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भारत में लोकप्रिय शिव मंदिर जहां आपको जीवन में एक बार जरूर जाना चाहिए

January 28, 2019


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भारत में लोकप्रिय शिव मंदिर

हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवान शिव को पूरे ब्रह्मांड का निर्माता भी माना जाता है। आम धारणा के अनुसार, अक्सर यह कहा जाता है कि भगवान शिव सर्वव्यापी हैं, सर्वशक्तिमान हैं और एक अस्तित्व के रूप में चेतना में मौजूद हैं। आदियोगी, महादेव और शंभू जैसे कई नामों से पुकारे जाने वाले भगवान शिव की शिवलिंग और रुद्राक्ष सहित कई रूपों में पूजा की जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार जो त्रिमूर्ति की अवधारणा प्रस्तुत करने वाले है, भगवान शिव भी तीन मुख्य देवताओं में से एक हैं। भगवान ब्रह्मा को निर्माता के रूप में जाना जाता है, भगवान विष्णु को पालनकर्ता और भगवान शिव को संहारक के रूप में जाना जाता है। जैसा कि शिव प्रचण्ड देवताओं में से एक हैं, भैरव और नटराज रूप में भी उनकी पूजा की जाती है। महापुरुष भी शिव को कोमल हृदय से मानते हैं और वो भी जो ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यदि आप भगवान शिव के बारे में अधिक जानने के उत्सुक हो रहे हैं, तो आपको भारत में सबसे महत्वपूर्ण और अभिलषित शिव मंदिरों के लिए एक आकर्षक यात्रा करनी चाहिए।

भारत में कुछ सबसे लोकप्रिय शिव मंदिर हैं –

भारत में कुछ सबसे लोकप्रिय शिव मंदिर हैं

तुंगनाथ, रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग में स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। मंदिर उन भक्तों के लिए एक आदर्श स्थान है जो भगवान को समर्पित हैं और साहसी हैं। 3680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित, मंदिर चंद्रशिला के शिखर के ठीक नीचे स्थित है। माना जाता है, सर्वोच्च हिंदू तीर्थ तुंगनाथ मंदिर का इसका इतिहास लगभग 1000 वर्षों का है। यह पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर स्थित दूसरा मंदिर है। मंदिर को महाभारत महाकाव्य के पांडवों से जोड़ा गया है और ऐसा माना जाता है कि यह पांच पांडवों में से एक अर्जुन द्वारा बनाया गया था।

मंदिर की वास्तुकला तेजस्वी है और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता के कारण मंदिर में पहुंचने पर यह स्वर्ग की तरह दिखाई देता है। मंदिर की संरचना उत्तर भारतीय शैली में बनी है और यह कई अन्य देवताओं के छोटे मंदिरों से घिरा हुआ है। व्यास और काल भैरव जैसे लोकप्रिय हिंदू संतों की मूर्तियों को भी मंदिर में विराजित किया गया है।

कैसे पहुंचे :

ट्रेन मार्ग द्वारा : तुंगनाथ मंदिर के लिए हरिद्वार निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह चोपता से 225 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो मंदिर का निकटतम शहर है।

सड़क मार्ग द्वारा : चोपता तक टैक्सी या बसें आसानी से उपलब्ध हैं जिसके बाद पैदल यात्रा शुरू होती है। कुंड-गोपेश्वर रोड से होकर कोई भी व्यक्ति तुंगनाथ पहुंच सकता है।

हवाई मार्ग द्वारा : देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय : मंदिर अप्रैल या मई के महीने में खुलता है और अक्टूबर के महीने तक खुला रहता है। चोपता एक लोकप्रिय गंतव्य है जहां सर्दियों के दौरान आप बर्फबारी का मजा ले सकते हैं।

