Home / India / भारत के 365 दिन

भारत के 365 दिन

August 22, 2018
by


Please login to rate

भारत के 365 दिन

14 अगस्त 1947 की आधी रात को पं. जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार स्वतंत्र भारत को संबोधित किया और इसी के साथ भारत की एक नई शुरुआत हुई। जब नेहरू ने हमारे राष्ट्रीय ध्वज को फहराकर भाषण दिया, तो इसने हमारे भविष्य को नए उत्साह और आशाओं से भर दिया था।

72 साल बाद, आज भी हम उस देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाते हैं, जिस देश को अपनी विविधता पर नाज है और संस्कृतियों का धनी है।जैसा कि लाल किले पर तिरंगा फिर से फहराया गया, तो आइए हम 15 अगस्त 2017 से 15 अगस्त 2018 तक की अपने देश की भव्यता और इसकी यात्रा के 365 दिनों पर नजर डालें।

अर्थव्यवस्था

2018 की पहली तिमाही में, भारत जो चीन से पिछड़ा हुआ था,अब दुनिया की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था बन गया। 2017 की तुलना में, 2018 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 7.36% अनुमानित की गई थी। जुलाई में, हम फ्रांस को पछाड़ते हुए दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन गए। हमारी उच्च विकास दर को देखते हुए कुछ अर्थशास्त्री यह भी अनुमान लगाते हैं कि आने वाले समय में भारत 5वां स्थान हासिल करने के लिए संभावित रूप से ब्रिटेन को पछाड़ सकता है।

जबकि विश्व बैंक के आंकड़े तेजी से बढ़े है जिसने भारतीयों के गर्व को बढ़ाया है, तो प्रत्येक देश को प्रति व्यक्ति जीडीपी पर ध्यान देना चाहिए, जो कि विकास के लिए एक सबसे उपयुक्त मापदण्ड है। फ्रांस के लिए ये आंकड़े भारत से लगभग 20 गुना हैं। यह एक गंभीर  वास्तविकता है, इसलिए, भारत आज भी वही बना हुआ है।अगर हम अपनी बढ़ती हुई आबादी पर ध्यान दें, तो हमारे विकास के आंकड़े मुश्किल से ही स्पर्धा के योग्य हैं।

पेट्रोल की कीमतें

15 अगस्त, 2017 को भारत में पेट्रोल की कीमतें 68.08 रुपये प्रति लीटर (नई दिल्ली) थीं वही 10 अगस्त, 2018 को ये कीमतें 77.10 रुपये / लीटर (नई दिल्ली) तक बढ़ गई हैं। इसी समय मुंबई में कीमतें क्रमशः 77.21 से 84.54 रुपये हो गई थी। हालांकि, इन 365 दिनों में स्थिरता का ग्राफ स्थिर नहीं रहा है| नियंत्रण से बाहर बढ़ी कीमतों के साथ ही, विपक्षऔर आलोचकों ने बार-बार पेट्रोल मूल्य निर्धारण में दोषों की ओर इशारा किया है। लेकिन जब विनिमय दर (यूएस डॉलर और रुपये) बढ़ती है, तो निश्चित रूप से कुछ भी कहने के लिए यह स्थिति बहुत जटिल हो जाती है।

बेरोजगारी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2017 में देश की बेरोजगारी दर 3.39% से बढ़कर मार्च 2018 में 6.23% तक हो गई। जैसा कि फरवरी 18 में, त्रिपुरा सबसे ज्यादा चौंका देने वाली बेरोजगारी दर 30.3% का साक्षी है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि भारत को डेटा संकट का सामना करना पड़ रहा है, नौकरी संकट का नहीं, जिससे सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास असहमत हैं। व्यास के अनुसार, उच्च बेरोजगारी दर हमारे वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को दर्शाती है। ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) के साथ श्रम बल सहभागिता दर घट गई है। उन्होंने कहा, “नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दोहरे झटके के गंभीर प्रभाव ने अर्थव्यवस्था पर लगातार असर डाला है।”

स्टॉक एक्सचेंज मार्केट

2017 में, भारत को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज – इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज (आईएनएक्स) मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का एक सहायक, जिसे दुनिया में सबसे उन्नत तकनीकी मंच माना जाता है।

