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72 वां स्वतंत्रता दिवस 2018: इतिहास, समारोह और महत्व

August 18, 2018
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72 वां स्वतंत्रता दिवस 2018: इतिहास, समारोह और महत्व

भारत ने अपने 72 वें स्वतंत्रता दिवस का बड़ी ही धूमधाम और शानशौकत के साथ जश्न मनाया है और अपने सम्पूर्ण गौरव का गुणगान किया है। प्रत्येक भारतीय का हृदय देशभक्ति और एकता की भावना के साथ धड़कता है और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करता है जिन्होंने राष्ट्र और उसके नागरिक को, शक्तिशाली ब्रिटिश शासन से मुक्त कराकर, स्वतंत्रता दिलाई।

“कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें ही। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा।”- हमारे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहे गए इन उत्साही शब्दों ने हमारे हृदय को गर्व की विशाल भावना के साथ भर दिया। अब अतीत इतिहास बन गया है और जो भी पीछे बचा है वह हमारे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भव्यता को दर्शाता है।

स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

इस महान दिन का जिक्र मात्र ही हमारे मन और आत्मा को महान आत्म-सम्मान और देशभक्ति उत्साह के साथ भरने के लिए काफी है। हम उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों से परिचित हैं और उनकी सराहना करते हैं जिन्होंने भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए किए गए संघर्ष के दौरान अपने प्राणों को बलिदान कर दिया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एक जन आंदोलन था जिसने समाज के विविध वर्गों को एकीकृत किया। यह निरंतर विचारधारात्मक परिवर्तन के अधीन भी था। जैसा की भारतीयों ने खुद को ब्रिटिश राज के चंगुल से मुक्त कराने का संकल्प ले लिया था, जिसने फिरंगियों के पास, भारत से प्रस्थान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा था। लेकिन क्या यह उतना आसान था जितना देखने में लगता है? बिल्कुल नहीं। ब्रिटिश संसद ने 30 जून, 1948 तक भारतीयों की सत्ता को एक आदेश के साथ लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपा था। भारतीयों में असहिष्णुता के स्तर को देखते हुए, माउंटबेटन को एहसास हुआ कि अगर वह स्थानांतरण की निर्दिष्ट तारीख तक इंतजार करता है, तो स्थानांतरित करने के लिए कोई शक्ति नहीं छोड़ी जाएगी। इन सभी प्रतिक्रियाओं ने उन्हें स्थानांतरण की निर्धारित तिथि को उससे पहले ही अगस्त 1947 में बदलने के लिए मजबूर कर दिया।

इसलिए अंग्रेजों ने अपनी हार को स्वीकार करना और सत्ता छोड़ना अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ पाया, तो उन्होंने इस सत्य के साथ छेड़छाड़ करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता संग्राम के नाम पर रक्तपात या दंगे को रोक रहे थे। माउंटबेटन ने इस तथ्य को उचित ठहराते हुए कहा, कि “जहाँ भी औपनिवेशिक शासन समाप्त हो गया है, वहां रक्तपात भी समाप्त हो गया है। यह वह कीमत है जो आपने भुगतान की हैं। ”

18 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश स्वतंत्रता अधिनियम, ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में, पारित किया गया था। 15 अगस्त, 1947 को, भारत एक स्वतंत्र देश बन गया और भारतीय इतिहास में यह दिन महान बन गया।

लाल किले का समारोह

हर साल स्वतंत्रता दिवस नई दिल्ली में लाल किले पर बड़े जोश और आनंद के साथ मनाया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से राष्ट्र और नागरिकों को संबोधित करते हुए इस शुभ अवसर पर एक उल्लेखनीय भाषण देते हैं। पूरे भारत से लोग समारोह में भाग लेते हैं। 10 अगस्त से शाम 7:30 बजे से 11 बजे तक लाल किले को लगभग 2,500 दीपकों से प्रकाशित किया जाता है।

72 वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारी 13 अगस्त को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर पूरे जोरों से हुई। स्कूल के बच्चों ने समारोह के लिए तिरंगा पोशाक पहन कर अभ्यास किया। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के दल ने भी ड्रेस रिहर्सल में भाग लिया और अपने मार्च का अभ्यास किया। स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि अन्य भारतीय शहरों में भी आनंद के साथ मनाया जाता है। नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के दल ने भी भोपाल में स्थित मोतीलाल नेहरू पुलिस स्टेडियम में एक पूर्ण ड्रेस रिहर्सल का प्रदर्शन किया। महिला कमांडो फोर्स (डब्ल्यूसीएफ) के कर्मियों ने भी 13 अगस्त को चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में रिहर्सल में भाग लिया।

लाल किले पर ड्रेस रिहर्सल के दौरान सख्त सुरक्षा उपाय किए गए थे। लाल किले में सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए बम निरोधक दल मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्थाओं को मद्देनजर रखते हुए 14 अगस्त सुबह 6 बजे से 15 अगस्त शाम 2 बजे तक मेट्रो स्टेशनों के परिसर में कोई पार्किंग सुविधाएं प्रदान नहीं की जाएगी। आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने अखिल महिला विशेष हथियार और रणनीति (स्वाट) टीम शामिल की है। स्वतंत्रता दिवस के जश्न के दौरान इंडिया गेट और लाल किले के परिसर में महिला कमांडो तैनात किए जा रहे हैं।

72 वें स्वतंत्रता दिवस के बारे में क्या खास है?

यह वर्ष निस्संदेह सामाजिक और आर्थिक विकास के परिप्रेक्ष्य से सबसे खास होने के साथ ही भारत सफलतापूर्वक दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत के कल्याण में कई अन्य विकास कार्यों ने भी इस स्वतंत्रता दिवस को वास्तव में सबसे खास बना दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल 15 जुलाई से प्रभावी रुप से प्लास्टिक और थर्मोकोल वस्तुओं के निर्माण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस कदम ने स्वतंत्रता दिवस से प्लास्टिक के सभी रूपों के उपयोग को प्रतिबंधित करने का संकल्प है। सरकार का यह प्रयास वास्तव में एक प्रशंसनीय है क्योंकि यह पर्यावरण की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की ओर ध्यान केंद्रित करता है।

जन धन योजना के लाभार्थियों के लिए एक और अच्छी खबर इंतजार कर रही है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के दुर्ग से नए कल्याण योजनाओं की घोषणा करने जा रहे हैं। इन योजनाओं में मुफ्त आकस्मिक बीमा राशि रु.1 लाख तक शामिल हो सकती है।

सूत्रों के आनुसार नरेंद्र मोदी अटल पेंशन योजना की राशि में एक महीने में पांच हजार रुपए से एक महीने में दस हजार रुपये तक की वृद्धि की घोषणा कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक भाषण को सुनें!

 

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भारत ने अपने 72 वें स्वतंत्रता दिवस का बड़े धूमधाम और शानशौकत के साथ जश्न मनाया है और अपने सम्पूर्ण गौरव का गुणगान किया है।