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भारत में जनसंख्या वृद्धिः कारण और निवारण

July 9, 2018


भारत में जनसंख्या वृद्धिः कारण और निवारण

भारत का हर कोना, हर नुक्कड़, ज्यादा आबादी होने का जीता जागता उदाहरण है। चाहे आप कहीं भी हों मेट्रो स्टेशन, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, सड़क, हाईवे, बस स्टाॅप, अस्पताल, शाॅपिंग माॅल, बाजार, मंदिर या फिर कोई सामाजिक या धार्मिक समारोह, आप इन सब जगहों को दिन के किसी भी समय भीड़ से भरा देख सकते हैं। इससे साफ पता चलता है कि देश में जनंसख्या कितनी ज्यादा है।

सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 1,210,193,422 है, जिसका अर्थ है कि भारत ने एक अरब के आंकड़े को पार कर लिया है। यह चीन के बाद दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और विभिन्न अध्ययनों से यह पता चला है कि सन् 2025 तक भारत चीन को भी पछाड़ देगा और विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। इस तथ्य के बावजूद कि यहां जनसंख्या नीतियां, परिवार नियोजन और कल्याण कार्यक्रम सरकार ने शुरु किए हैं और प्रजनन दर में लगातार कमी आई है पर आबादी का वास्तविक स्थिरीकरण केवल 2050 तक ही हो पाएगा।

जनसंख्या वृद्धि के कारण

भारत में आबादी बढ़ने के दो प्रमुख आम कारण हैंः

– जन्म दर का प्रतिशत मृत्यु दर से अधिक होना। हमने मृत्यु दर के प्रतिशत को तो सफलतापूर्वक कम दर दिया है पर यही कार्य जन्म दर के बारे में नहीं किया जा सकता।

– विभिन्न जनसंख्या नीतियों और अन्य उपायों से प्रजनन दर कम तो हुई है पर फिर भी यह दूसरे देशों के मुकाबले बहुत अधिक है।

बताए गए यह दो कारण विभिन्न सामाजिक मुद्दों से परस्पर संबंद्ध हैं जिससे देश की आबादी बढ़ती जा रही है।

जल्दी शादी होना और सार्वभौमिक विवाह प्रणाली: वैसे तो कानूनी तौर पर लड़की की शादी की उम्र 18 साल है, लेकिन जल्दी शादी की अवधारणा यहां बहुत प्रचलित है और जल्दी शादी करने से गर्भधारण करने की अवधि भी बढ़ जाती है। इसके अलावा भारत में शादी को एक पवित्र कर्तव्य और सार्वभौमिक अभ्यास माना जाता है जहां लगभग सभी महिलाओं की शादी प्रजनन क्षमता की आयु में आते ही हो जाती है।

गरीबी और निरक्षरता: आबादी के तेजी से बढ़ने का एक अन्य कारण गरीबी भी है। गरीब परिवारों में एक धारणा है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। कुछ लोग यह मानते हैं कि बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए भी बच्चों का होना जरुरी है। यह एक अजीब बात है लेकिन सच है कि भारत अब भी गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। कई लोग इस बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं या फिर इससे पूरी तरह अनजान हैं। निरक्षरता भी आबादी बढ़ने का एक अन्य कारण है।

पुराने सांस्कृतिक आदर्श: भारत में बेटे परिवार में पैसे कमाने वाले माने जाते हैं। इस दकियानूसी सोच के चलते माता-पिता पर बेटा पैदा करने का दबाव बहुत बढ़ जाता है। जितने ज्यादा हो उतना और अच्छा।

अवैध प्रवासी: सबसे आखिरी में हम इस तथ्य को नहीं नकार सकते कि बांग्लादेश, नेपाल से अवैध प्रवासियों की लगातार वृद्धि से जनसंख्या घनत्व में बढ़ोत्तरी हुई है।

जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव

आजादी के 67 साल के बाद भी बढ़ती आबादी के कारण देश का परिदृश्य कुछ खास अच्छा नहीं है। ज्यादा आबादी के कुछ खास प्रभाव इस प्रकार हैं:

