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स्वच्छ गंगा मिशन ने 2,000 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं को दी मंजूरी

August 16, 2017


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Clean-Gangaभारत भूमि पर कई नदियाँ अपनी लंबाई और चौड़ाई में बहती हैं, इन्हीं में से एक नदी है गंगा, जो अपने पर्यावरणीय, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व से काफी महत्वपूर्ण है। गंगा हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और भारत के उत्तरी और पूर्वी भागों में 2500 किलो मीटर से अधिक लंबे मैदानी क्षेत्र को अपना आर्शीवाद देते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। गंगा भारत की 26 प्रतिशत भूमि, 30 प्रतिशत जल संसाधनों और 40 प्रतिशत जनसंख्या के लिए जीवन दायिनी है।

आर्थिक मूल्य होने के अलावा, गंगा भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है तथा इसका सांस्कृतिक और अध्यात्मिक महत्व इसकी सीमाओँ से दूर भी उतना ही है जितना पास में है। भारत की जीवन रेखा कही जाने वाली गंगा नदी भारत के 11 राज्यों की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या को पानी उपलब्ध करवाती है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस नदी को दुनिया की 5 वीं सबसे दूषित नदी घोषित किया गया है।

गंगा में होने वाला प्रदूषण कोई नई बात नहीं है, इसको दूषित करने में दशकों से चली आ रही एक पुरानी और निरंतर प्रक्रिया का हाथ है। आज यह नदी मानव अपशिष्ट और औद्योगिक प्रदूषकों के साथ गंभीर रूप से प्रदूषण का शिकार है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर रही है। वास्तव में, गंगा का 600 किलोमीटर से अधिक लंबा क्षेत्र अनिवार्य परिस्थितिक रूप में मृत पाया गया।

नमामि गंगे कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नदी को बचाने के लिए शीघ्र ही कार्यवाई करने की जरूरत को महसूस करते हुए नदी की सफाई करने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जताया। इसके तहत उन्होंने जुलाई 2014 के बजट में नमामि गंगे परियोजना की पुष्टि की। सरकार द्वारा चलाया गया “नमामि गंगे कार्यक्रम” एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। जून 2014 में केन्द्र सरकार द्वारा “फ्लैगशिप प्रोग्राम” के रूप में 2000 करोड़ रूपये के बजट के साथ इस परियोजना को मंजूरी दे दी गई। गंगा और इसकी सहायक नदियों को व्यापक स्तर पर साफ करना इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित प्रयासों के माध्यम से राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण में प्रभावी कमी, संरक्षण और कायाकल्प करना शामिल हैः

  • सीवरेज ट्रीटमेंट इंन्फ्रास्ट्रक्चर
  • नदी के पास में विकास कार्य
  • नदी के सतह की सफाई
  • जैव विविधता
  • वनों का रोपण
  • लोगों को जागरूक करना
  • उद्योगों से निकलने वाले तरल प्रदूषकों की निगरानी
  • गंगा ग्राम

अगस्त 2017 में इसकी स्थिति

गंगा की सफाई और कायाकल्प को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ गंगा मिशन के तहत बिहार, पश्चिमी बंगाल और उत्तर प्रदेश में लगभग 2033 करोड़ रूपये लागत की 10 परियोजनाओँ को मंजूरी दी गई है। स्वच्छ गंगा के राष्ट्रीय मिशन की 5 वीं कार्यकारी समिति की बैठक में निम्नलिखित परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है-

  • सीवरेज की बुनियादी सुविधाओं और उपचार से संबंधित आठ परियोजनाएं
  • घाट के विकास से संबंधित एक परियोजना
  • गंगा ज्ञान केन्द्र की स्थापना के लिए एक परियोजना

स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण

  • बिहार को इस परियोजना में तीन प्रमुख बुनियादी सीवरेज दिये जाने का प्लान है जिनमें बाढ़, कंकरबाग और दीघा शामिल हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,461 करोड़ रूपये है, जिससे कंकरबाग और बाढ़ में अतिरिक्त सीवरेज का निर्माण होगा।
  • पश्चिमी बंगाल में तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है जिसमें दो परियोजनाएं सीवरेज इस्फ्रास्ट्रक्चर की और एक परियोजना के तहत नदी के किनारों पर विकास कार्य करने के लिए मंजूर किया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 495.47 करोड़ रूपये है। 492.34 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से हावड़ा में गंगा के साथ-साथ टॉली नल्लाह (आदि गंगा को नाम से लोकप्रिय), गंगा की एक सहायक नदी, पर प्रदूषण को कम करने और पुर्नवासन कार्य को संचालित करके नदी का उपचार किया जायेगा।
  • पश्चिम बंगाल के नबाद्वीप शहर में बोराल फेरी और बोरल बाथिंग घाट का अनुमानित 3.13 करोड़ रूपये की लागत से पुनर्निर्मित किया जायेगा। इस नवीनीकरण में नदी के किनारे का संरक्षण, प्रतीक्षा कक्ष और सीढ़ियों का निर्माण तथा बैठने की व्यवस्था की जायेगी।
  • उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले के चुनार शहर में 27.98 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से एक सीवरेज के बुनियादी ढांचे की परियोजना को मंजूरी दी गई है।
  • 46.69 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से गंगा के मार्ग में पड़ने वाले पाँच राज्यों में गंगा में प्रदूषण के स्तर और सफाई पर नजर रखने के लिए गंगा मॉनीटरिंग केन्द्र की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
  • 1.63 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से बायोरिमेडिएशन विधि का उपयोग करते हुए पटना में धानपुर और इलाहाबाद में नेहरू नाले के उपचार के लिए दो पायलट परियोजनाओँ को मंजूरी दी गई है।

एक स्थाई समिति ने जल संसाधन पर अत्यंत चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि गंगा परियोजना के तहत अब तक केवल चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की परियोनाएं शुरू की गईं हैं, ऐसा लगता है कि दिसंबर 2020 तक गंगा सफाई के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकता है।