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विश्व हिंदी दिवस 2019

January 10, 2019


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विश्व हिंदी दिवस 2019

“संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी” – भारतीय संविधान भाग 17 अनुच्छेद 343 (1)

संविधान के अनुच्छेद 351 में हिन्दी भाषा के विकास के लिए राज्य को निदेश वर्णित किये गए हैं, जिसके अनुसार हिन्दी भाषा भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके इसलिए संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करे।

विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य  हिंदी भाषा को विश्व भर में अंतर्राष्‍ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से विदेशों में मनाते हैं। इस दिन सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व हिंदी दिवस की मनाने की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को की थी। तभी से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

विश्व हिंदी दिवस से जुड़ी कुछ बातें

  1. दुनिया भर में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए पहला विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 2006 के बाद से हर साल 10 जनवरी को विश्वभर में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।
  2. 10 जनवरी 2006 को हर साल विश्व हिंदी दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह ने की थी।
  3. भारतीय दूतावास विदेशों में विश्व हिंदी दिवस के मौके पर विशेष आयोजन करते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिंदी में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  4. नॉर्वे में पहला विश्व हिंदी दिवस भारतीय दूतावास ने मनाया था। इसके बाद दूसरा और तीसरा विश्व हिंदी दिवस भारतीय नॉर्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वाधान में लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में बहुत धूमधाम से मनाया गया था।
  5. विश्व हिंदी दिवस के अलावा हर साल 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

स्वतंत्र भारत में हिंदी का महत्व

स्वतंत्रता के कुछ सालों बाद भारत की नव निर्मित सरकार ने विशाल देश में रहने वाले व कई भाषाएं बोलने वाले असंख्य लोगों तथा सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों का एकीकरण करने की आवश्यकता महसूस की। एकीकरण के पूर्ण होने के लिए भारत को एक विशेष राष्ट्रीय माध्यम की आवश्यकता पड़ी। चूँकि उस समय देश में कोई भी राष्ट्रीय भाषा नहीं थी इसलिए प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया कि हिंदी वह भाषा हो सकती है, जिसकी वे तलाश कर रहे थे। यह निर्णय उस समय एक आदर्श समाधान साबित हुआ।

हिंदी ही क्यों चुनी गयी?

उस समय हिंदी उत्तरी भारत के अधिकांश भागों में बोली जाने वाली भाषा थी और इस तरह प्रशासन ने भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण का कार्यक्रम शुरू करने के लिए हिन्दी को सुरक्षित रूप से राष्ट्रीय भाषा मान लिया और फिर इसे लागू कर दिया। फिर बाद में यह स्वीकार किया गया कि यह उन समस्याओं का सही समाधान नहीं था, जिसका वे सामना कर रहे थे। देश का बहुत बड़ा एक हिस्सा, जो वास्तव में इस बात से सहमत नहीं था कि जो भाषा उनके लिए चुनी गयी थी, वह उनकी संस्कृति से अलग थी। इसी कारण हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी शासकीय भाषा की श्रेणी प्रदान की गई।

हिंदी का इतिहास

भारत में हिंदी की वंशावली की जानकारी इन्डो-आर्यन युग, जब आर्य लोग पहली बार देश में आए थे, उनसे मिल सकती है। इस भाषा का सम्बन्ध इंडो-यूरोपियन भाषाओं के समूह से है। हिंदी को भारत की शासकीय भाषाओं में से एक का स्थान देने के साथ ही सरकार ने अच्छे प्रभाव के लिए व्याकरण और शब्दावली भी इस्तेमाल करने की कोशिश की। समानता की भावना लाने के लिए देवनागरी को एक लिपि के रूप में इस्तेमाल किया गया। इस अर्थ में हिंदी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा भी है और यह उन देशों में लोगों द्वारा बोली जाती है जहाँ भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो हैं।

आइए अपनी मातृभाषा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के प्रति वचनबद्ध हों।