2017 अन्य सत्रों में शेयर बाजार के लिए भी एक अच्छा वर्ष था। साल बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों के पूंजी बाजार में 152 लाख करोड़ रुपये ‘जिसमें  45.5 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्ती हुई’ के साथ समाप्त हुआ। इसे 2014 से सामान्य शेयर के लिए सर्वश्रेष्ठ वर्ष घोषित किया गया था। बीएसई सेंसेक्स ने 29.58% के मुनाफे के साथ वर्ष 2017 का समापन हुआ और निफ्टी (एनएसई) ने 30.28% का लाभ दर्ज कराया। हालांकि, 2018 ने विकास की प्रवृत्ति में बदलाव देखा है। जबकि सेंसेक्स ने 31 जनवरी से 31 जुलाई तक 4.05% की सकारात्मक प्रवृत्ति दर्ज की तथा बीएसई 500 में 1% की कमी आई। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप ने क्रमशः 9.27% और 12.36% की गिरावट दर्ज की। जुलाई 2018 में, बीएसई ने 500 में से 300 तक की गिरावट को दर्शाया, जिससे बीएसई की 500 तक के स्तर की वृद्धि एक बहुत संकीर्ण लक्ष्य है।

मुद्रा बाजार में रुपया

15 अगस्त, 2017 को, 1 यूएस डॉलर 64.27 भारतीय रुपये के बराबर था। लगभग एक साल बाद, 13 अगस्त, 2018 को, यह बढ़कर 69.46 (भारतीय रुपए) हो गया। गिरावट की मौजूदा दिशा के विपरीत, भारतीय रुपये ने 2017 में यूएस डॉलर के मुकाबले 6.75% की वृद्धि देखी गई। विनिमय दर मूल्यह्रास ने बढ़ी हुई तेल की कीमतों के साथ-साथ पहले से ही बढ़ रही मुद्रास्फीति पर दबाव डालने की सम्भावना है।

राजनीतिक  माहौल

चुनाव

2017 के उत्तरार्ध में, हिमाचल प्रदेश (नवंबर) और गुजरात (दिसंबर), राज्य विधानसभा चुनाव विशेष रुप से चर्चा का विषय बने रहे। केंद्र में बहुमत प्राप्त करने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), इन दोनों राज्यों में भी सबसे अधिक वोट हासिल करते हुए, अपनी बढ़ती लोकप्रियता को बनाए रखने में कामयाब रही। हालांकि, मार्च2018 में बीजेपी को तब एक बहुत बड़ा झटका लगा, जब योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के बाद, उन्हीं की पुरानी गोरखपुर सांसद सीट समाजवादी पार्टी के एक उम्मीदवार द्वारा जीत ली गई।

फरवरी 2018 भी “सात बहनों” में से 3 – त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधायी चुनावों के लिए मतदान द्वारा भूमिका-निर्धारण करने का गवाह रहा है। त्रिपुरा में 25 वर्ष तक कम्युनिस्ट (पार्टी) के सत्ता में रहने बाद एक आश्चर्यजनक मोड़ तब आया जब भाजपा ने त्रिपुरा में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। मेघालय और नागालैंड में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनए) और नागालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने सबसे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की।

प्रमुख विधेयकपारित किए गए

अगस्त 2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक घोषित कर दिया। इसके पश्चात एक साल बाद, लोकसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह में अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित किया, जिसमें तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी घोषित किया गया। विधेयक अभी भी राज्यसभा में लंबित है। जुलाई 2018 में, लोकसभा द्वारा आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक पारित करने के साथ, अगस्त 2018 से, राज्यसभा द्वारा इसका पालन किया गया। यह विधेयक 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार करने पर मृत्युदंड के साथ-साथ बलात्कार के लिए अन्य कठोर दंड लगाता है।

अगस्त 2018 में, संसद ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (पीओए) संशोधन विधेयक, 2018 पारित किया। यह विधेयक, अन्य संशोधनों के बीच,एससी / एसटी के खिलाफ बिना अदालत के आदेश की प्रतीक्षा किए, अत्याचारों के आरोप में लोगों के लिए अग्रिम जमानत के किसी भी प्रावधान को खत्म कर देगा। 2018 में, लोकसभा ने मानसून सत्र (अगस्त) में 2017 के प्रसिद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (संशोधन) विधेयक को भी पारित किया। यह विधेयक एनआरआई के लिए प्रॉक्सी वोटिंग की अनुमति देता है।

