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छत्तीसगढ़ चुनाव 2018 : रमन सिंह के 15 साल के शासन पर कांग्रेस ने लगाया विराम

December 17, 2018


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छत्तीसगढ़ चुनाव 2018

तीन महत्वपूर्ण राज्यों में हुई आश्चर्यजनक हार पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से देश पर शासन कर रहे हैं, लेकिन कई लोगों का मानना है कि उनकी अजेयता की पोशाक पहनने की शुरुआत अब हुई है। 2019 के आम चुनावों के लिए अब कुछ ही महीने बचे हैं, उसके बाद ऐसा लगता है कि मोदी के “अच्छे दिन” खत्म होने वाले हैं। हाल में हुई यह हार एक बड़ी फिल्म के ट्रेलर की तरह है। प्रशासन में असंतोष, किसान की दुर्दशा, बढ़ती कीमतों और बेरोजगारी ने ही पार्टी को इस स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया है, जिससे आज पार्टी सत्ता से बाहर हो गई है। इसके साथ ही भाजपा की चिंताओं के लिए कांग्रेस, जो पार्टी बड़े पैमाने पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में कार्य कर रही थी, ने वापसी की है और मौजूदा चुनावों के नतीजों को ध्यान में रखते हुए, यह 2019 के आम चुनावों में भी भाजपा को गंभीर चुनौती दे सकती है, यहां तक कि कांग्रेस की इस चुनाव में भी जीतने की संभावना है। लेकिन भाजपा के उपाध्यक्ष के हाथ से छत्तीसगढ़ का फिसल जाना पार्टी के लिए बेहद दर्दनाक रहा है।

2018 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव

हाल ही में हुई तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद तीन बार सत्ता में रहे रमन सिंह इस बार सत्ता से बाहर हो गए हैं। भाजपा ने 2003 के विधानसभा चुनावों में 90 सीटों में से 50 सीटें हांसिल करके मौजूदा मुख्यमंत्री अजीत जोगी के स्थान पर सत्ता में अपना अधिकार जमाया था। मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त होने के बाद अगले 2008 और 2013 के विधान सभा चुनावों में  भी रमन सिंह की अच्छी जीत हुई तथा 15 वर्षों तक लगातार ये सत्ता में रहे हैं। लेकिन 2018 की चुनावी के कारण सत्ता इनके हाथों से चली गई है। इस बार कांग्रेस ने भाजपा पार्टी को काफी अच्छी सीटों से हराया है और यह कांग्रेस द्वारा राज्य में किए गए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण संभव हुआ है। कांग्रेस को इस बार 90 सीटों में से  68 सीटें मिलीं हैं  जबकि भाजपा 15 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही है।

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 49 सीटें मिलीं थीं लेकिन इस बार भाजपा की सीटों में काफी गिरावट आई है। अन्य पार्टियों में जेसीसी (जे) को 5 सीटें और बसपा को (2) सीटें ही मुनासिब हो सकीं हैं।

 अंतिम परिणाम:

कुल सीटेः 90

पार्टी सीटें वोटों की संख्या वोट शेयर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) 68 61,36,420 75.5%
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 15 47,01,530 16.6%
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) 5 10,81,760 5.5%
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 2 5,51,687 2.2%

 आखिर क्या रहा छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार का कारण?

रमन सिंह राज्य में एक लोकप्रिय नेता हैं और गरीबों को सिर्फ 1 रुपये और 2 रुपये प्रति किलो चावल देने वाली उनकी बेहद फाइदेमंद नीति के लिए उन्हें ‘चावल वाले बाबा’ के रुप में भी जाना जाता है। हालांकि, उनकी इतनी अच्छी लोकप्रियता भी भाजपा को इतनी करारी हार से बचा नहीं सकी। भाजपा की इस वरोधी लहर और असंतुष्टि की बजह इसके कुछ घृणास्पद प्रदर्शनों के परिणाम रहे हैं। इन कारणों से ग्रामीण आबादी बहुत परेशान थी तथा भाजपा ने इन्हें बहुत हल्के में ले रखा था और आखिर में ये असंतुष्टि पार्टी के लिए महत्वपूर्ण वोटों को खोने और इसकी हार का कारण बन गई। नोटबंदी और चीजों का कार्यान्वयन यहां तक कि सर्विस टैक्स आदि के कारण मतदाताओं पर, विशेष रूप से शहरी मतदाताओं और छोटे व्यापारियों पर, नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और इसी लिए इन्होंने इस बार सत्ता को बदलने का फैसला किया।

मुख्यमंत्री का चेहरा सामने न लाने के बावजूद भी, कांग्रेस राज्य में भाजपा से जीतने में सक्षम रही है। विरोधी सत्ता और असंतोष के अलावा कुछ अन्य कारकों ने पार्टी के पक्ष में कार्य किया है, जैसे लोगों के अनुकूल आश्वासन शामिल हैं जैसे कि किसानों को विद्युत बिलों में 50 फीसदी सब्सिडी देना, कृषि ऋण छूट और धान के लिए न्यूनतम न्यूनतम समर्थन मूल्य।

इसके बावजूद भी चुनावों में कांग्रेस की ही जीत हुई है, जो 2019 के आम चुनावों को पुनर्जीवित करने वाली और पार्टी के लिए अत्यधिक आशावादी है। यह समय भाजपा के जागृत होने का है, जिसमें पार्टी को स्वयं को दृढ़ रखने की जरूरत है अन्यथा राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा प्रदर्शन पार्टी के लिए केवल कयामत ही ढाएगा।

छत्तीसगढ़ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नक्शा

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