Home / / सेल्यूलर जेल – अंडमान की औपनिवेशिक विरासत

सेल्यूलर जेल – अंडमान की औपनिवेशिक विरासत

June 20, 2017


Please login to rate

Visit-to-the-Andamans-hindiभारत की मुख्य भूमि के दक्षिण पूर्व में स्थित अंडमान और निकोबार द्वीप समूह देश के लिए सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। मुख्य भूमि के दर्द भरे रोष से दूर, यह अत्यधिक शांत प्राकृतिक सुंदरता के बीच में स्थित है। यह कल्पना करना बहुत ही कठिन है कि आजादी से पहले यह यह राष्ट्र के सबसे भयभीत भागों में से एक था। पोर्ट ब्लेयर, जो कि एक केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी थी, सेल्युलर जेल का एक घर था। अब यह जेल एक आकर्षक पर्यटक स्थल और स्मारक के रुप में स्थित है।

अंडमान कैसे पहुचें

अंडमान की प्रसिद्ध सेल्यूलर जेल पोर्ट ब्लेयर में स्थित है, जो मुख्य भूमि के दक्षिण में स्थित है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह केन्द्र द्वारा स्थापित राज्य है तथा पोर्ट ब्लेयर इसकी राजधानी है। पोर्ट ब्लेयर तक हवाई या समुद्री साधनों के द्वारा पहुँचा जा सकता है।

हवाई जहाज द्वारा – जेट एयरवेज, जेट लाइट, एयर इंडिया, स्पाइस जेट और गो एयर पोर्ट ब्लेयर – चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर – कोलकाता के बीच नियमित रुप से उड़ानों को संचालित किया जाता है। पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (आईएनएक्स) भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संचालित करता है। यात्रा के लिये पहले से ही आरक्षण किया जाता है क्योंकि अच्छे मौसम के दौरान पर्यटकों द्वारा यात्रा करने के कारण उड़ानें महंगी हो जाती हैं।

समुद्र के द्वारा – यहाँ पोर्ट ब्लेयर और चेन्नई, कोलकाता और विशाखापट्टनम के बीच साप्ताहिक जहाज सेवाएं चलती हैं जिनमें 4 से 5 दिन का समय लगता है। इनमें से ज्यादातर यात्री जहाज और लग्जरी जहाज सीमित हैं।

पोर्ट ब्लेयर के भीतर चारों ओर घूमने के लिए स्थानीय बसें, टैक्सी और ऑटो को किराये पर लिया जा सकता है।

सेल्यूलर जेल का इतिहास

भारतीय सिपाहियों की बगावत (सिपाही विद्रोहआजादी की पहली लड़ाई) के बाद पोर्ट ब्लेयर को निर्वासन 1857 के आरंभ में शुरू हुआ था। अंडमान में कई द्वीपों में दंडनीय कालोनियां थीं जहाँ भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को कारावास या फाँसीं के लिए निर्वासित किया गया था। सेल्यूलर जेल का निर्माण 1896 और 1906 के बीच किया गया था। कैदियों को यहाँ मुख्य भूमि (भारत) और निकट के वाइपर आइलैंड दोनों जगहों से निर्वासित कर दिया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों ने पोर्ट ब्लेयर और सेल्यूलर जेल पर हमला किया और कब्जा कर लिया। भारत की आजादी के बाद यह एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण बन गया।

निर्माण और लेआउट

पोर्ट ब्लेयर, अंडमान की सेल्यूलर जेल को एक गोलाकार जेल के रूप में बनाया गया था। पैनाप्टीकॉन एक केंद्रीय निगरानी स्टेशन के चारों ओर निर्मित एक गोलाकार जेल है। इस मामले में पोर्ट ब्लेयर की जेल को एक सेवेन-स्पोक व्हील के रूप में बनाया गया था। परिसर के भीतर निर्मित तीन निगरानी टावरों से स्पोक्स या जेल की सेलों को सुरक्षित रखा गया था। तीन मंजिला जेल में प्रत्येक मंजिल में 696 कक्ष थे जो ईंट की दीवारों और धातु के दरवाजों से एक-दूसरे से अलग किए गए थे। दरवाजे से लगभग 10 फीट ऊपर एक रोशनदान ही केवल निकास था। प्रत्येक स्पोक और कैद खाने की लाइन अगले स्पोक के पिछले भाग में खुलती है, जिससे इसमें कैदी आपस में बातचीत या किसी प्रकार का लेनदेन नहीं कर कर पाते हैं। सेल्यूलर जेल के निर्माण के लिए ईंटें यहाँ म्यांमार (पूर्व में बर्मा) से लाई गई थी और निर्माण स्वयं कैदियों द्वारा किया गया था। यह जेल औपनिवेशिक भारत के सबसे मजबूत निर्माणों में से एक था और यह भूकंप प्रतिरोधी माना जाता था।

