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जलियाँवाला बाग, अमृतसर: राष्ट्रीय सार्थकता का स्मारक

May 26, 2017


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जलियाँवाला बाग, अमृतसर: राष्ट्रीय सार्थकता का स्मारक

स्थानस्वर्ण मंदिर के पास, सिखों का पवित्र तीर्थस्थान, अमृतसर, पंजाब

आजादी के 66 साल बाद, आजादी की लडाई में शहीद हुए लोगों के बारे में सोच कर, हम आज भी उतनी ही पीडा महसूस करते हैं। जलियाँवाले बाग, अमृतसर में हुईं सबसे भयानक घटनाएँ आज भी दिल को ठेस पहुँचाती हैं। जलियाँवाला बाग एक दुर्भाग्य पूर्ण स्थल है, जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश सैनिकों द्वारा कई मासूम लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आज, यह जलियाँवाला बाग नर संहार के दौरान मारे गए लोगों की याद के लिए राष्ट्रीय सार्थकता का एक स्मारक है।

उस दिन की दुखद घटना के बाद, हत्याकांड के शहीदों के लिए एक स्मारक का निर्माण करने के लिए एक समिति बनाई गई थी। वर्ष 1920 में देश द्वारा स्मारक के निर्माण के लिए 6.5 एकड़ भूमि अधिग्रहण की गई थी और 1961 में एक सार्वजनिक उद्यान के रूप में यह स्मारक खोला गया था। इस स्मारक का उद्घाटन स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। यह स्मारक बगीचे में एक ही प्रवेश द्वार के साथ सभी तरफ ऊँची दीवारों से घिरा हुआ है। एक 30 फीट ऊँचा स्तम्भ, चारों ओर पत्थर की लालटेन बगीचे में उथले टैंक के बीच में स्थित है। अशोक चक्र और “शहीदों की स्मृति के लिए, 13 अप्रैल 1919” के शब्द लालटेन पर लिखे हुए हैं, जो स्तंभो के सभी तरफ चारों ओर लिखे गए हैं। शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए दीपक को जलाकर, प्रवेश द्वार पर रखा गया है। जिसकी लौ हमें शहीदों की याद दिलाती है।

जलियाँवाले बाग की खूबसूरती ट्रस्ट की देखरेख के कारण ही बनी हुई है, गोलियों के निशान अभी भी दीवारों पर पूरी तरह से बने हुए हैं। हालांकि जहाँ से गोलीबारी की गई थी, उस स्थान को चिह्नित कर दिया गया था। शहीदों की याद के लिए, जिसमें हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए कुएँ में कूद गए, उसे दीवारों और एक छत के साथ ढक दिया गया है। बगीचे में एक रंगमहल भी है जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य ऐतिहासिक साक्ष्यों के चित्र हैं। जैसे ही हम बगीचे में प्रवेश करते हैं, वैसे ही दु:ख का एक पहर हृदय पर आघात करता है। दीवारों पर गोली के निशान, जलते हुए दीपक, कुआँ और अन्य परिवेश भारत की आजादी के लिए संघर्ष की प्रतीक है। बाग मे मारे गए लोगों का त्याग अतुलनीय है। ये लोग भारत की आजादी के लिए, एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते थे। कोई भी व्यक्ति स्मारक पर नमन कर हमारे देश के इन अनगिनत नायकों की आत्माओं के लिए प्रार्थना कर सकता है।

समय:
ग्रीष्म काल में: सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक
शरद काल में: सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक

रंगमहल:
ग्रीष्मकाल: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक
शरद काल: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक

प्रवेश: निशुःल्क

त्वरित सुझाव:

  • इस जगह का दौरा करने का सबसे उचित समय अक्टूबर से मार्च तक का है।
  • कुछ दिलचस्प ऐतिहासिक कलाकृतियों को देखने के लिए बगीचे में रंगमहल
    के माध्यम से जा सकते हैं।
  • जलियाँवाले बाग में जो हुआ था उसके बारे में बेहतर जानकारी के लिए रंगमहल में दिखाई जाने वाली लघु फिल्म देखें।
  • भारत को गुलामी से मुक्त कराने के लिए अपनी जान पर खेलने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए जलियाँवाले बाग को जाएं।