढ़ते हुए, वस्तुनिष्ठता एक समस्या है जो गोपनीयता के साथ बिल्कुल नहीं। इन दिनों फिल्मों में आइटम गाने एक शर्त की तरह लगते हैं, जिसमें एक महिला डांसर को ‘छोटे’ कपड़ों में पुरुषों के झुंड़ के बीच नाचते हुए दिखाया जाता है। सबसे दुखद हिस्सा सामान्यीकरण है, ये गतिविधियां हमारे मनोरंजन का साधन बनती है जिसे देखकर हम सीटी बजाते हैं साथ ही साथ हमारे फिल्म निर्माताओं के लिए भी ये गतिविधियां महत्वपूर्ण होती हैं।

फिल्म उद्योग में यौन उत्पीड़न

दुर्भाग्यवश, “कास्टिंग काउच” एक ऐसा शब्द है जो मनोरंजन उद्योग में – भारत और बाहर दोनों जगह पर काफी लोकप्रिय है। मोटे तौर पर, यह एक कर्मचारी या अधीनस्थ प्राधिकारी वर्ग द्वारा पेशे या अन्य करियर से संबंधित लाभों में प्रवेश के बदले यौन सहमति के लिए पूछी जाने वाली प्रक्रिया है। पिछले कुछ वर्षों में, कास्टिंग काउच के साथ बॉलीवुड के कई ज्ञात चेहरे खुलकर सामने आए हैं।

कल्कि कोचलिन से लेकर कंगना राणावत तक और यहां तक कि रणवीर सिंह और आयुष्मान खुराना वर्षों से बॉलावुड के इस द्वेषपूर्ण पक्ष का सामना करने की बात साझा की। रणवीर सिंह ने यह भी बात कही है कि यह कितना आम है, खासकर फिल्म उद्योग में, जहाँ पर प्रवेशकर्ताओं को कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ता है। निश्चित रूप से यह बॉलीवुड के चमकादार चेहरे पर एक एक बड़ा सा धब्बा है, जहाँ पर प्रवेशकर्ताओं को अक्सर यह बताया जाता है कि उन्हें इस उद्योग में शामिल करते वक्त कोई भी “प्रतिरोधी” रवैया नहीं अपनाया जाएगा।

कास्टिंग काउच की प्रक्रिया बॉलीवुड का गंदा ‘रहस्य’ बनी हुई है, उद्योग की अभिनेत्री बार-बार आगे आती हैं, सेट पर उत्पीड़न के अपने अनुभव साझा करती हैं। नाना पाटेकर के खिलाफ तनुश्री दत्ता के आरोपों पर हालिया रोशनी के साथ, कई बॉलीवुड हस्तियां एकजुटता के साथ उनके पक्ष में आई हैं। दावे सच हैं या नहीं, उन्होंने उद्योग में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा, सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या बॉलीवुड में महिलाएं सुरक्षित हैं?

सच्चाई कड़वी लग सकती है पर सच्चाई यह है कि महिलाएं अकेले बॉलीवुड में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में ही सुरक्षित नहीं है। कारण सीधा सा है, यह समस्या उद्योग में केवल कुछ शक्तिशाली निर्माता या निर्देशकों की तुलना में बहुत अधिक है जो महिलाओं का लाभ उठाते हैं। यह सामान्य मानसिकता है जो भ्रष्ट है और बड़े पैमाने पर, यह महिलाएं ही हैं जो इन गंदे इरादों का शिकार हो जाती हैं। इस संबंध में, यह कहना गलत होगा कि बॉलीवुड महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है – क्योंकि यह कई लोगों के लिए एक अद्भुत अनुभव भी रहा है। ऐसी कई महिलाएं हैं जो इन गुप्त दरिंदों के खिलाफ लड़ी हैं और नई आवाज़ें हर दिन संघर्ष में शामिल रहती रहती हैं।

दुर्भाग्यवश, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न एक ऐसी घटना है जो न केवल फिल्म उद्योग तक ही सीमित है बल्कि यह लगभग हर पेशे में अपनी पकड़ बना चुकी है। बॉलीवुड महिलाओं के लिए सुरक्षित है? एक और सटीक सवाल यह होगा कि “क्या बॉलीवुड को महिलाओं की सुरक्षा के लिए नए सुधारों को पेश करने की आवश्यकता है?” जिसका जबाब निश्चित ही हां है।

 

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"मी टू" की लहर हॉलीवुड में दौड़ रही है, यह आंदोलन पूरे विश्व में भ्रमण कर रहा है – विभिन्न देशों की महिलाएं जो उत्पीड़न का सामाना कर रही हैं, उनके बारे में तेजी से बात कर रहा है। बॉलीवुड की आकर्षक गलियों में कोई अपवाद नहीं है। ताजा खबरों में, अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने, दस साल पहले पर नाना पाटेकर पर शूटिंग के दौरान बदतमीजी और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। हालांकि यह घटना अभी भी जांच के अधीन है, फिर भी इन घने समय में एक असहज सवाल उठता है। क्या हमारा बॉलीवुड उद्योग महिलाओं के लिए सुरक्षित है?