बेरोजगारी: भारत जैसे देश में इतनी ज्यादा आबादी के लिए रोजगार पैदा करना बहुत मुश्किल है। अनपढ़ लोगों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। इसलिए बेरोजगारी दर लगातार बढ़ती ही जा रही है।

जनशक्ति का उपयोग: भारत में बेरोजगारों की बढ़ती संख्या के चलते आर्थिक मंदी, व्यापार विकास और विस्तार गतिविधियां धीमी होती जा रहीं हैं।

बुनियादी ढांचे पर प्रभाव: दुर्भाग्य से बुनियादी ढांचे का विकास उतनी तेजी से नहीं हो रहा जितनी तेजी से आबादी में वृद्धि हो रही है। इसका नतीजा परिवहन, संचार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि की कमी के तौर पर सामने आता है। झुग्गी बस्तियों, भीड़ भरे घरों, ट्रेफिक जाम आदि में बढ़ोत्तरी हुई है।

संसाधनों का उपयोगः भूमि क्षेत्र, जल संसाधन और जंगल सभी का बहुत शोषण हुआ है। संसाधनों में कमी भी आई है।

घटता उत्पादन और बढ़ती लागत: खाद्य उत्पादन और वितरण बढ़ती हुई आबादी की बराबरी करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है। महंगाई आबादी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।

अनुचित आय वितरण: बढ़ती हुई आबादी के अलावा आय के वितरण में बड़ी असमानता है और देश में असमानता बढ़ती जा रही है।

भारत में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कदम

भारत सरकार, नेताओं और नीति निर्माताओं को एक मजबूत जनसंख्या नीति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए, जिससे देश की आर्थिक विकास दर का बढ़ती आबादी की मांग के साथ तालमेल बिठाया जा सके। आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए जो बड़े कदम उठाए जा चुके हैं उन्हें और जोर देकर लागू करने की जरुरत है। महिलाओं और बच्चियों के कल्याण और उनकी स्थिति को बेहतर करना, शिक्षा के प्रसार, गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन के तरीके, सेक्स शिक्षा, पुरुष नसबंदी को बढ़ावा और बच्चों के जन्म में अंतर, गरीबों में गर्भनिरोधकों और कंडोम का मुफ्त वितरण, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा, गरीबों के लिए ज्यादा स्वास्थ्य सेवा केंद्र आदि कुछ ऐसे कदम हैं जो आबादी को काबू करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

दुनिया में अलग अलग क्षेत्रों में भारत की ताकत को नहीं नकारा जा सकता। चाहे वो विज्ञान और तकनीक हो, मेडिसिन और स्वास्थ्य सेवा हो, व्यापार और उद्योग हो, सेना हो, संचार हो, मनोरंजन हो, साहित्य आदि कुछ भी हो। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा जन जागरुकता बढ़ाने और जनसंख्या नियंत्रण के कड़े मानदंड बनाने से देश की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

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Showing 11 Comments :

Very nice population essay

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shankarparashar July 13, 2018 at 7:36 pm

Thanks for your service

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Ham 2 hmare2 ka Nara ek kanun banana hoga Jo sable liye maidetry hona chhahiye

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Ager Thos kadam Uthaye to Palution Roka ja sakta hai

Kada Kanoon banana Hoga It is Possible .

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Goverment ko iske liye kari kanun banani hogi

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first of all emigrants stop in india
Who increasing the population
On account of relitions

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Nic plz pass to everyone

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अयाझ शेख September 19, 2017 at 5:44 pm

हमारे देश के लगभग 99% लोग धार्मिक आस्था वाले होते है । वो मानते है की ज्यादा आबादी बढाना सही घार्मिक कार्य है । ऐसै मेँ सरकार को जबरन जनसँख्या नियंत्रण कार्य करवा ने से ही जनसंख्या कम हो सकती है । वरना लोग बढाते ही रहेँगे ।

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Please pass to everyone

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Sab logo ko pura nolej hona cagiye or gav gaav par logo ko sikchit karvana cahie tbi sab jagruk hogey

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भारत की आबादी बढती जा रही है। इसको रोकना होगा नही तो खाने-पीने को लोग तरसॆगॆं तडपना पडेगा इसे रोकना होगा।।

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