केदारनाथ, गढ़वाल, उत्तराखंड

इस स्थान को किसी भी परिचय की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह शिव के भक्तों के सबसे श्रद्धेय तीर्थ स्थलों में से एक है। यह यमुनोत्री, गंगोत्री और बद्रीनाथ के साथ उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के चार स्थलों में से एक है। केदारनाथ सबसे मनोरम और कठिन तीर्थ स्थल में से एक है। इस मंदिर में हर साल हजारों भक्त आते हैं। यह सबसे अधिक भ्रमण किए जाने वाले स्थल में से एक है क्योंकि केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचा है, जहां भगवान शिव लौकिक प्रकाश के रूप में प्रकट हुए थे। मंदिर मंदाकिनी नदी के पास स्थित है और लगभग 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, पंच केदारों में से एक केदारनाथ मंदिर केवल अप्रैल से नवंबर में आगंतुकों के लिए खुला रहता है। बाकी साल मंदिर बंद रहता है क्योंकि यह स्थन भारी बर्फ से ढका रहता है।

कैसे पहुंचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: ऋषिकेश निकटतम रेलवे स्टेशन है जो 216 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप बस से जा सकते सकते हैं या निकटतम बस स्टेशन से टैक्सी किराए पर ले सकते हैं और गौरीकुंड तक पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग द्वारा: गौरीकुंड केदारनाथ का निकटतम क्षेत्र है जो अंतर्राज्यीय और राज्य बस सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह एनएच 109 पर स्थित है।

हवाई मार्ग द्वारा: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है जो 238 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: चूंकि मंदिर अप्रैल से नवंबर तक खुला रहता है, इसलिए इन महीनों के दौरान ही यात्रा करनी चाहिए।

काशी विश्वनाथ, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी शहर में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर बहुत ही ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। इसके साथ ही, जैसा कि पुराणों में उल्लेख किया जाता है, कि वाराणसी भगवान शिव का प्रिय स्थान माना जाता है। वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए सभी जगाहों से श्रद्धालु भारी संख्या में यात्रा करने के लिए आते हैं। प्राचीन काल में वापस जाते हुए, कोई भी हिंदू शास्त्रों में इस मंदिर का उल्लेख खोज सकता है। यह अक्सर कहा जाता है कि जो लोग काशी में अपनी अंतिम सांस लेते है वह जन्म और पुनर्जन्म के कालचक्र से मुक्त हो जाते है क्योंकि यह माना जाता है कि मृत्यु के बाद उन लोगों को सीधे भगवान शिव के घर कैलाश पर्वत पर ले जाया जाता है। शिव भगवान सीधे मोक्ष से संबंधित हैं, लोगों का कहना है कि इस पवित्र स्थान पर अंतिम सांस लेने वाले भक्तों के कानों में भगवान शिव मोक्ष मंत्रो का पाठ करते है। यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है, इस मंदिर को भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।

कैसे पहुंचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: वाराणसी शहर आसपास के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मंदिर कैंट रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सड़क मार्ग द्वारा: मंदिर अच्छी तरह से सड़कों से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई भी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जा सकता है।

हवाई मार्ग द्वारा: वाराणसी हवाई अड्डा जो 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, मंदिर के लिए निकटतम हवाई अड्डा है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: किसी भी मौसम में मंदिर जा सकते हैं, लेकिन यह सलाह दी जाती है कि नवंबर और अप्रैल के महीने के बीच में मंदिर जाना चाहिए।

 अमरनाथ मंदिर, कश्मीर, जम्मू और कश्मीर

श्रीनगर में स्थित, अमरनाथ मंदिर को भगवान शिव के भक्तों के लिए इसका परिचय कराने की आवश्यकता नहीं है। 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, अमरनाथ मंदिर श्रीनगर से लगभग 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भक्त एक गुफा के माध्यम से मंदिर तक पहुंचते हैं जहाँ प्राकृतिक रूप से हर साल बर्फ से शिवलिंग बनता है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। जगह की ऊंचाई के कारण, मंदिर पूरे वर्ष भर बहुत ही ज्यादा मात्रा में बर्फ से ढका रहता है। जब मंदिर आम जनता के लिए सुलभ होता है, तो हजारों भक्त पहाड़ी इलाकों को पार करते हैं और मंदिर तक पहुंचने के लिए अपना रास्ता बनाते हैं। बर्फीले परिवेश, शांति और दिव्य आनंद के कारण इस मंदिर की सुंदरता बढ़ जाती है।

