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यातायात के संकेत और सड़क सुरक्षा

November 21, 2018


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यातायात के संकेत और सड़क सुरक्षा

यातायात संकेत और सड़क सुरक्षा उपाय सीखकर खुद को बचाइए

सड़क पर यातायात संकेत मूक वक्ता होते हैं। सड़क पर पैदल चलने वाले व्यक्ति और मोटर चालकों को सड़क के नियमों की जानकारी होनी बहुत जरूरी है।

यातायात के नियम सड़क की स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं। यातायात के नियमों के भली प्रकार रख-रखाव को सुनिश्चित करने के लिये चौराहों या जंक्शनों पर, चालकों को दिशा-निर्देश या चेतावनी देते हैं। सड़क के नियमों से अनजान होने पर जीवन और संपत्ति को नुकसान हो सकता है। इससे जान-माल को हानि पहुँच सकती है। एक व्यक्ति को भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से पहले यातायात के नियमों और प्रतीकों की (लिखित या मौखिक) परीक्षा से परिचित होना चाहिए।

तीन प्रकार के सड़क सुरक्षा संकेत

1. अनिवार्य संकेतः ये संकेत यातायात के सरल संचालन हेतु उपयोग किये जाते हैं और सड़क उपयोगकर्ताओं को कानूनों के नियमों और प्रतिबंधों के बारे में जानकारी देते हैं। कानून के अनुसार, इन नियमों और प्रतिबंधों का उल्लंघन करना अपराध है।

2. चेतावनी संकेतः ये संकेत पहले से ही सड़क की खतरनाक परिस्थितियों के बारे में जागरूक करते हैं। ताकि चालक, आगे आने वाली स्थितियों से निपटने के लिये आवश्यक कार्रवाई करे।

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3. सूचनात्मक संकेतः इन संकेतों से यात्रियों को स्थानों, वैकल्पिक मार्गों, भोजनलयों, सार्वजनिक शौचालयों, अस्पतालों आदि जैसे प्रमुख स्थानों के बारे में जानकारी  है।

सड़क सुरक्षा शिक्षा ­-

अक्सर स्कूलों, कालेजों, कार्य स्थलों, सभा और सार्वजनिक स्थानों में सड़क सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाती है। जबकि, जन जागरूकता के अन्य तरीके भी हो सकते हैं।

  • स्कूलों में पुस्तिकाएं और पर्चे बाटें।
  • सड़क सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं के नकारात्मक पहलुओं पर कक्षा में प्रस्तुतीकरण करें।road-safety-infomatory-signs
  • साथियों के साथ ऑनलाइन सामग्री साझा करें।
  • रोकथाम संबंधी उपायों के सीखने में माता-पिता बच्चों के बढ़ावा दें।
  • सड़क के बुनियादी कानूनों और नियमों के बारे में शिक्षकों को शिक्षित करना।

सड़क सुरक्षा समारोह

हर साल, भारत के प्रमुख मेट्रो शहर सड़क सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाते हैं। पूरे सप्ताह के दौरान, विभिन्न राज्यों के परिवहन विभाग स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों और सड़कों पर सामुदायिक भवन प्रक्रिया के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाती है। वे लोगों को नशे हालत में ड्राइविंग न करने, तेज रफ्तार में गाड़ी न चलाने की सलाह देते हैं। बाइकर्स के लिए हेल्मेट पहनने के महत्व और चार-पहिया चालकों के लिए सीट बेल्ट के परिणाम के बारे में भी संवेदनशील बनाते हैं। कभी-कभी, वे जनता के साथ संवाद करने के लिए विषयों का चयन करते हैं। रोड सुरक्षा सप्ताह 2018 भारत में 19-25 नवंबर से मनाया जाएगा।

सड़क से नरक: भारत में दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों पर राष्ट्रीय गणना

भारत में ड्राइविंग आपकी और मेरी कल्पना के मुकाबले अधिक खतरनाक हो सकती है। 2017 में प्रकाशित सांख्यिकीय रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर 10 मिनट में 3 मौतें होती हैं। जहाँ सभी विकसित राष्ट्र आकस्मिक मौतों पर अंकुश लगाने के लिए अपना ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, वहीं भारतीय सड़कों का हाल बद से बदतर हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (2013) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाग्रस्त मौतें (सड़क पर 105,725 लोग मारे गए) हुईं हैं। भारतीय राज्यों में महाराष्ट्र (जहां मुंबई में सबसे ज्यादा मौत के मामले हैं, यानी 25,471 सड़क दुर्घटनाएं) तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बाद सूची में सबसे ऊपर है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अक्षम कानून प्रवर्तन, शराब पीकर गाड़ी चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों का पालन करने वाले कम उपयोगकर्ता और वाहनों को चलाने में बाल संयम की कमी भारत में सड़क दुर्घटनाओं की इतनी उच्च दर के पीछे मुख्य कारण हैं।

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