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सरदार पटेल की जीवनी

October 31, 2018


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सरदार पटेल की जीवनी

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि यदि सरदार बल्लभ भाई  पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते, तो भारत का भाग्य कुछ अलग होता। उन्होंने यह बात श्री सरदार वल्लभभाई स्मृति स्मारक के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही थी। मोदी ने कहा कि सरदार पटेल एक उदार और धर्मनिरपेक्ष नेता थे जिस वजह से वह बहुत ही लोकप्रिय थे।

सरदार वल्लभभाई झावरभाई पटेल, जिन्हें सरदार पटेल के नाम से जाना जाता है, का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था और वह गुजरात के एक छोटे से शहर में पले बढ़े थे। पटेल जी का जन्म स्थान सही से ज्ञात नहीं है लेकिन उनका जन्म स्थान करमसद माना जाता है। सरदार पटेल बहुत ही विनम्र परिवार से संबंधित थे और गाँव में अन्य परिवार की तरह उनके परिवार के पास औपचारिक शिक्षा नहीं थी। लेकिन पटेल जी ने अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के कारण अपने जीवन में काफी कामयाबी हासिल की। वह अपने पिता जी के साथ खेतों में जुताई और बीज बोने में उनकी मदद करते थे और अपने पिता से अंकगणितीय सारणी को सीखते थे।

पटेल जी की शादी 18 साल की उम्र में गण के गांव की झावेर बा से हुई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, जनवरी 1909 में बॉम्बे (वर्तमान में मुंबई) में उनकी पत्नी की कैंसर से मृत्यु हो गई। पटेल जी इतने मजबूत व्यक्ति थे कि उनकी पत्नी की मौत की खबर मिलने पर भी वह अपने कर्तव्यों को निभाने में पीछे नहीं रहे। जिस समय उन्हें अपनी पत्नी की मौत की खबर मिली उस समय वह अदालती कार्यवाही में व्यस्त थे। उन्होंने अपनी पत्नी की मौत की खबर को एक नोट में पढ़ा और बापस इसे अपनी जेब में रख लिया और मामले को पूरा करने के लिए अदालत में अपनी जिरह जारी रखी। अदालती कार्यवाही पूरी होने के बाद ही पटेल जी ने अपनी पत्नी की मृत्यु की सूचना सबको दी। उस समय सरदार पटेल सिर्फ 33 वर्ष के थे और उन्होंने दोबारा शादी न करने का फैसला लिया।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

बल्लभ भाई पटेल जी ने नाडियाड, पेटलाद और बोरसद से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने 22 साल की उम्र में 10वीं की शिक्षा (मैट्रिकुलेशन) पूरी की। हालांकि पटेल जी के दोस्त उन्हें सिर्फ एक आम लड़का मानते थे लेकिन पटेल ने खुद के लिए मंसूबे बहुत बड़े थे। पटेल जी बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड में पढ़ाई करना चाहते थे। उन्होंने एक वकील बनने के लिए अध्ययन किया और अपने सपने को सच करने के लिए पैसे की बचत करना शुरू किया। सरदार पटेल एडवर्ड मेमोरियल हाई स्कूल (ईएमएचएस), बोरसद के पहले अध्यक्ष और संस्थापक बने। जब पटेल जी मिडल टेम्पल इन में आगे के अध्ययन के लिए इंग्लैंड चले गए थे उस समय उनकी आयु 36 वर्ष की थी। पटेल जी ने 30 महीने में ही 36 महीने का कोर्स पूरा किया और अपनी पिछली कॉलेज पृष्ठभूमि के बिना अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। पटेल जी वापस भारत आए और अहमदाबाद में बस गए।

सरदार पटेल 1917 में अहमदाबाद के स्वच्छता आयुक्त बने। कई नागरिक मुद्दों पर ब्रिटिश सरकार के साथ संघर्ष की बजह से पटेल जी राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते थे।

सरदार पटेल जी को 1922, 1924 और 1927 में अहमदाबाद के नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में भी चुना गया था। सरदार पटेल जी ने  बिजली, जल निकासी, स्वच्छता प्रणाली और स्कूल प्रणाली में संशोधन करके शहर के सुधार के लिए काम किया था।

सरदार पटेल और गांधी जी

सरदार पटेल कानून का अभ्यास रहे थे जब वह महात्मा गांधी के महान आदर्शों  के सम्पर्क में आए। हम सभी जानते हैं कि गांधी जी अहिंसा (अहिंसा) और सत्याग्रह के सिद्धांतों को मानने वाले थे। इन्होंने इन्हीं हथियारों के साथ ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। प्रारंभ में, सरदार पटेल जी का गांधी जी के सिद्धांतों की तरफ झुकाव नही था लेकिन चंपारण घटना के बाद, वह महात्मा गांधी के समर्थक अनुयायियों में से एक बन गए।