काला पानी की सजा

अंडमान की सेल्यूलर जेल के लिए निर्वासन, हिंदी में काला पानी की सजा के रूप में संदर्भित, भारतीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के समय में सबसे ज्यादा डरावनी सजाओं में से एक था। सेल्यूलर जेल का निर्माण करने से पहले, दंड कॉलोनी एक जंगल थी, जहाँ सबसे जबरदस्त सरीसृप और प्रकृति के निर्दयी रूप के बीच ब्रिटिश अपराधियों को खुद का बचाव करनो के लिए छोड़ा गया था। एक बार जेल बनाई गई थी तो एकान्त कारावास सुनिश्चित करने के लिए विशेष देखभाल की गई थी। यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक माना जाता है। परिवहन की अमानवीय परिस्थितियों के कारण काला पानी की सजा सुनाए गए कई लोगों की द्वीप पर उनकी यात्रा के दौरान मृत्यु हो गई। एक साथ जंजीर में बंधे हुए, भोजन, पानी और किसी बुनियादी सुविधा के बिना रखा गया, और अत्याचार किया गया, उनमें से ज्यादातर ने अपने स्वास्थ्य, विवेक, और यहाँ तक ​​कि सेल्यूलर जेल तक पहुँचने तक जीवन ही खो दिया। वगाँ पहुँचे लोगों की स्थिति बदतर थी। कैदियों को अमानवीय श्रम और असंभव लक्ष्य के अधीन कर दिया गया। उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थ लोगों को भयानक यातना और/या फांसी दे दी गयी थी। सख्त एकान्त कारावास भी लागू किया गया था। कई बार सेल्यूलर जेल में प्लेग या अन्य महामारी फैलने की खबरें थीं। उपचार और बुनियादी मानव अधिकारों से वंचित रखा गया। इसे “पृथ्वी पर नरक” कहा जाता था। अंडमान की सेल्यूलर जेल की यात्रा, भारत की खोई आजादी को जीतने के प्रयास में स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए पीड़ा और संघर्षों की एक बड़ी याद दिलाती है।

प्रसिद्ध कैदी

अंदमान के पोर्ट ब्लेयर की सेल्यूलर जेल को औपनिवेशिक भारत के राजनीतिक कैदियों की सजा के लिए आरक्षित किया गया था। यहाँ पर कई भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को उकसाने वाला समझा जाता था इसलिए उन्हें यहाँ भेजा गया था। सेल्यूलर जेल के सबसे प्रसिद्ध कैदी विनायक दामोदर सावरकर थे, जिन्हें वीर सावरकर नाम से जाना जाता था, जो एक क्रांतिकारी थे। अन्य प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी जो सेल्यूलर जेल के कैदी थे, उनमें दीवान सिंह कालेपानी, बटुकेश्वर दत्त, मौलाना अहमदुल्ला, फजल-ए-हक खैरबादी, बाबाराव सावरकर (वीर सावरकर के भाई), शदन चंद्र चटर्जी, भाई परमानंद, वामन राव जोशी, सोहन सिंह, नंद गोपाल और योगेंद्र शुक्ला शामिल थे।

एक यात्रा करना

सेल्यूलर जेल या पोर्ट ब्लेयर, अंडमान अब भारत के कैदियों और स्वतंत्रता सेनानियों का एक अच्छी तरह से संरक्षित संग्रहालय और स्मारक है। सात स्पोक्स या जेल कक्षों की पंक्तियों में से चार को नष्ट कर दिया गया है। पूर्व कैदियों और राष्ट्रवादियों ने विनाश का विरोध किया और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के विशाल संघर्ष और त्याग के प्रमाणों को सुरक्षित रखने की मांग उठाई। आगंतुक अब कक्षों की तीनों पंक्तियों, फांसी का तख़्ता और कार्यालयों की अवशेषों की यात्रा कर सकते हैं। औपनिवेशिक भारत की कई तस्वीरों और वस्तुओं को वहाँ संरक्षित किया गया है। सेल्यूलर जेल की यात्रा कई लोगों के लिए दुखदायी हो सकती है लेकिन यह भारतीय इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए बहुत अधिक मूल्यवान और शैक्षणिक अनुभव है।

सेल्यूलर जेल यात्रियों के लिए सूचना

सेल्यूलर जेल का पता – सेल्यूलर जेल, जीबी पंत अस्पताल के निकट, पोर्ट ब्लेयर

सोमवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर बंद

सेल्यूलर समय- शुबह 9 बजे से शाम 12 बजे तक और शाम 1 बजे से शाम 4:15 बजे तक

सेल्यूलर जेल के लिए प्रवेश टिकट दरें –

वयस्क और 5 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चे: प्रति व्यक्ति 10 रुपये

5 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे: प्रवेश शुल्क नहीं

स्टिल कैमरा – 25 रुपये

वीडियो कैमरा – 100 रुपये

लाइट और साउण्ड शो का समय –

हिंदी शो – सभी दिन शाम 6 बजे और शाम 7:15 बजे (सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को छोड़कर)

अंग्रेजी शो – सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को शाम 7:15 बजे