अन्य पहलुओं पर एक नजर

प्रदूषण

मई 2018 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें भारत को वायु-मंडल की गुणवत्ता के मामले में दुनिया का सबसे खराब वायु-मंडल घोषित किया गया। दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में से, 14 शहरदेश से संबंधित थे, जिसमें कानपुर चार्ट के शीर्ष पर था। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, इसमें 6 वें स्थान पर थी। 2017  में, इन आंकड़ों में देश को किसी प्रकार का कोई भी राहत नहीं मिली। 2016 के अंत तक, अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने कहा था कि राजधानी में “धुएं” का स्तर अधिकतम स्वीकार्य सीमा से कम से कम 5 गुना अधिक था।

पत्रकारिता पर वादविवाद

जैसे कि प्रसिद्ध पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या, जिसने सितंबर 2017 में देश को हिलाकर रख दिया, जल्द ही ऐसी एक और घटना फिर से हुई। जब जून 2018 में, कश्मीर पर आधारित समाचार पत्र राइजिंग कश्मीर के मुख्य संपादक शुजात बुखारी को अज्ञात पुरुषों द्वारा गोली मार दी गई। एक पत्रकार जो बिनी किसी सीमाओं या बाधाओं के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के गंभीर मामलों को उठाता है, यह उल्लेख करते हुए कि कैसे 2018 की पहली छमाही में 4 भारतीय पत्रकारों की मृत्यु हुई थी। आज के पत्रकारों द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता को, असहिष्णुता में हो रही वृद्धि को, बड़े पैमाने पर एक खतरा माना जाता है।

महिला सशक्तिकरण

सितंबर 2017 में, निर्मला सीतारमन ने भारत की 26 वीं रक्षामंत्री के रूप में पदभार संभाला, इंदिरा गांधी के बाद ऐसे करने वाली यह दूसरी महिला बनीं। 30 नवंबर 2017 को, लगभग दो दशकों में विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई चानू पहली भारतीय बनीं। बाद में राष्ट्रमंडल खेलों में, इन्होंने एक और स्वर्ण पदक जीता। 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में, भारत के 26 स्वर्ण पदकों में से, 12 विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों द्वारा जीते गए थे और एक मिश्रित टीम द्वारा जीता गया था।

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय के महानिदेशक, देवी प्रसाद मंडल ने अगस्त, 2018 में एक साक्षात्कार के दौरान यह खुलासा किया कि सरकार जनवरी, 2019 में एक नया सर्वेक्षण शुरू करने की योजना बना रही है। सर्वेक्षण का उद्देश्य भारत में अवैतनिक काम की राशि का विवेचन करना है। यह कदम घरेलू कार्यों में कई महिलाओं द्वारा किए गए प्रयासों और श्रम योगदान को अनदेखा करने के संकीर्ण दृष्टिकोण से एक प्रमुख बदलाव के रूप में आता है।

यदि कम से कम भी कहे तो पिछले 365 दिनों मेंपूरे साल में कई उतार-चढ़ाव देखे गए। हालांकि, हमारे देश की विशालता और विविधता के साथ, शायद ही कोई ऐसा हो जो देश से कुछ न होने की उम्मीद कर सकता हो। यहां लाखों छोटी-छोटी ऐसी चीजें हैं जो हमारे देश को “भारत” बनाती हैं जैसा कि हम इसे बड़े ही गर्व से पुकारते हैं। इसलिए, यह स्पष्ट है कि यहाँ कुछ बुराईयां भी हैं। ऐसी परिस्थितियों में अनिवार्य हो जाता है कि क्या महत्वपूर्ण है और क्या सही है आप इस पर अपनी दृष्टि बनाए रखें। जागरूक नागरिक बनना एक अच्छे नागरिक होने की शुरुआत है। जानें कि क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है।

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!

Summary
Article Name
भारत के 365 दिन
Author
Description
15 अगस्त, 2017 से 15 अगस्त, 2018 तक की भारत की यात्रा