कैसे पहुंचे :

ट्रेन मार्ग द्वारा : अमरनाथ मंदिर का निकटतम स्टेशन जम्मू है जो 178 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सड़क मार्ग द्वारा : अमरनाथ एक दुर्गम इलाके में स्थित है, इसलिए यह अच्छी तरह से सड़कों द्वारा जुड़ा हुआ नहीं है। कोई भी व्यक्ति सड़क मार्ग से पहलगाम तक पहुंच सकता है और फिर अमरनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए ट्रेक कर सकता है या टट्टू ले सकता है।

हवाई मार्ग द्वारा : निकटतम हवाई अड्डा श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो अमरनाथ से 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय :  इस मंदिर में जाने के लिए मई से सितंबर का समय सबसे उपयुक्त है।

बृहदीश्वर मन्दिर, तंजावुर, तमिलनाडु

यह मंदिर राजराजेशवरम या पेरुवुदैयार कोइल के रूप में भी जाना जाता है, बृहदेश्वर मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर है जिसे चोल राजवंश के राजा राजचोल ने बनवाया था। यह भव्य शिव मंदिर एक हजार साल से अधिक पुराना है और वास्तुकला का एक शानदार नमूना प्रदर्शित करता है। ग्रेनाइट से बना, मंदिर वास्तुकला की द्रविड़ शैली का सबसे बड़ा उदाहरण प्रदर्शित करता है। मंदिर में एक ग्रेनाइट टॉवर भी है जिसे विमना टॉवर कहा जाता है जो गर्भगृह के ऊपर है। यह दक्षिण भारत के सबसे ऊंचे टावरों में से एक है। बृहदेश्वर मंदिर में प्रवेश द्वार पर नंदी की एक बड़ी मूर्ति भी है जो एक ही चट्टान से तराशी गई है। मुख्य रूप से ग्रेनाइट से बना मंदिर तंजावुर में सबसे अधिक भ्रमण किए जाने वाला पर्यटक आकर्षण है।

कैसे पहुंचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: तंजावुर निकटतम स्टेशन है जो अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग द्वारा: कोई भी व्यक्ति तंजावुर के लिए नियमित बसें प्राप्त कर सकता है क्योंकि यह देश के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: इस मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय मई और अक्टूबर महीनों के बीच का है। नवंबर से अप्रैल तक मंदिर बंद रहता है।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कोलार, कर्नाटक

कोलार जिले के एक छोटे से गाँव कम्मासंद्र में स्थित इस मंदिर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग हैं। यह मंदिर पूरे एशिया में भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है और हर साल लगभग 2 लाख भक्त इस मंदिर में जाते हैं। मुख्य लिंग कई छोटे लिंगों से घिरा हुआ है, जिन्हें लगभग एक करोड़ कहा जाता है। परिसर में छोटे मंदिर हैं जो अन्य देवताओं को समर्पित हैं। यहां तक कि भक्त संरक्षण के लिए अपने नाम के साथ अपने स्वयं के लिंग स्थापित कर सकते हैं। हर साल मौज-मस्ती के साथ मंदिर परिसर में मुफ्त सामूहिक विवाह भी आयोजित किए जाते हैं।

कैसे पहुंचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन बंगारापेट है जो 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बस मार्ग द्वारा: कोलार जिला बस मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, इसलिए सड़क मार्ग से मंदिर का दौरा किया जा सकता हैं।

हवाई मार्ग द्वारा: मंदिर के लिए निकटतम हवाई अड्डा केम्पेगौड़ा हवाई अड्डा है जो बेंगलुरु में स्थित है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: कोटिलिंगेश्वर मंदिर में शिवरात्रि को बड़े उत्साह और धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। आप जुलाई और जनवरी के बीच मंदिर का भ्रमण कर सकते हैं।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा

भगवान शिव के एक रूप हरिहर को समर्पित, यह मंदिर भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।  शहर के सबसे प्रमुख स्थल के रूप में चिह्नित, यह मंदिर राज्य का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। इस मंदिर में कलिंग वास्तुकला की झलक देखी जा सकती है। देउला शैली में, इस मंदिर के चार घटक हैं – विमना – संरचना जिसमें गर्भगृह, जगमोहन – सभा हॉल, नटामंडीरा – उत्सव हॉल और भोग-मंडप – भेंट का हॉल। प्रलेखित इतिहास के अनुसार, यह कहा जाता है कि मंदिर कम से कम 1100 वर्ष पुराना है और इसके उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में देखे जा सकते हैं। मंदिर की आकर्षक स्थापत्य शैली के कारण मंदिर को सपने और वास्तविकता का एक सच्चा संलयन माना जाता है। इसे दुनिया के सबसे खूबसूरत मंदिरों में गिना जाता है।

कैसे पहुंचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन इस मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन है।

सड़क मार्ग द्वारा: मंदिर भुवनेश्वर शहर में स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग द्वारा: भुवनेश्वर में स्थित बीजू पटनायक हवाई अड्डा मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: शिवरात्रि, रथ यात्रा और चंदन यात्रा जैसे त्यौहार पूरे मज़े और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। जब ये त्यौहार मनाए जाते हैं उस समय आपको मंदिर जाना चाहिए।

तारकनाथ मंदिर, तारकेश्वर, पश्चिम बंगाल

तारकनाथ मंदिर, जिसे तारकेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, गहन धार्मिक मान्यताओं के साथ जुड़ा हुआ है। तारकनाथ मंदिर हुगली जिले में स्थित है और ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण 1729 ईस्वी में हुआ था। मंदिर में प्रतिदिन आगंतुकों का जमावड़ा लगा रहता है, जो पूरी श्रद्धा-भक्ति के साथ भगवान शिव की उपासना करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव धर्म में आस्था रखने वाले सभी भक्तों के उद्धारक हैं। किंवदंतियों में कहा गया है कि राजा विष्णु दास ने एक सपना देखा था जिसमें उन्होंने जंगल के बीच शिवलिंग पाया। स्वयं भगवान शिव ने उन्हें इस राजसी मंदिर का निर्माण करने का निर्देश दिया। ऐसा माना जाता है कि उसी शिवलिंग को मंदिर के अंदर रखा गया है। लोगों का मानना है कि जो भी भक्त पानी की एक बूंद पिए बिना उपवास रखता है भगवान तारकनाथ उसकी मनोकामना पूरी करते हैं।

कैसे पहुँचे:

ट्रेन मार्ग द्वारा: कमरकुंडू रेलवे स्टेशन निकटतम स्थान है जो इस शहर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

बस मार्ग द्वारा: तारकेश्वर सड़कों के माध्यम से सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

हवाई मार्ग द्वारा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता, मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा है।

भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर और मार्च के बीच आप इस मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।

आदियोगी प्रतिमा

पौराणिक कथाओं में भी भगवान शिव को योगी के रूप वर्णित किया गया है और उन्हें योग का प्रवर्तक माना जाता है, यही कारण है कि उन्हें आदियोगी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने योग की इस अवधारणा को मनुष्यों के दिमाग में डाला और उन्होंने हिमालय पर योग का अभ्यास करके अपना पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया था। यात्रा के लिए एक और प्रसिद्ध स्थान आदियोगी प्रतिमा है, 34.3 मीटर ऊंची इस प्रतिमा को तमिलनाडु के कोयंबटूर में थिरुनमम में बनाया गया है। इस प्रतिमा को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने “लार्जेस्ट बस्ट स्कल्पचर” के रूप में मान्यता दी है।

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भारत में लोकप्रिय शिव मंदिर जहां आपको जीवन में एक बार जरूर जाना चाहिए
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भारत में सबसे महत्वपूर्ण शिव मंदिरों की यात्रा करें। सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में जानने के लिए पढ़ें।