सरदार पटेल ने 1927 में सरकार द्वारा भूमि राजस्व में अनौपचारिक वृद्धि के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह में बारडोली के किसानों का नेतृत्व किया। प्रत्येक गांव ने सरदार पटेल को आश्वासन दिया कि किसी भी कर का भुगतान नही किया जाएगा और वे साहस और अहिंसा से लड़ेंगे। सरदार पटेल के भाषणों से युक्त दैनिक संघर्ष विज्ञप्ति गांवों में वितरित किए गए। प्रभाव इतना मजबूत था कि लगभग 87,000 ग्रामीणों ने अपने परिवारों और मवेशियों के साथ वास्तव में खुद को अपने घरों में तीन महीने के लिए बंद कर दिया। खेतों में कोई काम नहीं करता था। इस जन आंदोलन को देखते हुए, सरकार ने अपने कर की वृद्धि को कम कर दिया। सरदार पटेल के लिए, यह उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

इन्होंने गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन को पूरी तरह से समर्थन दिया। सरदार पटेल ने उस समय 300,000 से अधिक सदस्यों की भर्ती की थी और 15 लाख रुपये धन इकट्ठा किया गया था। इन्होनें अपने अंग्रेजी शैली के कपड़े फेंक दिए और यहां तक ​​कि इनकी बेटी और बेटे ने भी ऐसा ही किया। इन्होंने अपने कपड़ों को खादी में बदल दिया।

इन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया बल्कि अस्पृश्यता, शराब और जाति पर आधारित भेदभाव जैसे सामाजिक मुद्दों के खिलाफ बड़े पैमाने पर काम किया और इन्होनें महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया।

दांडी यात्रा में सहभागिता

गांधी जी ने सूरत के पास एक छोटे से समुद्र तटीय गांव दांडी में समुद्र के पानी से नमक के निर्माण को प्रतिबंधित करने के कानून को तोड़ दिया। दांडी यात्रा में, सरदार पटेल ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हें गांधी जी द्वारा यात्रा में आगे चलने के लिए नियुक्त किया गया था। इस दौरान पटेल जी को रास्ते पर गिरफ्तार कर लिया गया था और तीन महीने के लिए कारावास दिया गया था।

सरदार पटेल और स्वतंत्र भारत में इनकी भूमिका

सरदार पटेल भारत के पहले गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री थे। सरदार पटेल गांधी जी के अनुरोध पर पीछे हट गए ताकि नेहरू जी पहले प्रधानमंत्री बन सकें। सभी 16 राज्यों और कांग्रेस के प्रतिनिधियों से गांधी जी ने एक नाम चुनने के लिए कहा था, उनमें से 13 ने पटेल के नाम की सिफारिश की थी। लेकिन पटेल जी ने गांधी जी के अनुरोध पर प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया।

राज्यों का एकीकरण

सरदार पटेल की सबसे प्रशंसनीय और ऐतिहासिक उपलब्धि भारत संघ के अधीन 562 रियासतों का एकीकरण करना था। अपने मजबूत व्यक्तित्व के कारण इस एकीकरण के लिए इन्होनें राजाओं को तैयार किया था। आज तक, इन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिन्होनें भारत को एकजुट किया था।

इनके अंतिम दिन

सरदार पटेल का स्वास्थ्य 1950 में बिगड़ना शुरू हो गया। खांसी में खून की वजह से, मणीबेन ने इनके कार्य और बैठकों को सीमित करना आंरभ कर दिया। निजीकृत मेडिकल स्टाफ को पटेल जी के लिए काम पर रखा गया था। 2 नवंबर के बाद, इनका स्वास्थ्य और भी खराब हो गया और वे बिस्तर तक ही सीमित हो थे। 15 दिसंबर, 1950 को बॉम्बे के बिड़ला हाउस में गंभीर रूप से दिल का दौरा पड़ने (इनका दूसरा दिल का दौरा था) से इनकी मृत्यु हो गई। पटेल जी का सोनापुर (अब मरीन लाइन्स) में दाह-संस्कार किया गया था।

सरदार वल्लभभाई झावरभाई पटेल सामाजिक नेता थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। आज तक, पटेल जी को भारत के सबसे सफल गृह मंत्री के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1991 में उन्हें आधिकारिक तौर पर भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न, से सम्मानित किया गया था। भारत में पटेल जी के जन्मदिवस को सरदार जयंती के रूप में 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। भारत के इस महान व्यक्तित्व को सम्मानित करने के लिए आज कई संस्थानों और स्मारकों का नाम उनके नाम पर रखा गया है।